प्रेग्नेंसी के समय महिला के डिप्रेशन होने के क्या मुख्य कारण हैं

प्रेग्नेंसी के समय महिला के डिप्रेशन होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं : -हार्मोंनल बदलाव प्रेग्नेंसी के समय महिला में मानसिक और शारीरिक दोनों तरह के कई बदलाव होते हैं।महिला के डिप्रेशन में होने पर हार्मोंस सीधे महिला के दिमाग को प्रभावित करते हैं, जो महिला के इमोशन और मूड को नियंत्रित करता है।ये हा



मनोरंजन ( लघुकथा )

लघुकथा मनोरंजन " कुछ भी हो भाई नाटक दमदार है . एक - एक किरदार को बड़ी मेहनत से गढ़ा गया है और हर कलाकार ने पूरे मन से काम किया है ." " ठीक कहा भाई ! हीरोइन भले ही नई है पर एक्टिंग ऐसी की है कि जैसे उसका जन्म इसी किरदार के लिए हुआ हो . कहीं से लगता ही नहीं है कि ये वो जुम्मन - बी नहीं है जो दो



रिलेशनशिप में होने वाली गलतियां

रिश्ते बेहद ही नाज़ुक होते हैं, कई बार छोटी गलती भी बड़ी बनकर रिश्ते को ख़त्म कर देती हैं। इस लेख में पढ़ें रिलेशनशिप में कौन सी ग़लतियाँ करने से बचना चाहिए। जीवन में हर रिश्ते का अपना एक अलग महत्व होता है और जब इसमें आपके जीवनसाथी के साथ आपके रिलेशनशिप की बात आती है तो य



नारायणी

स्वीकृति / अस्वीकृति के बीचकेवलएक 'अ' का नहीं,अपितुअसमान विचार-धाराओं का,सोच का,भावनाओं का गहन अंतर होता है। इन दोनों के बीच,पैंडुलम सा झूलता मनव्यक्तिगत संस्कारोंऔर धारणाओं के आधार पर हीनिजी फ़ैसले करता है। आज,भ्रमित-मानसिकता के कारणभयमिष्रित ऊहापोह में भटकते हुएहमभ्र



आखिर क्यों..???

तुम कभी कुछ नहीं कर सकते,क्या किया है आज तक !तुम्हारे बच्चों के खर्चे भी हम उठाएं...क्या सुख दिए है,अपने बूढ़े मां-बाप को..!छोटे को देखो...सीखो उससेकुछ..?ठाकुर साहब अपने बेटे पर बेतहाशा चिल्ला रहे थे।ये उनकीआदत में शुमार था...जब भी उनका बड़ा बेटा घर में घुसताउनकी चिल्ल-पों चालू हो जाती...जितना बेइज्



आपकी मानसिकता ही आपकी असफलताओं का कारण है

“A man cannot directly choose his circumstances, but he can choose his thoughts, and so indirectly, yet surely, shape his circumstances.”― James Allenअगर आप अपने चारों तरफ देखें तो हर कोई जिंदगी में कुछ न कुछ पाने के लिए कठोर परिश्रम कर रहा है। परन्तु कुछ लोग कामयाब हो जाते है कुछ नहीं। अगर हम कामया



बच्चों के मानसिक विकास में बाधक, कुछ जरूरी बाते, जानिए एक बार

Third party image referenceविशेषज्ञों के अनुसार जो बच्चे घर पर बना हुआ ताजा भोजन करते हैं और पर्याप्त मात्र में पानी पीते हैं, उनकी एकाग्रता बनी रहती है और वे बच्चे अपनी क्लास में अच्छा प्रदर्शन करते हैं। इसके लिए खास बातों पर ध्यान दें, तो आप भी अपने बच्चों की दिमागी क्षमता को बढ़ा सकते हैं। अगर आप



गोपाल खंडेलवाल : वो चल नहीं सकता लेकिन वो देश चला रहा है…

एक शख्स जो खुद दो कदम नहीं चल सकता है लेकिन जिसने देश को हज़ारों कदम आगे बढ़ा दिया है। अपनी शारीरिक विकलांगता से हज़ारों लोगों की मानसिक विकलांगता को कुचलता ये शख्स आज उन लोगों के लिए मिसाल पेश कर रहा है जिन्होनें ज़िंदगी के आगे घुटने टेक दिए हैं ... आइए सुनते हैं उसकी कहानी उसकी ज़ुबानी…मेरा नाम गो



Khaab Foundation: खाब फाउंडेशन की पहल दे रही है सैकड़ो मानसिक रोगियों को जीवन जीने की एक नई दिशा

खाब फाउंडेशन एक ऐसी गैर सरकारी संस्था है जिसका उद्देश्य मानसिक रोगियों की मदद करना और उनको उस रोग से बाहर निकालना है। खाब फाउंडेशन एक ऐसी गैर सरकारी संस्था है जिसका उद्देश्य मानसिक रोगियों की मदद करना और उनको उस रोग से बाहर निकालना है।मानसिक रोग जिसका नाम सुनते ही लो



हमारे त्यौहार और हमारी मानसिकता

रहम करे अपनी प्रकृति और अपने बच्चो पर , आप से बिनम्र निवेदन है ना मनाया ऐसी दिवाली गैस चैंबर बन चुकी दिल्ली को क्या कोई सरकार ,कानून या धर्म बताएगा कि " हमे पटाखे जलाने चाहिए या नहीं?" क्या हमारी बुद्धि और विवेक बिलकु



स्कूलों से शारीरिक दंड को खत्म करने के लिए महाराष्ट्र सरकार शिक्षकों को प्रशिक्षित करेगी

