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मौन

मौनमौन होकर उस आनंद की अनुभूति करना चाहता हूँलाखों वर्षों से जिसके लिए भटक रहा हूँ।जग मन विलास है....प्रभु हृदय-हुलास है;यह भाव निरंतर आ रहा है,चिर -शांति का द्वार लग रहा है।अनुभूतियाँ जीवन की अनेक हैं..अनेक हैं धरातल भी..मौन का धरातल हृदय-पटल हैसत् चित् आनंद जहाँ हर



शब्द ......!

शब्द .....माेती भी हैं और पत्थर भी ,आरोप- प्रत्यारोप भी, हमेशा घिरे रहते हैं हम इनसे....,सीमाएँ बाँध कर भी ,जाे सीमित नहीं, वे ही ताे हैं शब्द, कभी उदास मन -में सूर्य की प्रथम किरण- सी ताज़गी और उमंग भर देते हैं ,ताे कहीं किसी की चीत्कार काे वहशी बन दबा देते हैं... काेई इन्हें ताेड़ -मरोड़ कर,



क्रिस्टल ड्सूजा और निया शर्मा से नागिन 4 के लिए संपर्क किया गया | आई डब्लयू एम बज

कलर्स का प्रसिद्ध शो नागिन एकता कपूर के बालाजी टेलीफिल्म्स द्वारा प्रोड्यूस अपने चोथे सीजन के साथ आने के लिए तैयार है। प्रोड्यूसर ने हालही में इस सुपरनैचुरल थ्रिलर का टीजर लॉन्च किया है।टीजर में दो नागिन है जिसमें से एक ने काले रंग के कपड़े पहने है और एक ने सुनहरे रंग के



04 सितम्बर 2019

अपना उद्देश्य खोजने के लिए सुनने का अभ्यास।

“जिससे आप वास्तव में प्यार करते हैं, उसके अजीब खिंचाव में खुद को चुपचाप खींच लें। यह आपको भटकाएगा नहीं। ” ~Rumiबहुत बार, हमारा जीवन इतनी व्यस्तता और व्याकुलता से भरा होता है कि हमारे पास वास्तव में यह सुनने के लिए जगह नहीं बचती है कि जीवन हमें क्या करने के लिए बुला रह



पूरक एक दूसरे के

मूक बधिर सत्य, स्थिर खड़ा एक कोने में, बड़े ध्यान से देख रहा है, सामने चल रही सभा को, झूठ, अपराध, भ्रष्टाचार इत्यादि, व्यस्त है अपने कर्मो के बखानो में, सब एक से बढ़ कर एक, आंकड़े दर्शा रहे है, सहसा दृष्टि गयी सामने सत्य की, सिर झुकाये सोफे पर बैठा, आत्मसम्मान, सब कुछ देख



16 जनवरी 2019

निर्भीकता: खालीपन से भागना कैसे रोकें।

हम अपने हर उपलब्ध स्थान को भरने, अधिक कार्यों में व्यस्त रहने, संदेशों का जवाब देने, सोशल मीडिया और ऑनलाइन साइटों की जाँच करने, वीडियो देखने में बिताते हैं।हम अपने जीवन में खाली जगह से डरते हैं।परिणाम अक्सर एक निरंतर व्यस्तता, निरंतर व्याकुलता और परिहार, ध्यान की कमी, हमारे जीवन से संतुष्टि की कमी ह



कविता

तुम शाश्वत में प्रतिपल मेंतुम आज में कल मेंतुम पवन में जल मेंतुम भस्म में अनल मेंतुम रहस्य में हल मेंतुम मौन में कोलाहल मेंतुम कर्कश में कोमल में तुम मलिन में निर्मल मेंतब क्या तुमको पानातब क्या तुमको खोना समीर कुमार शुक्ल





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