माँ



माँ कात्यायनी वन्दना

हरिगीतिका छन्द,2212 2212 2, 212 2212हे! मात! नत मस्तक नमन नित,वन्दना कात्यायनी।अवसाद सारे नष्ट कर हे, मात! मोक्ष प्रदायनी।हे! सौम्य रूपा चन्द्र वदनी, रक्त पट माँ धरिणी।हे! शक्तिशाली नंदिनी माँ, सिंह प्रिय नित वाहिनी।माथे मुकुट है स्वर्ण का शुभ, पुष्प कर में धारिणी।हे! मात!नत मस्तक नमन नित,वन्दना कात



कुपंथी औलाद

कुपंथी औलादआज के दौर में पुत्र माता पिता को, सदा दे रहे गालियां घात की।वो नहीं जानते नाज से थे पले, मन्नतों से हुए गर्भ से मातु की।ढा रहे वो सितम और करते जुलममारते मातु को और धिक्कारते।डांट फटकार कर एक हैवान बनवृद्ध माँ बाप को घर से निकालते।नौ महीने तुझे गर्भ में माँ रखी, उंगली उसकी पकड़ तू चला हाँथ



जिंदगी धूल हो गई

छोटे तो सब अच्छा था बड़े होकर जैसे भूल हो गईपहले खेलते थे मिट्टी से जनाब लेकिन अब तो जिंदगी ही धूल हो गई कोई डांट देता था तो झट से रो जाया करते थे फिर पापा मम्मी के सहला देने से तो आराम से सो जाया करते थे अब कोई डांट दे तो रोते नहीं अब आराम से सोते नहीं दोस्तों अब तो



माँ

प्रेम के सागर में अमृत रूपी गागर है माँ मेरे सपनों की सच्ची सौदागर है भूल कर अपनी सारी खुशियां हमको मुस्कुराहट भरा समंदर दे जाती है अगर ईश्वर कहीं है ,उसे देखा कहाँ किसने माँ धरा पर तो तू ही ,ईश्वर का रूप है हमारी आँखों के अंशु ,अपनी आँखों में समा लेती है अपने ओंठों की हंसी हम पर लुटा देती है हमारी



अंधी ममता दिल की सुनती है दिमाग की नहीं

अंधी ममता दिल की सुनती है दिमाग की नहीं डॉ शोभा भारद्वाज इंडोनेशिया एवं सिंगापुर की पृष्ट भूमि में लिखी कहानी यूनी 22 वर्षों से सिंगापुर में मेड का काम कर रही थी यहाँ इन्हें नैनी कहा जाता वह सिंगापूर की नागरिकता लेना चाहती है नहीं मिली वहाँ केवल पढ़े लिखे प्रतिभावान लोगों को नागरिकता दी जाती है



सभी महिलाओं को समर्पित

सभी महिलाओं को समर्पित============================बेटा घर में घुसते ही बोला ~ मम्मी, कुछ खाने को दे दो, बहुत भूख लगी है.यह सुनते ही मैंने कहा ~ बोला था ना, ले जा कुछ कॉलेज. सब्जी तो बना ही रखी थी.बेटा बोला ~ मम्मी, अपना ज्ञान ना ... अपने पास रखा करो. अभी जो कहा है, वो कर दो बस, और हाँ, रात में ढंग क



वचनामृत

https://vishwamohanuwaach.blogspot.com/2020/06/blog-post_26.html वचनामृतक्यों न उलझूँ बेवजह भला!तुम्हारी डाँट से ,तृप्ति जो मिलती है मुझे।पता है, क्यों?माँ दिखती है,तुममें।फटकारती पिताजी को।और बुदबुदाने लगता हैमेरा बचपन,धीरे से मेरे कानों में।"ठीक ही तो कह रही है!आखिर कितना कुछसह रही है।पल पल ढह र



माँ मैं फिर

*माँ मैं फिर**माँ मैं फिर जीना चाहता हूँ, तुम्हारा प्यारा बच्चा बनकर**माँ मैं फिर सोना चाहता हूँ, तुम्हारी लोरी सुनकर,* *माँ मैं फिर दुनिया की तपिश का सामना करना चाहता हूँ, तुम्हारे आँचल की छाया पाकर**माँ मैं फिर अपनी सारी चिंताएँ भूल जाना चाहता हूँ, तुम्हारी गोद में सिर रखकर,* *माँ मैं फिर अपनी भूख



जिंदगी माँग ले।

जिंदगी माँग ले।हम तो यारा एवन साइकिल के, तू माँग करे, कार फरारी की। ऐसा युग जिसमे, इंसान, इंसान से डरे कोरोना महामारी से। अपने अपने साधन खोज लो, न डिमांड करो जागवारा की।आदमी की कीमत से ज्यादा, गैस तेल पानी महंगा हो गया।इस दौर के वायरस से, अपना, अपने से पराया हो गया।इस मौत के तांडव से, जीवन देने वाल



आर्त्तनाद (लघुकथा)

