दुश्मन

बिछड़ना ही है तो झगड़ा क्यूँ करें हम ये काफ़ी है कि हम दुश्मन नहीं हैं.......



तुम्हारी याद

कवितातुम्हारी याद तुम यादों से विस्मृत हो जाओ सम्भव नहीं है ये ,तुम पटल से उतर जाओ स्वीकृत नहीं है ये । न करो याद तुमफ़र्क पड़ता है क्या ?न करो विश्वास तुमसमय रुकता है क्या ?श्वास तो चलते हैंहृदय भी धड़कता है दोनों ही के स्पंदन मेंध्वनि हो या प्रतिध्वनि तुमसे ही होकर आती



बिहार चुनाव फैसला किसके पक्ष में।

बिहार चुनाव फैसला किसके पक्ष में।बिहारदेश का पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है जहाँ कोरोना महामारी के बीच चुनाव होने जारहे हैं और भारत शायद विश्व का ऐसा पहला देश। आम आदमी कोरोना से लड़ेगा औरराजनैतिक दल चुनाव। खास बात यह है कि चुनाव के दौरान सभी राजनैतिक दल एक दूसरेके खिलाफ लड़ेंगे लेकिन चुनाव के बाद अपनी



विशेषताएं मेरे मन की

सागर सा गम्भीर,नदियों सा चंचल मन है मेरा;बड़े वृक्ष की तरह देता सुकून,छोटे पौधे की तरह ये कोमल मन है मेरा।घर से बाहर निकलने को आतुर ,जल्दी ही घर लौटने को उत्सुक ये बच्चा मन है मेरा ;पर्वत की तरह अडिग,पानी की बूंद की तरह सूक्ष्म ये मन है मेरा।हरी भरी फसल की तरह लहलहाता



प्रधानमंत्री जन कल्याणकारी योजना स्वच्छ भारत मिशन के तहत महात्मा गाँधी व पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी के जन्मदिन के शुभ अवसर पर

अबतक हिंदी न्यूज़ /रामनगर/प्रयागराज /प्रधानमंत्री जन कल्याणकारी योजना स्वच्छ भारत मिशन के तहत महात्मा गाँधी व पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी के जन्मदिन के शुभ अवसर पर रामनगर सिरसा मेजा प्रयागराज के माँ शीतला धाम के प्रांगड़ में स्वच्छता अभियान चलाया गया जिसमे भारी संख्या में लोगों ने



मृत्यु लोक के प्राणी वर्ष में एक बार धरती पर आते हैं

मृत्यु लोक के प्राणी वर्ष में एक बार धरती पर आते हैं डॉ शोभा भारद्वाज जहाँ भी बौद्ध धर्म ( इनमें सनातन धर्म की परम्पराएं भी मिश्रित हैं )का प्रभाव है वहाँ पितरों को बहुत सम्मान दिया जाता है। भारत की धरती से बौद्ध धर्म मंगोलिया तक पहुँचा था |मंगोल इतिहास में लिखा है कि छठी शताब्दी में भारत से द



अपने पूर्वजों ,मृत्युलोक के प्राणियों की याद में मनाये जाने वाले पर्व

अपने पूर्वज ,मृत्यु लोक के प्राणियों की याद में मनाये जाने वाले पर्व डॉ शोभा भारद्वाज विश्व की लगभग सभी संस्कृतियों में जन्म मृत्यु आत्मा भूत प्रेत पूर्वजों आदि की मान्यता है। पश्चिमी देशों में ‘एक दिन’ का हैलोवीन एवं आल सेंट्स डे पर्व मनाया जाता है। एशिया में वर्ष का सातवाँ महीना, घोस्ट धरती पर



कोई रोता है।

क्यों मुझको ऐसा लगता है?, दूर कहीं कोई रोता है।कौन है वो? ,मैं नही जानता, पर मुझको ऐसा लगता है,दूर कोई अपना रोता है। क्योंमुझको ऐसा लगता है?दूर कहीं कोई रोता है। 2पर्वत की हरी-भरी वादियाँ



सीखा दो सबक इन गद्दारों को

मैं अबला नहीं, सबला बनना चाहती हूं; मैं आज बॉलीवुड में पनप रहे ,अपराधों का भंडाफोड़ करना चाहती हूं।बॉलीवुड पर कुछ गुंडों का, एकाधिकार मिटाना चाहती हूं।बॉलीवुड हमारी संस्कृति और राष्ट्रप्रेम ,युवा वर्ग की प्रगति का दुश्मन जो ठहरा;उसे सुधारने



सोच बदलो।

सोच बदलो।रोज़ रोज के शिसकने से अच्छा, एक दिन जी भर कर रो ले।सरकार की नीयत में खोट से, बेरोजगारी को निःसंकोच झेल ले।धरना प्रदर्शन को कोरोना वायरस ने, मूली की तरह निगल लिया।लोकडाउन भी अब, अनलॉक डाऊन में सरकार ने बदल दिया।एडमिशन पेपरों को लेकर, सरकार अड़ गई, विद्यार्थियों ने पहचान लिया।नई शिक्षा नीति के



