लौट

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सच कहाँ हैं?

सच कहाँ हैं?कब्रिस्तानमे राख़ नहीं मिलती, मिट्टी-मिट्टी मे दफन हो जाती हैं लाशे।समशान मे हैंराख़,एक चिंगारी सेआग लगकर शांत हो जाती चिताए। लौट जाते हैंवह लोग, ख्वाबोंके समुंदर मे भ्रमित गोते लगाते हुए।दफन हो जाना, भसम हो जाना,ताबबूतों मे सिमट कर रह जाना अंत हैं।यह सारा दृश्य, आंखो की पालको को भिंगोते ह



गज़ल - सूर्यभान कुशवाहा

गजल-अपनो को कभी गॆर,बताया न कीजियेदिल मे नही जगह,तो सताया न कीजिये।आंखों में बसा लीजिए, काजल ही मानकरआंसू के साथ इनको,बहाया न कीजियेऎसे भला जलाकर नफरत की आग परताली मजे से बॆठ,बजाया न कीजियेमाना तुम्हारे ज



satya Sayri

Mai ghar we nikala tha manzil ki tarafMai manzil se bhi dur chala aya huMai laut bhi jau waps to kya hasil haiMai sab kuch chhod kar mazbur chala aya huMuje lagat hai khusiyo ki talash me mai zannat se bahut dur chala aya hu.





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