कोरोना का कहर

मनुष्य पर छाई है छिपी अंधेरा, रूप धारण कर वाईरस कोरोना ।इसका अर्थ है मनुष्य पर भारी , क्योंकि है ये महामारी ।अब मानव की दशा क्या होगी ?क्या कोरोना की विदाई होगी ?देख दृश्य मन विचलित हो उठता, क्या यही है सभ्य की कृपा ।क्या यह , मानव जीवन सिहर उठेगा ?या संसार पुनः हिलस उठेगा ?



सन्नाटा पसरा है।

कोरोना फैला है सारे संसार मा। गले मिलने की बात छोड़ो हाथ का धप्पा भी न दे किसी भी बात मा। न बस चले न रेल चले, न चले कलकारखाने लोग निकल पड़े है अपने गांव को। सब खो गई उम्मीदे मानव के अंदर की।गली चौक चौबारे खत्म हो गए पब बियर-बार लकड़ी ताश के घेरे। पड़े हुए कोरोना के डर से परदेशी प्रदेश मा। कोरोना फैला



बुरे लोगों के साथ बुरा क्यों नहीं होता

बुरे लोगों के साथ बुरा क्यों नहीं होता एक साधक ने एक यश प्रश्न किसी आचार्य के आगे रख दिया कि है आचार्य बुरे लोगों के साथ बुरा क्यों नहीं होता उन्हें उनके बुरे कर्मों की सजा क्यों नहीं मिलती अपितु अच्छे लोगों के साथ ही सदैव बुरा क्यों होता है।आचार्य दो मिनट मौन रहने



Archana Ki Rachna: Preview " मैं बदनाम "

ऐसा क्या है जो तुम मुझसेकहने में डरते हो पर मेरे पीछे मेरी बातें करते हो मैं जो कह दूँ कुछ तुमसे तुम उसमें तीन से पांचगढ़ते होऔर उसे चटकारे ले करदूसरों से साँझा करते होमैं तो हूँ खुली किताबबेहद हिम्मती और बेबाक़रोज़ आईने में नज़रमिलाता हूँ अपने भीतर झाँक, फिरऐसा क्या है जो



टिक - टाॅक के बाजार मे

मुजरा करते दिख रही है लड़कियाँटिक - टाॅक के बाजार मे यू ही बदनाम है हम लड़के इस संसार मेलड़कियाँ नाचती दिख रही है टिक - टाॅक के बाजार मे फर्क क्या है उसमे और तुममे जो कोठे पर नाचती है संसार मेआज बड़े घरो के बेटियाँ नाचती हैटिक - टाॅक के बाजार मे कोई नाचती है पैसा के लिए सरेआम इस संसार मेकोई लाइक और शेयर



तु भारत की शान है

तु भारत की शान है तु भारत की मान हैतु ही भारतवासी के लिए भगवान् हैहमारा भारतीय सेना महान है।जब जब देश मे खतरा मंडरायातु उठ खड़ा हुआ क्योंकि भारत मे बस एक तु ही महान है।बस एक तु ही भारत का जान है।तु भारत की शान है।जब जब कश्मीर पर कोई अत्याचार हुआतू उसका मुँह तोड़ जबाव दिया।इन्सान के रूप मे तु



मैं ही सही हूँ, सबसे बड़ा भ्रम

मैं ही सही हूँ, सबसे बड़ा भ्रम : I'm right, The biggest fallacyमैं ही सही हूँ ""तस्वीरें दीवारों से ही नहीं, दिल से भी उतर जाती हैं उनकी , जिन्हें अपने पर खुदा होने का गुरुर होता है। बस जाती हैं यादें दिलों में उनकी , जिन्होंने दिलों को फ़तेह किया होता है। न रहता है ता



जिंदगी का सफर

हम वह नहीं जो तेरा साथ छोड़ देंगेहम वो नहीं जो तुम से मुंह मोड़ लेंगेहम तो वह हैं दोस्तजब टूटेगी तेरी सांस तो अपनी सांस जोड़ देंगे



लोग क्या कहेंगे

लोग क्या कहेंगे ।वो 29 साल की है, कामयाब है, अपने पैरों पर खड़ी है, ज़िन्दगी अपने तरीके से जीती है, खुश है।फिर भी हर रोज़ माँ-बाप और रिश्तेदार उसे, "शादी की उम्र निकल रही है, अब तुझे कौन मिलेगा!"के ताने सुनाएंगे।क्योंकि बेटी की शादी नहीं हुई, तो लोग क्या कहेंगे?वो दोनों एक दूसरे से प्रेम करते हैं, शायद