आर्त्तनाद (लघुकथा)रात भर धरती गीली होती रही। आसमान बीच बीच में गरज उठता। वह पति की चिरौरी करती रही। बीमार माँ को देखने की हूक रह रह कर दामिनी बन काले आकाश को दमका देती। सूजी आँखों में सुबह का सूरज चमका। पति उसे भाई के घर के बाहर ही छोड़कर चला आया। घर में घुसते ही माँ के चरणों पर निढाल उसका पुक्का फट



माँ आपकी याद आती है

आप की याद आती है, माँ......आप की याद आती है .........अकेले हम जब भी होते हैं यादों के वो पल संजोते हैं कही अन्दर से चुपके से नि:श्छ्ल प्रेम से झंकृत जोमानसपटल पे अंकित वोमधुर, स्मृति कौंध जाती हैं बहुत ही याद आती है।।माँ...... आप की याद आती हैवो रोटी में प्यार का मक्खन वो गुझिया के खोए का मोयन खाते



चाँद की रोशनी में।

गेहूँ की पकी फसल में गिरती चाँद की रोशनी एकदम साफ थी। हवा के बहने से गेंहूँ की बालियां आपस मे रगड़ कर बज रही थी। घर बहुत दूर छूट गया था। रास्ता लंबा था। अनगिनत खेत पार कर चुके थे। हाथ मे लटकती लालटेन में जल रही बाती भभक कर तेज हो जाती तो कही बिल्कुल डिम हो जाती। दूसरे हाथ मे नीम के पेड़ की पतली छड़ी को



माँ की वेदना

आज एक गर्भवती महिला मेरे क्लीनिक में आई और गर्भ परीक्षण के लिए मुझ पर दबाव बनाई , मैंने बोला गर्भ परीक्षण कानूनन जुर्म है अगर तुम्हें लड़की होगी तो शायद तुम गिरा दोगी बेटा ही घर का नाम रोशन करें यह जरूरी तो नहीं बेटियां भी घर का नाम रोशन करती हैंतो वह बिफर गयी और चिल्लाते हुए बोली हे अंधे इंसाफ और ब



रानी बेटी ,लाडो बेटी असुरक्षित क्यों ?

रानी बेटी ,लाडो बेटीअसुरक्षित क्यों ?डॉ शोभा भारद्वाज देश में एक ही प्रश्न पूछा जा रहा है देश कीलगभग 48% आबादी महिलायें हैं |हर क्षेत्र में महिलायें पुरुष समाज से कमतर नहीं हैकई क्षेत्रों में आगे हैं |देश के विकास में उनका बराबर का योगदान है नेवी में एकमहिला पायलेट बनी , फाईटर पायलेट हैं लेकिन असुर



प्रथम गुरु माँ

माँ केवल कर्तव्य करती है, आसक्ति नहीं रखती। उसका कर्म इतना सुन्दर कि उसे नमन करने को दिल करता है। माताओं ने अपने बच्चों को महान संस्कार दिये हैं। इतिहास में ऐसी आदर्श और पूजनीय माताओं की लम्बी शृंखला है। विश्व के महापुरुषों की क़तार में इन माताओं का नाम भी आता है। इतिहास बताता है कि सुनीति, सुमित्रा



माँ शक्तिदादी मन्दिर कोटासर बीकानेर

माँ माना शक्ति दादी :- भारतवर्ष के राजस्थान राज्य में हर प्रान्त में दैविक शक्ति से सम्पन महापुरुष वीर,एवं भक्त हुए हैं जो धर्म रक्षक एवं



हे माँ, तुझे समर्पण ...

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!!! श्राद्ध खाने नहीं आऊंगा, कौआ बनकर !!!

(आँखो में आंसू ला दिये इस कहानी ने .......) "अरे ! भाई बुढापे का कोई ईलाज नहींहोता । अस्सी पार चुके हैं, अब बस सेवा कीजिये ।" डाक्टर पिताजी कोदेखते हुए बोला ।"डाक्टर साहब ! कोई तो तरीका होगा, साइंस नेबहुत तरक्की कर ली है ।""शंकर बाबू ! मैं अपनी तरफ से दुआ ही करसकता हू



Navratri 2019- नवरात्रि में होते है सभी शुभ कार्य, फिर शादी क्यों नहीं जानिए क्यों ?

माँ शक्ति के नौ स्वरूपों की पूजा, अर्चना, उपासना की जाती है। इस साल शारदीय नवरात्रि २९ सितम्बर से शुरू हो रही है। नवरात्रि का पूर्व हिन्दू धर्म से लोगो के लिए बहुत ही महत्व पूर्ण होता है। इन नौ दिनों तक माँ दुर्गा के शक्ति रूपों की पूजा की जाती है हर दिन एक रूप की पूजा की



वो हफ़्तों तक बंद थी, उसके ज़ख्मों पर कीड़े लग गए थे. और ये सब एक बेटे ने अपनी मां के साथ किया

तिरुवनंतपुरम पुलिस ने एक शख़्स के घर से उसकी मां को बचाकर बाहर निकाला. 75 वर्षीय महिला को उसके बेटे ने बांधकर रखा था.The News Minute की रिपोर्ट के मुताबिक़, ललिता को Liver Cirrhosis है और वो अपने छोटे बेटे विजयकुमार के साथ रह रही थी. ललिता का ढंग से इलाज भी नहीं करवाया जा



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