माना

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बहाने जिंदगी

माना हम चिट्ठियों के दौर में नहीं मिलें, डाकिए की राह तकी नहीं हमने। हम मिले मुट्ठियों के दौर में। जिसमें रूमाल कम, फोन ज्यादा रहता था। माना हम किताब लेने देने के बहाने नहीं मिलें, जिसे पढ़ते, पलटते सीने पर रख, बहुत से ख्वाब लिए उसके साथ सो जाया करते। हम मिले मेसेज, मेसेंजर, वाट्स अप, एफ बी, इंस्टा



योवो एप्प पर आप कैसे कमा सकते हैं?

मैने सुना है की योवो पर कामना बोहत ही सरल है ? इस एप्प पर कैसे कमाते हैं?



बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व दशहरा ( मन्दोदरी कथा )

बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व दशहरा (मन्दोदरी कथा ) डॉ शोभा भारद्वाज महारानी मन्दोदरी की कथा वहीं से शुरू होती है जब रावण हाथ में फरसा कमर में मृग चर्म लपेटे ऋषि एवं शूरवीर के वेश में राक्षस संस्कृति का प्रचार करते हुए कुछ उत्साही युवको



ज़माने को अब तक नहीं है पता (Zamaane Ko Ab Tak Nahin Hai Pata )- ज़माना दीवाना

Zamaane Ko Ab Tak Nahin Hai Pata Lyrics of Zamana Deewana : Zamaane Ko Ab Tak Nahin Hai Pata is a beautiful hindi song from 1995 bollywood film Zamana Deewana. This song is composed by Nadeem and Shravan. Alka Yagnik and Abhijeet has sung this song. Its lyrics are written by Sameer. ज़माना दीवाना (Za



ज़माना दीवाना (Zamana Deewana )

'ज़मानाना दीवाना' 1 99 5 की हिंदी फिल्म है जिसमें शाहरुख खान, जीतेन्द्र, रविना टंडन, शत्रुघ्न सिन्हा, अनुपम खेर, टिनू आनंद, प्रेम चोपड़ा, किरण जुनेजा, नीलिमा अज़ीम, बीना, घनश्याम, असिफ शेख और सुधीर प्रमुख भूमिका निभाते हैं। हमारे पास जमानाना दीवाना के एक गीत गीत हैं। नदीम और श्रवण ने अपना संगीत बना



क्या आप जानते हैं जो कि ज्यादातर लोग नहीं जानते?

क्या आप जानते थे की स्थायी या परमानेंट मार्करों के निशान इतनी आसानी से हटाये जा सकते हैं, जितने आपने कभी सोचा होंगे? हाँ,स्थायी मार्करों की स्याही को इत्र या डिओडोरेंट्स के साथ साथ बहुत आसानी से मिटाया जा सकता है| (डिओडोरेंट्स सर्वश्रेष्



माँ-बाप के पैर छुए हुआ एक जमाना

कवि: शिवदत्त श्रोत्रियछोड़ा घर सोच कर, किस्मत आजमाना पर क्यों ना लौट मैं, कोई करके बहाना जन्नत ढूंढता था, जन्नत से दूर होकर माँ-बाप के पैर छुए हुआ एक जमाना ॥



माना मै मर रहा हूँ

बेटो के बीच मे गिरे है रिश्‍तो के मायनेकैसे कहूँ कि इस झगड़े की वजह मे नही हूँ |कुछ और दिन रुक कर बाट लेना ये ज़मींमाना मै मर रहा हूँ, लेकिन मरा नही हूँ ||



27 सितम्बर 2015

नया ज़माना

हमें आएं दिन अपने बड़े-बुजुर्ग से सुनने को मिलता है कि अब ज़माना वो नहीं रहा.हमारा ज़माना,ज़माना हुआ करता था.बच्चे सभी बड़े-बुजुर्गो के पांव छुते थे,उनको सम्मान देते थे.आज कल के बच्चे न बड़ो को सम्मान देते है न उनकी बात सुनते है.बस अपनी ही मनमानी करते है.इस बात से मुझे अपने बड़े-बुजुर्गो की बात कुछ





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