जीने की चाहत

जीने की चाहत<!--/data/user/0/com.samsung.android.app.notes/files/clipdata/clipdata_200815_041714_693.sdoc-->लॉकडाऊन लगा कर, जान बचा लिया तुमने।जीते जी बाहर निकाल प्रवासियों को, मार दिया तुमने।घर कैद कर लोगो की, जीने की चाहत बढ़ा दिया तुमने।अपने परायों के प्यार की, औकाद दिखा दिया तुमने।शहर में प्रवासि



हवा पुरवाई

ना जाने किन ख्यालों में गुम रहते हों, अब आनलाइन कम, आफलाइन तुम रहते हो। गुनगुनाने वाली आवाज अब कानों से दूर रहतीं हैं। मुस्कुराते होंठ अब ओझल रहते हैं। बस यही सोच कर आंखें नम रहतीं हैं। ना जाने किन ख्यालों में गुम रहते हों। सामने बनें छज्जे पर कबूतर चंद रहते हैं। गौरेयों का भी होता है आना जाना, छत प



#आत्मनिर्भर_ब्राह्मण vs #आत्मनिर्भर_भारत।।

#आत्मनिर्भर_भारत vs #आत्मनिर्भर_ब्राह्मण।।#ब्राह्मण समाज के समक्ष उपस्थित भगवान श्रीराम की कृपा से राजनीति पर नियंत्रण करने का अवसर।5 अगस्त 2020 अयोध्या जी मे #राममंदिर_निर्माण कार्यारंभप्रतिक्रिया परिणाम भविष्य की चुनौतियां व अवसर आत्मनिर्भरता व हिंदुओ के शक्तिशाली होने का ।ब्राह्मण समाज संगठनों के



वीणावादक

काफी सालों पुरानी बातहै उत्कर्ष नगर में एक 20 वर्षीय वीणावादक के काफी चर्चे थे। वैसे तो वो एक मिट्टीसे बने छोटे घर में रहता था बहुत ज्यादा आय नहीं थी उसकी, लेकिन काफी प्रतिभाशालीथा, इसी वजह इसे कई धनाड्य घरों से वीणावादन के आमंत्रण मिला करते थे तो उसकागुजारा चल जाया करता



यह कैसा नियम है ? ( ईद मुबारक के अवसर पर संसमरण )

यह कैसा नियम है ?(ईद मुबारक के अवसर पर संसमरण)डॉ शोभा भारद्वाज विदेश में रहने वाले भारतीयों एवं पाकिस्तानियों के बीच अच्छे सम्बन्ध बन जाते है कारण भाषा एक से सुख दुःख | ईरान के प्रांत खुर्दिस्तान की राजधानी सनंदाज में पठान डाक्टर हुनरगुल उनकी पत्नी सूफिया के साथ



साथ हों

सुनो! तुम सच बोल दिया करो.. हम मानते हैं कि सच सुनकर खफा होंगे, रूठेगे लेकिन विश्वास है ना हम दोनों के बीच। यह विश्वास सब समझा देगा ... तुम्हारे मैं को मेरे तुम को हम बना देगा। मन ही तो है, कभी उड़ता है, कभी डरता है। जैसे सूरज का तेज हर समय, हर दिन हर मौसम में एक जैसा नहीं होता है। जैसे चन्द



आगमन मंत्री जी का

हमारे शहर में हुआ मंत्री जी का आगमन,



उपेक्षा

वक्त की पुरानी अलमीरा से एक याद.. वक्त आने जाने का नाम है लेकिन आप अपने काम से वक्त के हिस्से से कुछ यादें संभाल कर रखते हैं। यही यादें हैं जो आपको बदलाव का आइना दिखाती है। कमरें के कोने से लेकर छत की धूप तक ले जाता था यह काम। खैर काम तो सर्द दर्द है। यही काम ही तो नहीं हो पा रहा था। काम का रोना ही



इंसान लुट

ना वैक्सीन, ना विकेंसी बेरोजगार तो पहले भी कम न थे। एक के पीछे लगने वाली लाइन हर जगह ही है। कोरोनावायरस ने लाइन को कुछ इस तरह खत्म किया कि अब हर चीज आनलाइन हो गई। पैसा, पढ़ाई, कला, कलाकार, काम, ख्वाब, रिश्ते, बात, मुलाकात। जो बेहतर मार्क्स लेकर आ रहे हैं, यह सरकारी तंत्र में कायदे कागज कानून वाली ज



विश्वास की चादर

विश्वास की चादर फैला, उस पे ईमानदारी को बैठा, इतिहास बदल दिया उसने भारत का है।वर्षों से विश्वभर में जो स्थिति हमारी थी,आज पूरे विश्व में वो साख देश ने कमाई है।स्वच्छता का संदेश फैला जनमानस में,गांव गांव गली गली आज साफ सुथरी है।भ्रष्टाचा



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