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स्यापा (मातम ) क्या अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता है ?

स्यापा ( मातम ) क्या अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रताहै ? डॉ शोभा भारद्वाज किस्सा पंजाब का है,पहले किसी सम्मानित वृद्ध की मृत्यू होती थी अपना वैभव व दुःख दिखाने के लिएरुदालिया बुलाई जाती इनकी बकायदा मंडलियाँ थीं इनके कई किस्से भी हैं.एक वृद्ध सेठ लालाजी के नाम से मशहूर था की मृत्यू हुई भरापूरा परिवार था ल



अभिव्यक्ति मेरी: वो किसने 'राम' समझे, किसने 'खुदा' बनाये।

जो इंसानियत को मारे, घर-घर लहू बहाये। वो किसने 'राम' समझे, किसने 'खुदा' बनाये।। ये आतिश नवा से लोग ही, मातम फ़रोश हैं, चैन-ओ-अमन का ये वतन, फिर से न डगमगाये। घोला ज़हर किसी ने या, गलती निज़ाम की, गुनहगार इस वतन के, यूँ ही न पूजे जायें। उन्हें खून की हर बूंद का, कैसे हिसाब दें, जो आँसुऔ की कीमत, अबत





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