सोमवार को आई खबर के मुताबिक महारष्ट्र सरकार शारीरिक दंड को खत्म करने पर काम कर रही है| इस दिशा में काम करते हुए,राज्य शिक्षा विभाग ने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा विभागों से शिक्षकों,सभी बोर्डों के प्रिंसिपल और स्कूल प्रबंधन के लिए कार्यशालाएं आयोजित करने के लिए कहा है| कार्यशालाओं के लिए, विभाग न



अवसाद (डिप्रेशन) को जानन जरुरी है

हम सभी जानते है कि अवसाद एक मानसिक बीमारी है| अवसाद के रोगी न सिर्फ पश्चिम देशो में अपितु भारत में भी बहुत तेजी के साथ बढ़ रहे है, विश्व स्वास्थ्य स्वास्थ्य संगठन के अनुसार



कलमवार से :: लंगोट का ढीलापन बीवी जानकर छुपा लेती हैं पर अपने अंडरमन की नपुंसकता बाजार में काहे बेच रहे हो!

हाँ, मेरी नज़र ब्रा के स्ट्रैप पर जा के अटक जाती है, जब ब्रा और पैंटी को टंगा हुआ देखता हूँ तो मेरे आँखों में भी नशा सा छा जाता हैं. जो बची-खुची फीलिंग्स रहती हैं उनको मेरे दोस्त बोल- बोल कर के जगा देते हैं. और कौन नहीं देखता है, जब सामने कोई भी चीज आ जाये तो हम देखते हैं.



बॉलीवुड मूवीज और मनोवैज्ञानिक समस्याएं

बॉलीवुड विश्व की सब बड़ी फिल्म इंडस्ट्री है, और ये एक ऐसा स्तर हैं, जो हमारे समाज और उनके लोगों को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है। हर शनि और रविवार को मल्टीप्लेक्स की टिकट विक्रय इसका प्रमाण है। हमारी युवा पीढ़ी बॉलीवुड के सितारों से प्रभावित है, यहाँ तक की बुज़ुर्ग और बच्चे भी। बड़ी संख्या में दर्शकों



सेल्फ़ी क्या है? और युवा इसके पीछे पागल क्यों हैं?

आइये मिलते है नेहा से एक २० वर्षीय युवती है जिसे सेल्फ़ी लेने की आदत सी है वह जहां जाती है वहाँ अपनी 4-5 सेल्फ़ी लेती है, और फिर उन्हें अपने दोस्तों और रिश्तेदारो के बीच दिखाती (शेयर करती) है। दोस्तों नेहा सिर्फ एक उदहारण है कि आज के युवाओं में सेल्फ़ी का कितना क्रेज है,हर सेकंड अकेले फेसबुक पर दस



इमोशनल ब्लैकमेलिंग से कैसे निपटें?

जानू ! क्या तुम नही चाहते, मैं पार्टी में सबसे अलग दिखूं ! मेरी सारी ड्रेसेस ओल्ड फैशन की हो गयीं हैं, तो प्लीज़! मेरे लिए नई ड्रेस ला दो। शीतल ने राहुल से प्यार भरे अंदाज़ में कहा। ऐसा अक्सर होता था, जब भी शीतल को अपनी कोई बात मनवानी होती, तो वह किसी न किसी तरह से अपनी बात मनवा कर ही रहती, राहुल ज



हम काल्पनिक कहानियां क्यों पढ़ते हैं?

हम अपनी सोच और भावनाओं को पंख देने के लिए काल्पनिक कथा और कहानियां पढ़ते हैं। कल्पना की दुनिया अनोखी होती है; उसका वास्तविक घटना और लोगों से मेल होता भी है, और कभी कभी नहीं भी होता। पर काल्पनिक चरित्र और लोग हमें अकसर प्रभावित करते हैं।हम उनके साथ जुड़ते हैं, उनसे मेलजोल करते हैं, और देखते ही देखते



क्या सेक्स के प्रति लोगों का जोश घट रहा है ?

हैरानी की बात है, ऐसे युग में, जहां सेक्स के बारे में हर जगह से हमें पूरी जानकारी मिल रही है, ताकि इस विषय पर कोई भी अज्ञात ना रहे, हमारे रोज़ के जीवन में इस स्वाभाविक प्राकृतिक हरकत का घटाव नज़र आ रहा है।सांख्यिकीय रूप से जांच करने पर पता चलता है, की 16-44 वर्षीय लोगों में, महिलाएं महीने में ४.५ बा



उदास धुनों को सुनना हमें क्यों अच्छा लगता है?

क्या आपने कभी महसूस किया है कि उदास धुनों या संगीत को सुनना आपको अच्छा क्यों लगता है?अरे भई, आप अकेले नहीं हैं! अधिकतर लोग हैं, जिन्हे उदास धुनों को सुनना अच्छा लगता है। लेकिन इन धुनों को सुनकर वे दुखी नही होते इतना तो पक्का है।ऐसा क्यों होता है?जब आप दुखी या उदास होते हैं, तो आपको भूख नही लगती और



भावनाओं को समझने की कला

दूसरों को समझने के लिए उनके जज़्बातों को नाम देना ज़रूरी है।"मैं तंग आ चुकी हूँ... अब और नहीं, मैंने सोच लिए है, की मैं उससे जल्द ही ब्रेक अप कर लूंगी", ऐसी बातें हमको रोज़ सुनने को मिलती हैं। हमारे दोस्त हमसे अपने दिल की बात करते हैं। ऐसी स्थिति में, हम कैसा जवाब देते हैं? ज़्यादा तर समय हम कहते हैं "त



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