एक नज़र इधर भी

एक नज़र इधर भी आँख से नींद बनी,पेट से खेत बना,बच्चे से प्यार बना। जीवन साथी से जीना। क्या रखा हैं इस धनदौलत मे?ये तो हैं मानव के मन को गुमराह करने का बहाना।पूज लो माँ-बाप को जीससे बनी ये काया।क्यों फिरता हैं जग मे, बंदा तू मारा-मारा?दिल, दिमाग, मन चंचल, इससे सब कोई हारा।



मानस गीत मंजरी

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अब अपने मन से जीव।

अब अपने मनसे जीव।आटा-लाटा ख़ाके, ताजा माठा पीव।देख पराई कमाई, मत ललचाव जीव।हो घर मे जो, उसको खा-पी के जीव।चाईना ने तिब्बतके बॉर्डर मे मिसाईल तान दी।1965 मे सहस्रसिपाहियो ने अपनी बलिदानी दी ।जो घर मे होघीव, देख उसे शकुनसी जीव।देख राजा-नेताओके झगड़े मे, मत जलाओअपना जीव।छोड़-छाड़ जातीधर्म आरक्षण का वहम खुद



"राधेश्यामी गीत" अब मान और सम्मान बेच, मानव बन रहा निराला है।

छंद - द्विगुणित पदपादाकुलक चौपाई (राधेश्यामी) गीत, शिल्प विधान मात्रा भार - 16 , 16 = 32 आरम्भ में गुरु और अंत में 2 गुरु "राधेश्यामी गीत" अब मान और सम्मान बेच, मानव बन रहा निराला है।हर मुख पर खिलती गाली है, मन मोर हुआ मतवाला है।।किससे कहना किसको कहना, मानो यह गंदा नाला है।सुनने वाली भल जनता है, कह



मैं कट्टर नहीं हूं

मैं कट्टर नहीं हूं स्वयं को भारतीय कहना, मानव कहना कट्टरता नहीं है; अपनी जड़ों से जुड़े रहना; जो समूचे विश्व को एक माने, एक कुटम्ब माने, ऐसी जड़ों से जुड़े रहना कट्टरता नहीं है।



Delhi Langar Seva Society

गुरबाणी कहती है “विच दुनिया सेव कमाईए ता दरगह बैसन पाईए”इन्हीं पंक्तियों पर चलते हुए सरदार हरजीत सिंह जी और उनके साथी पिछले कई वर्षों से दिल्ली के अलग अलग अस्पतालों में फ्री लंगर सेवा का कार्य कर रहे हैं मरीजों को दवा तो इन अस्पतालों से मिल जाती है पर रोटी नहीं कहते हैं भुखे पेट दवा भी काम नहीं करती



स्वीकारें अपनी भूल :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संपूर्ण सृष्टि में यदि मनुष्य सर्वश्रेष्ठ बनकर उभरा है तो मनुष्य को गलतियों का पुतला भी कहा गया है | भूल हो जाना मनुष्य का स्वभाव है | कोई भी ऐसा मनुष्य ना हुआ होगा जिससे कि अपने जीवन में कभी कोई भूल ना हुई है | कभी - कभी मनुष्य की एक भूल उसके जीवन की दिशा और दशा परिवर्तित कर देती है | प्राचीन क



हिन्दुस्तान हमारा है. (भाग-१)

जब पूरी दुनियां मानवाधिकार और वर्ग सघर्ष कर रही थी, तब हिन्दुस्तान अपनी आज़ादी की लड़ाई लड़ रहा था. दुनियां की सबसे पहली मानवाधिकार की लड़ाई शायद फ्रांस में 1789 में लड़ी गई थी. उसके बाद ये आग जल्दी ही पुरे यूरोप में लगने लगी और फिर अमेरिका तक पहुँच गई. उस



उत्सव..... रिश्ते..... मानवता.

पापा के पाँव में चोट लगी थी.. कुछ दिनों से वे वैसे ही लंगडाकर चल रहे थे.. मैं भी छोटा था और तय समय पर, काफी कोशिशों के बाद भी, हमारे घर के *गणेश विसर्जन* के लिए किसी गाड़ी की व्यवस्था भी न हो सकी.. पापा ने अचानक ही पहली मंजिल पर रहने वाले जावेद भाई को आवाज लगा दी.. *



मानवता

मानवता ही नैतिकता का आधार है । सभी नैतिक मूल्य सत्य अहिंसाप्रेम सेवा शांति करुणा इत्यादि गुणों का मूल “मानवता” ही है । ‘मानवता’ हीनैतिकता का आधार है, जैसे कोई निर्धन, असहाय, बीमार व्यक्ति भूखा है; वहां दया सेपूरित होकर कोई सेवा करता है, भूखे को भोजन कराता है; तो



तुरंत आवश्यकता है !!!

