मेरे



इक पुरानी रुकी घड़ी हो क्या ...

यूँ ही मुझको सता रही हो क्या तुम कहीं रूठ कर चली हो क्या उसकी यादें हैं पूछती अक्सर मुझसे मिलकर उदास भी हो क्या ज़िन्दगी मुझसे अजनबी हो क्या वक़्त ने पूछ ही लिया मुझसे बूढ़े बापू की तुम छड़ी हो क्या तुमको महसूस कर रहा हूँ मैं माँ कहीं आस पास ही हो क्या दर्द से पूछने लगी खुशिय



जेबकतरियों से सावधान

जेब कतरियों से सावधान डॉ शोभा भारद्वाज ‘मुफ्त का चन्दन घिस मेरे नन्दन’ चुनावों का दौर है जनता जनार्धन के लिएतरह-तरह के प्रलोभनों की बरसात हो रही है हमारे सत्तारूढ़ सीएम साहब ने पहले से ही दिल्लीकी आधी वोटर महिलाओं के लिए मुफ्त डीटीसी बस सवारी का तोहफा दे दिया बस पर चढ़ते हीकंडकटर टिकट लेने वालों को भू



देश की अर्थव्यवस्था एन.एस.अजनबी

📑💵उस देश की अर्थव्यवस्था 💰 मे कैसे सुधार होगा। जहां का राजा मन की बात 📻 रेडिओ 📟 पर करता हो जबकि वर्तमान समय में लोग रेडिओ का प्रयोग कम कर रहे हैं। एन.एस.अजनबी नोट:- मेरा राजनीतिक पार्टी से संबंध ना जोड़ें |



नीतेश अजनबी

🚗 दहेज लेना कोई गुनाह नही* 💰आज के वर्तमान सत्र में दहेज लेना कोई गुनाह नहीं क्योंकि कन्या पक्ष के हमेशा यह सोचते हैं कि मेरी बेटी को ससुराल में कोई काम न करना पड़े और मेरी बेटी की शादी ऐसे घर में हो जहां पर नौकर नौकरानी कार्यरत हों और मेरी बेटी बैठकर हुकूमत चलाए अब इस क्रिया में लड़की पक्ष के गरीब



स्वप्न मेरे: हमारी नाव को धक्का लगाने हाथ ना आए

लिखे थे दो तभीतो चार दाने हाथ ना आएबहुत डूबेसमुन्दर में खज़ाने हाथ ना आएगिरे थे हम भीजैसे लोग सब गिरते हैं राहों मेंयही है फ़र्क बसहमको उठाने हाथ ना आएरकीबों ने तोसारा मैल दिल से साफ़ कर डाला समझते थे जिन्हेंअपना मिलाने हाथ ना आएसभी बचपन कीगलियों में गुज़र कर देख आया हूँकई कि



जीवन आपा-धापी “एजिटे-शन” है ...

ठँडी मीठी छाँवकभी तीखा “सन” है जीवन आपा-धापी“एजिटे-शन” है इश्क़ हुआ तो बसझींगालाल



रात की काली स्याही ढल गई ...

दिन उगा सूरज की बत्ती जल गईरात की काली स्याही ढल गईदिन उगा सूरज की बत्ती जल गईरात की काली स्याही ढल गईसो रहे थे बेच कर घोड़े, बड़ेऔर छोटे थे उनींद



खो कर ही इस जीवन में कुछ पाना है ...

मूल मन्त्र इस श्रृष्टि का ये जाना हैखो कर ही इस जीवन में कुछपाना हैनव कोंपल उसपल पेड़ों पर आते हैंपात पुरातन जड़से जब झड़ जाते हैं जैविक घटकोंमें हैं ऐसे जीवाणू मिट कर खुद जोदो बन कर मुस्काते हैं दंश नहीं मानो,खोना अवसर समझो यही शाश्वतसत्य



घर मेरा टूटा हुआ सन्दूक है ...

घर मेरा टूटा हुआ सन्दूक हैहर पुरानी चीज़ से अनुबन्ध है पर घड़ी से ख़ास ही सम्बन्ध हैरूई के तकिये, रज़ाई, चादरें खेस है जिसमें के माँ की गन्ध हैताम्बे के बर्तन, कलेंडर, फोटुएँजंग लगी छर्रों की इक बन्दूक हैघर मेरा टूटा ..."शैल्फ" पे चुप सी कतारों में खड़ी अध्-पड़ी



एक सौदागर हूँ सपने बेचता हूँ ...

