ओला बौछार

ओला बौछार काले घने बादल जब अपनी जवानी मे आते हैं आसमान मे।जमीन मे मोर पपीहा खूब इतराते हैं, नृत्य करते हैं आसमान को निहार कर, कल वह भी बौरा गए ओला वृष्टि को देख कर। कल शहरी लोग पहले खूब इतराए ओलो को देख कर फिर पछते सड़क मे जब निकले ऑफिस से कार पर। किसान खुश था पानी की धार को देखकर वह भी पछताया गेंहू



राजधानी में खरीदा जाता है कूड़े के लिए किराये का बचपन -Street children in Delhi

बच्चों का नाम जहाँ आता है वहां बचपने की एक तस्वीर आँखों के सामने आ जाती है, पर बदलते समय के साथ इस बचपन की तस्वीर धुंधली होती जा रही है। रोज़ाना हम सड़कों पर कूड़ा उठाते बच्चों को देखते हैं और उन्हें देखते ही हमारे ज़हन में बाल मजदूरी का ख़्याल आता है, पर मांजरा यहां कुछ औ



!!! विचारणीय प्रश्न और मजदूर दिवस !!!

...चर्चास्पद यौन उत्पीडनऔर बलात्कार मामले की पैरवी के लिए आसाराम के पक्ष में देश के 14 बड़े वकीलों कापैनल खड़ा था और उस बच्ची के पक्ष में सिर्फ़ एक सरकारी वक़ील और एक सरकारी जाँचअधिकारी । ....लेकिन एक सरकारी वक़ील नेसरकारी जाँच अधिकारी



मजदूर

मै हुक्म पर हुक्म दिए जा रहा थावह श्रम पर श्रम किये जा रहा थाबिना थके बिना रुकेतन्मयता से तल्लीनअदभुत प्रवीनपसीने में डूबासामने रखेजल से भरे घड़े की ओर देखता हैफिर उंगलिया सेमाथे को पोछता हैमाथे से टूटतीपसीने की बूंदेधरा पर गिरती,बनाती,सूक्ष्म जलाशय क्षण भर कोफिर उतर जातीधरा की सतहसे धरा के हृदय मेंव



मजदूर

मजदूर, ऐसा शब्द,जिससे प्रायः हम सभी परीचित होंगे,वही गंदे पुराने कपडे, पसीने से सने हुए,चहरे पर गहरी लकीरे,और मन में हीनता की भावना|आज मजदूर दिवस,हम धूम धाम से मनाएंगे|उसे छुट्टी देकर,अच्छा सा केक खीलायेंगे|आज कोई काम नहीं करने देंगे,न



हम मजबूरों की एक और मजबूरी -बाल मजदूरी

बचपन आज देखो किस कदर है खो रहा खुद को , उठे न बोझ खुद का भी उठाये रोड़ी ,सीमेंट को .” ........................................................................ ”लोहा ,प्लास्टिक ,रद्दी आकर बेच लो हमको , हमारे देश के सपने कबाड़ी कहते हैं खुद को .” .........................................................



बाल श्रम पर कानून

क्या बच्चों को काम पर रखना क़ानूनी है? नहीं, १४ साल से कम उम्र के बच्चों को काम देना गैर-क़ानूनी है; हालाँकि इस नियम के कुछ अपवाद हैं जैसे की पारिवारिक व्यवसायों में बच्चे स्कूल से वापस आकर या गर्मी की छुट्टियों में काम कर सकते हैं l इसी तरह फिल्मों में बाल कलाकारों को का



!!! श्रमेव जयते !!!

अंतराष्ट्रीय मजदूर-दिवस (०१मई) के शुभ अवसर पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभ-कामनाएँ एवं बधाइयाँ ....



मज़बूरी के हाथ

यों रविवार छुट्टी और आराम का दिन होता है, लेकिन अगर पूछा जाय तो मेरे लिए यह सबसे ज्यादा थकाऊ और पकाऊ दिन होता है। दिन भर बंधुवा मजदूर की तरह चुपचाप हफ्ते भर के घर भर के इकट्टा हुए लत्ते-कपडे, बच्चों के खाने-पीने की फरमाईश पूरी करते-करते कब दिन ढल गया पता नहीं चलता। अभी रविवार के दिन भी जब द



मजदूर दिवस

#मजदूर_दिवस_विशेष --------------------------- मैं मजदूर हूँ ,हाँ मैं मजदूर हूँ मजदूर हूँ लेकिन मजबूर नहीं यह कहने में मुझे कोई शर्म नहीं अपने पसीने की खाता हूँ कम पैसों में भी घर चलाता हूँ अमीरों के बंगले महल बनाता हूँ खुद एक छत के नीचे रहता हूँ सुकून की जिंदगी बिताता हूँ मैं मिट्टी को सोना बनाता हू





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