क्या महिमा है मौन साधना की?

मौन की महिमा अपरंपार है, इसके महत्व को शब्दों के जरिए अभिव्यक्त करना संभव नहीं है।प्रकृति में सदैव मौन का साम्राज्य रहता है। पुष्प वाटिका से हमें कोई पुकारता नहीं, पर हम अनायास ही उस ओर खिंचते चले जाते हैं। बड़े से बड़े वृक्षों से लदे सघन वन भी मौन रहकर ही अपनी सुषमा से सारी वसुधा को सुशोभित करते है



‘‘कुंभ’’ ‘‘महाकुंभ’’ और ‘‘अर्धकुंभ’’ में क्या कोई अंतर हैं?

प्रयागराज (इलाहबाद) में मकर संक्र्राति से ‘‘अर्धकुंभ’’ प्रारंभहुआ है। लेकिन इस अर्धकुंभ को केन्द्रीय सरकार से लेकर उत्तर प्रदेश सरकार व समस्तमीडिया चाहे वह प्रिंट हो या इलेक्ट्रानिक इसे कुंभया महा!कुंभ कहकर महिमा-मंडित कर रहे हैं। इस ‘‘कुंभ’’ के जबरदस्तप्रचार-प्रसार के कारण ही मुझे भी यह शक हु



नारी तू नारी हैं

नव रसो की खान,आशा है, अभिलाषा है त्यागमयी ममतामयी जीवन की परिभाषा है श्रद्धासमर्पण दृश्यविहीन सी माया की परछाई ईश्वर की भरपाई करने तू जगत में आई बहुतेरे रूप तेरे बहुकार्यो में पारंगत तू शाश्वत अनुराग से भरी दुआये लुटाती तू बिना जताएअंतर्मन को पढ, चिन्ता भय मुक्त करती सौभाग्यवती भव मे हाथ उठे, सदैव आ



दुर्गा पूजा पर निबंध हिंदी में

दुर्गा पूजा के महत्त्व पर निबंध हिंदी में-Essay on Durga Pooja.दुर्गा पूजा पर निबंध: हम भारत देश में रहते है यहाँ विभिन्न धर्मो के लोग आपस में भाईचारे के साथ रहते है जैसे- हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई| और अलग अलग धर्मो को मानते है| दुर्गा



कितनी वांछित है?

कितनी वांछित है?✒️युवा वर्ग जो हीर सर्ग है, मर्म निहित करता संसृति काअकुलाया है अलसाया है, मोह भरा है दुर्व्यसनों कापिता-पौत्र में भेद नहीं है, नैतिकता ना ही कुदरत का;ऐसी बीहड़ कलि लीला में, आग्नेय मैं बाण चलाऊँकहो मुरारे ब्रह्म बाण की, महिमा तब कितनी वांछित है?जो भविष्य को पाने चल दे, वर्तमान का भा



स्टेडियम बेचते हैं: चेल्सी वी ग्लोरी रिकॉर्ड भीड़ आकर्षित करने के लिए

आज पर्थ ग्लोरी के खिलाफ चेल्सी एफसी अनुकूल मैच आधिकारिक तौर पर एक विक्रय आउट है, डब्ल्यूए स्पोर्ट उपस्थिति रिकॉर्ड तोड़ रहा है।ऑप्टस स्टेडियम ने साल की शुरुआत में पहली बार पुष्टि की है कि 60,000 सीटों में से प्रत्येक में इसका कोई व्यक्ति होगा।यह पिछले खेल उपस्थिति रिकॉर्ड सेट को तोड़ देता है जब वेस्



हाथी वज़न कम करने की सलाह दे.... तब !!!

मनुष्य एक अजीब प्रकृति एवं चरित्र वाला प्राणी है । उसके खून में विद्यमान रक्त कणों और श्वेत कणों की तरह विरोधाभास उसकी रगों में सतत बहता ही रहता है । उसके द्वारा अधिकतर वहीं किया जाता है, जिसका उसके द्वारा अक्सर विरोध किया जाता रहा है । आपका जीवन में कई बार, ऐसे व्यक्



जीवन "ईश्वर की महिमा "

जीवन "ईश्वर की महिमा "हमें ईश्वर की महिमा को प्रकट करने के लिए पैदा किया गया है, जो हमारे भीतर है| यह हममें से सिर्फ कुछ लोंगो मैं नहीं है ; यह तो हर एक मैं है| हम ही अपने विकल्पों द्वारा स्वयं को निर्धारित करते हैं ( की हम कहाँ है )। सिर्फ इंसानो मैं ही आत्मा -जागरूकता होती है इस बात से फर्क नहीं प



कलियुग की महिमा ( कविता )

हे कलियुग तेरी महिमा बड़ी अपारमानव ह्रदय कर दिया तूने तार-तारअब तो भाई , भाई से लड़ते हैंबाप भी माई से लड़ते हैंबेटी , जमाई से लड़ती हैसब रिश्तों में डाली तूने ऐसी दरारउजड़ गए न जाने कितने घर-परिवारहे कलियुग तेरी महिमा बड़ी अपार | अच्छाई को बुराई के सामने तूनेघुटने टेकने पर मजबूर कियाअपने , सपनों से कित





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