किसान आंदोलन! उत्पन्न ‘‘आशंका के परसेप्शन‘‘ को दूर करने के लिए सरकार को ‘‘कदम उठाने‘‘ ही होंगे।

अभी हाल में ही मैंने बिहार विधानसभा के आम चुनाव और मध्य प्रदेश के उपचुनावों के संबंध में यह लिखा था कि ‘‘अंकगणित की जीत‘‘ के साथ ही उससे उत्पन्न ‘‘परसेप्शन‘‘ को जीतने पर ही ‘‘जीत पूर्ण‘‘ कहलाती है। किसान आंदोलन को देखते हुए परसेप्शन का उक्त सिद्धांत संसद एवं सरकार द्वारा लागू अधिनियम एवं लि



गरीब और असहाय लोगो की डोर किसके हाथ में?

गरीब औरअसहाय लोगो की डोर किसके हाथ में?यूपी केहाथरस रेप कांड ने पिछले दो चार दिनो में देश के आम लोगो को अपने बोर में सोचने व समझने का मौका दिया कि वे‍ किस तरहकतिपय लोगों की कठपुती बने समाज में जी रहे हैं: यह भी लगभग साफ हो गया कि उनकेऊपर किन लोगों की मर्जी चलती है: मीडिया को भी यह समझने का मौका मिल



नाम क्यूँ नहीं लेते

लोग कहते हैं तुम नाम क्यूँ नहीं लेते...!!!मैंने कहा छोड़ो यारों मैंने उन्हें छोड़ दिया इससे ज़्यादा और क्या इल्ज़ाम देते...!!!



आत्मा लूट

भूख पर लिखने से कागज भलें ही भर जाएं, पर किसी का पेट नहीं.. लोगों को लोगों की जरूरत नहीं रहती है, पर लोगों की जरूरतें रहतीं हैं... भरोसा, विश्वास अपने पन के खंजर है, मारने वाले झूठ फरेब से, पीठ में ही नहीं सीने में भी मिठास के साथ उतार देते हैं। बचना ऐसे लोगों से, जो आपको चाहने का छलावा करते हैं। ल



कोरोना तो करोना, सांप भी पीछे नहीं!

कोरोना तो करोना, सांप भी पीछे नहीं!इस समय कोरोना ही नहीं सर्प भी लोगों का दुश्मन बना हुआ है. देश में इस समय मानसून और कोराना का दौर चल रहा है.कोरोना और सर्प का विष दोनो ही मनुष्य पर हावी है. कोरोना से मौत का सिलसिला हमारे देश में इस साल शुरू हुआ किन्तु पिछले बीस सालों में सांप के काटने से तकरीबन



गुलाश और पालिंका के देश हंगरी में कुछ दिन - दिनेश डाक्टर

छह साल बाद यात्रा संस्मरण लिखना न तो आसान है और न ही उत्साहपूर्ण । साढ़े तीन महीने से दुनिया भर में घूमने की पुरानी स्मृतियों के सहारे वक़्त काट रहा था कि पिछले हफ़्ते पुराने काग़ज़ खंगालते खंगालते एक नोट पैड हाथ आ गया । मैं भूल ही गया था कि हंगरी यात्रा के दौरान मैंने कुछ हल्के फुल्के नोट्स बनाए



भेदियों से देश को कितना नुकसान!

भेदियों से देश को कितना नुकसान!अक्सर होता यह है कि किसी आपराधिक वारदात को रोकने पहले कोई एहतियाती कदम नहीं उठाये जाते किन्तु जब हो जाता है तो यह बवंडर बन जाता है तथा उसके पीछे जनता का पैसा इतना खर्च हो जाता है कि उसकी कोई सीमा नहीं रहती. उत्तर प्रदेश में भले ही छोटे मोटे अपराध को ज्यादा तबज्जो नहीं



गांव के प्रत्येक वर्ग के लोगों को जागरूक बनाना

अब तक हिंदी न्यूज़ /प्रजायगराज/मेजा/पट्टीनाथ राय गांव के प्रत्येक वर्ग के लोगों को जागरूक बनाना हमारी प्राथमिकता__ श्यामराज यादव अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी सिरसा मण्डलआज नेहरू युवा केंद्र प्रयागराज युवा खेल मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशन में मेजा के राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवक रविशंकर द्वारा निरंतर जन



अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस ( संस्मरण )

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (संसमरण )डॉ शोभा भारद्वाजसिंगापूर के बाशिंदों को फिटनेस का बहुत शौक है वह हर वक्त लम्बी सैर करते या साईकिल चलाते नजर आते | कोरोना काल में भी उनका साइकिल चलता रहा मैं कुछ दिन सिंगा



कोरोना का कहर

मनुष्य पर छाई है छिपी अंधेरा, रूप धारण कर वाईरस कोरोना ।इसका अर्थ है मनुष्य पर भारी , क्योंकि है ये महामारी ।अब मानव की दशा क्या होगी ?क्या कोरोना की विदाई होगी ?देख दृश्य मन विचलित हो उठता, क्या यही है सभ्य की कृपा ।क्या यह , मानव जीवन सिहर उठेगा ?या संसार पुनः हिलस उठेगा ?