अक्सर समझ नहीं पाते हैं लोग

अक्सर समझ नहीं पाते हैं लोग मन से मन की बातों को,शब्दों के जज्बातों को, सोचती जागती रातों को, अक्सर समझ नहीं पाते हैं लोग.......संबंधों की गहराई को, समय की दुहाई को, अपनों की अच्छाई को,अक्सर समझ नहीं पाते हैं लोग....... नेह से



वह कुछ लोग



सबलोग धरें हिय

सबलोग धरें हिय प्रेमसुधा, सबके हित में सब कर्म करें। सबकी मधुबानि सुहावनि हो, सबके उर से मधुभाव झरें। सबलोग प्रसन्न रहें जग में, बहु कष्ट सहें पर धीर धरें। नित नेह बढ़े हरि के पग में, प्रभु मंगलकोष अपार भरें।



फिर कब मिलोगी (Phir Kab Milogi )

"Phir Kab Milogi" is a 1974 hindi film which has Dilip Kumar, Biswajeet, Mala Sinha, David, Deven Verma, Bipin Gupta, Ansari, Vijaya Chaudhary, Abhi Bhattacharya, Sailesh Kumar, Naaz, Uma Dutt, Neelima, Shridhar, Parveen Paul, Sujata, Bishan Khanna and Vikram in lead roles. We have and one song ly



सकारात्मक व नकारात्मक ---+ आचार्य अर्जुन तिवारी

!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *इस सृ्ष्टि में ईश्वर ने समस्त प्राणिमात्र को सारी ऊर्जायें समान रूप से प्रदान की हैं | सूर्य का प्रकाश , चन्द्रमा की शीतलता , नदियों का जल , हवा , प्राकृतिक सम्पदायें आदि समस्त प्राणिमात्र को समानरूप से मिल रही हैं | अनेक प्राकृतिक संसाधन मनुष्य को यहाँ प्राप्त हुए है



जाने भी दो यारों...

भारतीय सिनेमा जगत के सुनहरी पर्दे पर 1983 में एक सुपर स्टार्स फिल्म आई थी “जानेभी दो यारों" । एनएफ़डीसी द्वारा निर्मित इस फिल्म को ‘कुन्दन शाह’ द्वारा निर्देशितकिया गया है, जिसमें उस जमाने में व्याप्त भ्रष्टाचार सम्बन्धी बात किया गया है । मीडिया, राजनीति , उच्चाधिकारि



आवारगी भी कभी सोशलिस्ट हुआ करती थी...

चेतनाएं आवारा हो चली हैं,शब्द तो कंगाल हुए जाते हैं...लम्हों को इश्के-आफताब नसीब नहीं,खुशबु-ए-बज्म में वो जायका भी नहीं,मंटो मर गया तो तांगेवाला उदास हुआ,शहरों में अब ऐसे कोई वजहात् नहीं...!तकल्लुफ तलाक पा चुकी अख़लाक से,बेपर्दा तहजीब को यारों की कमी भी नहीं...।आवारगी भी कभी सोशलिस्ट हुआ करती थी,मनच



कि गुलशन का करोबार चले...

कुछ पता न चलेपर कारोबार चले,भरोसा न भी चले,जिंदगी चलती चले,चलन है, तो चले,रुकने से बेहतर, चले,न चले तो क्या चले,यूं ही बेइख्तियार चले,सांसें, पैर, अरमान चले,फिर, क्यूं न व्यापार चले,सामां है तो हर दुकां चले,हर जिद, अपनी चाल चले,अपनों से, गैर से, रार चले,इश्क है, न ह



तेरे मेरे सपने

रहे जुदा हो गई अब अजनबी हो जायेंगे .. तेरे मेरे सपने सनम अब तू ही बता कहा जायेंगे ...!! राह में कोई नहीं तेरे यादो के सिवा हमसफ़र ...तेरी याद अब ना आई तो शायद हम मर जाएंगे ...!!! दिवार ही दिवार खड़



बिछुडन ा

मिलकर बिछुड़ना लोगों का जिदंगी का दस्तूर बन गया , जिंदगी का वो हर एक पल जीवन का इतिहास बन गया , कारवां गुजर गया पढते पढ़ते इस इतिहास को , मालूम हु यी ना राज बिछुड़ने का , सिर्फ ये प्रकृति के बदलाव का बहाना बन गया ।। धन्यवाद



सफ़र और हमसफ़र : एक अनुभव

 अकसर अकेली सफ़र करतीलड़कियों की माँ को चिंताएं सताया करती हैं और खासकर ट्रेनों में . मेरी माँ केहिदयातानुसार दिल्ली से इटारसी की पूरे दिन की यात्रा वाली ट्रेन की टिकट कटवाईमैंने स्लीपर क्लास में . पर साथ में एक परिवार हैबताने पर निश्चिन्त सी हो गयीं थोड़ी .फिर भी इंस्ट्रक्शन मैन्युअल थमा ही दीउन्होंने



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