लिखी

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अंधी ममता दिमाग की नहीं दिल की सुनती है

अंधी ममता दिमाग की नहीं दिल की सुनती है ?डॉ शोभा भारद्वाज इंडोनेशिया एवं सिंगापुर की पृष्ट भूमि में लिखी कहानी यूनी 22 वर्षों से सिंगापुर में मेड का काम कर रही थी यहाँ इन्हें नैनी कहा जाता वह सिंगापूर की नागरिकता लेना चाहती है नहीं मिली वहाँ केवल पढ़े लिखे प्रतिभाव



जोक

एक चींटी दूसरी चींटी से ..कहाँँ जा रही हो बहन .पहली चींटी दूूसरी से बोली..क्या बताऊ बहन हाथी मर गई है उसी को अपना खून देने जा रही हूँँ.



पांचाली, स्वयंवर से चीर हरण तक

‘पांचाली’ स्वयंवर से चीरहरण तक डॉ शोभा भारद्वाज प्रोफेसर डॉ लल्लन प्रसाद जी एक अर्थशास्त्रीहैं , साथ ही मन के भावों को सरल भाषा मेंकविता का रूप देने की कला माहिर हैं उन्होंने महाभारत के पात्रों में पांचाली कीकथा ‘स्वयंबर से चीर –हरण तक’ का वर्णन बड़ेसुंदर ,मार्मिक ढ



ईरानी खानम , जीना सिखा गयी

ईरानी खानम, जीना सिखा गयी डॉ शोभा भारद्वाज पलवल शटल से जा रही थी गाड़ी चलने से पहले एक महिला डिब्बे में चढ़ीं उनको देखकर यात्रियों ने तुरंत बैठने के लिए सीट दे दी जबकि मैं पहले से खड़ी थी महिला नेमेरे लिए भी अपने पास जगह बना दी मैं उनको एकटक देख रही थी , बोलने के मीठे लहजेमें ईरानी शिष्टाचार था नील





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