सन्नाटा पसरा है।

कोरोना फैला है सारे संसार मा। गले मिलने की बात छोड़ो हाथ का धप्पा भी न दे किसी भी बात मा। न बस चले न रेल चले, न चले कलकारखाने लोग निकल पड़े है अपने गांव को। सब खो गई उम्मीदे मानव के अंदर की।गली चौक चौबारे खत्म हो गए पब बियर-बार लकड़ी ताश के घेरे। पड़े हुए कोरोना के डर से परदेशी प्रदेश मा। कोरोना फैला



बुरे लोगों के साथ बुरा क्यों नहीं होता

बुरे लोगों के साथ बुरा क्यों नहीं होता एक साधक ने एक यश प्रश्न किसी आचार्य के आगे रख दिया कि है आचार्य बुरे लोगों के साथ बुरा क्यों नहीं होता उन्हें उनके बुरे कर्मों की सजा क्यों नहीं मिलती अपितु अच्छे लोगों के साथ ही सदैव बुरा क्यों होता है।आचार्य दो मिनट मौन रहने



Archana Ki Rachna: Preview " मैं बदनाम "

ऐसा क्या है जो तुम मुझसेकहने में डरते हो पर मेरे पीछे मेरी बातें करते हो मैं जो कह दूँ कुछ तुमसे तुम उसमें तीन से पांचगढ़ते होऔर उसे चटकारे ले करदूसरों से साँझा करते होमैं तो हूँ खुली किताबबेहद हिम्मती और बेबाक़रोज़ आईने में नज़रमिलाता हूँ अपने भीतर झाँक, फिरऐसा क्या है जो



टिक - टाॅक के बाजार मे

मुजरा करते दिख रही है लड़कियाँटिक - टाॅक के बाजार मे यू ही बदनाम है हम लड़के इस संसार मेलड़कियाँ नाचती दिख रही है टिक - टाॅक के बाजार मे फर्क क्या है उसमे और तुममे जो कोठे पर नाचती है संसार मेआज बड़े घरो के बेटियाँ नाचती हैटिक - टाॅक के बाजार मे कोई नाचती है पैसा के लिए सरेआम इस संसार मेकोई लाइक और शेयर



तु भारत की शान है

तु भारत की शान है तु भारत की मान हैतु ही भारतवासी के लिए भगवान् हैहमारा भारतीय सेना महान है।जब जब देश मे खतरा मंडरायातु उठ खड़ा हुआ क्योंकि भारत मे बस एक तु ही महान है।बस एक तु ही भारत का जान है।तु भारत की शान है।जब जब कश्मीर पर कोई अत्याचार हुआतू उसका मुँह तोड़ जबाव दिया।इन्सान के रूप मे तु



मैं ही सही हूँ, सबसे बड़ा भ्रम

मैं ही सही हूँ, सबसे बड़ा भ्रम : I'm right, The biggest fallacyमैं ही सही हूँ ""तस्वीरें दीवारों से ही नहीं, दिल से भी उतर जाती हैं उनकी , जिन्हें अपने पर खुदा होने का गुरुर होता है। बस जाती हैं यादें दिलों में उनकी , जिन्होंने दिलों को फ़तेह किया होता है। न रहता है ता



जिंदगी का सफर

हम वह नहीं जो तेरा साथ छोड़ देंगेहम वो नहीं जो तुम से मुंह मोड़ लेंगेहम तो वह हैं दोस्तजब टूटेगी तेरी सांस तो अपनी सांस जोड़ देंगे



लोग क्या कहेंगे

लोग क्या कहेंगे ।वो 29 साल की है, कामयाब है, अपने पैरों पर खड़ी है, ज़िन्दगी अपने तरीके से जीती है, खुश है।फिर भी हर रोज़ माँ-बाप और रिश्तेदार उसे, "शादी की उम्र निकल रही है, अब तुझे कौन मिलेगा!"के ताने सुनाएंगे।क्योंकि बेटी की शादी नहीं हुई, तो लोग क्या कहेंगे?वो दोनों एक दूसरे से प्रेम करते हैं, शायद



अक्सर समझ नहीं पाते हैं लोग

अक्सर समझ नहीं पाते हैं लोग मन से मन की बातों को,शब्दों के जज्बातों को, सोचती जागती रातों को, अक्सर समझ नहीं पाते हैं लोग.......संबंधों की गहराई को, समय की दुहाई को, अपनों की अच्छाई को,अक्सर समझ नहीं पाते हैं लोग....... नेह से



वह कुछ लोग



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