मातृभाषा

मातृभाषा एवम विदेशी भाषा

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आपकी बात, आपकी भाषा में

शब्दनगरी मंच के माध्यम से, आप अपने विचार जन-मानस तक हिंदी में पहुँचा सकते हैं| इस मंच से जुड़कर, आप हिन्दी की विभिन्न विधाओं जैसे- कविता, कहानी, निबन्ध, संस्मरण तथा अन्य विधाओं में अपने लेख प्रकाशित कर सकते है| शब्दनगरी पर हिन्दी-भाषी ब्लॉगर्स अपनी रचनाओ को समकक्ष एवं अपेक्षित रचनाकारों के साथ साझा



हिंदी भाषा

वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख ने विश्व के अनेक देशों को हिंदी समझने के लिए विवश कर दिया है. निःसंदेह इससे हमारी हिंदी भाषा की समृद्धि का अहसास होता है..



मातृभाषा हिन्दी

अब भाषा भारत की हिंदी, ऐसी है अलबेली ।ज्यों घन घुमड़े, करे दामिनी घटा मध्य अठखेली ।।आज परिष्कृत शुभ्र सुन्दरी, हो गई हिन्दी भाषा ।कवि, लेखकों, विद्वानों की मिटती ज्ञान पिपासा ।।विकसित हुई आज ये हिन्दी, सब बाधाएँ झेलीं ।अनुपमेय लगती जैसे, अभिसारिका नई नवेली ।।अब भाषा भारत की हिंदी, ऐसी है अलबेली ।ज्यो



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