मेघा

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मेघा

रात के बाद फिर रात हुई... ना बादल गरजे न बरसात हुई.. बंजर भूमि फिर हताश हुई.. शिकायत करती हुई आसमान को.. संवेग के साथ फिर निराश हुई.. कितनी रात बीत गयी.. पर सुबह ना हुई.. कितनी आस टूट गयी.. पर सुबह ना हुई.. ना जला चूल्हा, ना रोटी बनी.. प्यास भी थक कर चुपचाप हुई.. निराशा के धरातल पर ही थी आशा.. की एक



लोग मेरे आचरण की आलोचना कैसे कर सकते हैं : रेशम

बिग बॉस मराठी के पहले संस्करण में जब से रेशम टिपनिस ने प्रवेश किया था तब से उन्हें सबसे मजबूत दावेदारों में से एक माना जा रहा था। हालाँकि,पिछले हफ्ते उनका शो से बाहर होना कइयों के लिए सदमे जैसा है |बाहर निकलने के बाद हमसे बात करत



27 अगस्त 2015

काले मेघा! काले मेघा ! इतना क्यूँ तरसाए?

काले मेघा! काले मेघा ! इतना क्यूँ तरसाए,बहुत हुई अब देर सही, पर अब क्यूँ न बरसे हाय,गरमी से परेशां जनता सब बोले हाय! हाय!काले मेघ बोले, "तब तू( जनता) क्यूँ न पेड़ लगायें"?जब बारिश की इतनी आस तो क्यूँ प्रदुषण फैलायें ?जहाँ देखो वहां, तू पेड़ ही पेड़ कटवाए!फिर हमसे पूछे, हम क्यूँ न बरसे हाय!इसे बात पर





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