(1) एक इलेक्ट्रिशियन : जो ऐसे दो व्यक्तियों के बीचकनेक्शन कर सके, जिनकी आपस में बातचीत बन्द हो ।(2) एक ऑप्टिशियन : जो लोगों की दृष्टि के साथदृष्टिकोण में भी सुधार कर सके ।(3) एक चित्रकार : जो हर व्यक्ति के चेहरे परमुस्कान की रेखा खींच स



दोहे

मानव जीवन है मिला , कर ले प्रभु का ध्यान। धन दौलत कामोह तज, त्याग सकल अभिमान।। इस जीवन का सार है, कर ले प्रभु से प्रीत। परम गति यदि पा सका, तो है सच्ची जीत।। प्राणी आया जगत में, क्या है इसका अर्थ। काम क्रोध मद लोभ में,फँस कर मत



मानव ( मात्रिक छंद ) रे माँ तेरे चरणों में सगरो तीरथ सुरधामा

"मानव " ( मात्रिक छंद ) रे माँ तेरे चरणों में सगरो तीरथ सुरधामा करुणाकारी आँचल में मोहक ममता अभिरामा॥ सुख की सरिता लहराती तेरे नैनों की धारादुख के बादल दूर रहें पानी चाहे हो खारा॥ पीकर उसको जी लेता तेरा लाल निराला है अमृत बूंदे मिल जाती सम्यक स्वाद निवाला है॥ खाकर म



“मानव छंद”

“मानव छंद”रे माँ तेरे चरणों में सगरो तीरथ सुरधामा करुणाकारी आँचल में मोहक ममता अभिरामा॥ सुख की सरिता लहराती तेरे नैनों की धारादुख के बादल दूर रहें पानी चाहे हो खारा॥ पीकर उसको जी लेता तेरा लाल निराला है अमृत बूंदे मिल जाती सम्यक स्वाद निवाला है॥ खाकर मीठी थपकी को म



&quot;मुनाफे के स्वाद में मानव परास्त और खाद्यान जहरीला&quot;

"मुनाफे के स्वाद में मानव परास्त और खाद्यान जहरीला" डूबते उतिराते धान की फसल खेत से खलिहान को तिरछे ताकते हुए, मुँह छुपाते हुए किसान के घर में ऐसे आई मानों खेत और खलिहान का कभी कोई नाता ही नहीं रहा है। अगर कभी कोई नाता था भी तो वह पराली देवी के तलाक के बाद खत्म हो गया ह



विश्व मानवाधिकार दिवस (10 दिसम्बर)

विश्व मानव अधिकार दिवस (10 दिसम्बर) भगवान ने इंसान को इंसान बनाते समय कोई फर्क नहीं रखा लेकिन इंसान ने खुद अपने लिए कई सीमाएं, बाधाएं और वर्ग बना लिए । नतीजन आज विश्व में इंसानियत के बीच एक बहुत बड़ी दरा



मानवता

बिंदु “मानवता” एकधर्मसड़क में यदि कोई टकरा जाए तो हम ऐसे लड़ते हे जैसे किसी ने हमारे पैर पर अपना पैर रख दिया हो, छोटी सी बात को लेके हम इस तरह गुस्सा होते हैं जैसे किसी ने हमारा बहुत अपमान कर दिया हो, हम किसी को बुरी बात कहने में तनिक भी देरी नही लगाते। नमस्कार, इन कुछ बातो से आप बिंदु तक पहुँच ग



बुराई पर सच्चाई की जीत.... विजयादशमी पर्व

रावण का पश्चाताप : हे प्रभु राम, आजके समय में भी स्त्री के अपहरण का दंड आपके भारतवर्ष में दस वर्षों से अधिक काकारावास नहीं है । मुझे अपने अपराध का कितना और कब तक दंड देते रहेंगे... आपकेभारतवासी !!! यह सत्य है कि मेरी बहन शूर्पणखा के अ



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