मैं कई गन्जों को कंघे बेचता हूँएक सौदागर हूँ सपने बेचता हूँकाटता हूँ मूछ पर दाड़ी भी रखता और माथे के तिलक तो साथ रखता नाम अल्ला का भी शंकर का हूँ लेताहै मेरा धंधा तमन्चे बेचता हूँएक सौदागर हूँ ...धर्म का व्यापार मुझसे पल रहा हैदौर अफवाहों का मुझसे चल रहा है यूँ नहीं



पल दो पल फिर आँख कहाँ खुल पाएगी ...

धूल कभी जो आँधी बन के आएगीपल दो पल फिर आँख कहाँ खुल पाएगीअक्षत मन तो स्वप्न नए सन्जोयेगाबीज नई आशा के मन में बोयेगाखींच लिए जायेंगे जब अवसर साधनसपनों की मृत्यु उस पल हो जायेगीपल दो पल फिर ...बादल बूँदा बाँदी कर उड़ जाएँगेचिप चिप कपडे जिस्मों से जुड़ जाएँगेचाट के ठेले जब



दोस्त का प्यार

ओ मेरे दोस्त मत रूठ जाना,ये शरीर बेजान हो जायेगा २ तू जिए हजारो साल मेरी उमर तुझे लग जाये ,पता नही मेरे मरने का तुफान कब आयेगा।



गिद्ध

गिद्ध ये नाम सुनते ही वह पक्षी स्मरण होआता है,जो मृत प्राणियों को अपना आहारबनाता है।पर अब सुना है कि गिद्धों की संख्या कम हो गई है या यूं कहें कि आदमी मेंगिद्ध की प्रवृति ने जन्म ले लिया है,जो जिंदाइंसानों को भी अपना शिकार बना लेती है।शायद यही कारण है कि गिद्ध अब नहीं



घास उगी सूखे आँगन ...

धड़ धड़ धड़ बरसा सावनभीगे, फिसले कितने तनघास उगी सूखे आँगनप्यास बुझी ओ बंजर धरती तृप्त हुईनीरस जीवन से तुलसी भी मुक्त हुई,झींगुर की गूँजे गुंजनघास उगी ...घास उगी वन औ उपवनगीले



आशा का घोड़ा ...

आशा की आहट का घोड़ासरपट दौड़ रहासुखमय जीवन-हार मिलासाँसों में महका स्पंदनमधुमय यौवन भार खिलानयनों में सागर सनेह कासपने जोड़ रहा सरपट दौड़ रहा ...खिली धूप मधुमास नयाखुले गगन में हल्की हल्कीवर्षा का आभास नयामन अकुलाया हरी घास परझटपट पौड़ रहासरपट दौड़ रहा ...सागर लहरों क



"याद आते हैं वो बचपन के दिन "

बचपन के दिन - कल याद आ गया मुझको भी अपना बचपनखुश हुई बहुत पर आँख तनिक सी भर आयी गांवों की पगडण्डी पर दिन भर दौड़ा करती कुछ बच्चों की दीदी थी। दादी की थी राजदुलारी रोज़ सुनती छत पर दादाजी से परियो की कहानी झलते रहते वो पंखा पर थक कर मैंसो जाती घर कच्चे थे चाची लीपा



फैट टू फिट: देखिए राम कपूर का अद्भुत ट्रांसफॉर्मेशन | आई डब्लयू एम बज

राम कपूर की अब तक की अद्भुत यात्रा रही है। अपने अभिनय करियर या निजी जीवन के संदर्भ में, राम कपूर हमेशा से ही भारतीय टेलीविजन के प्रतिभाशाली अभिनेता रहे हैं।बड़े अच्छे लगते हैं और कसम से जैसे धारावाहिकों में मुख्य भूमिकाएं निभाने वाले टीवी अभिनेता ने अतिरिक्त पाउंड घटाने क



भगवान शिव

महादेव को शब्दों में बांधना असंभव है फिर भी मैंने एक प्रयत्न किया है कि मैं जगत के स्वामी देवाधिदेव महादेव को अपनी कविता के माध्यम से आप सबके समझ उनके स्वरूप का वर्णन करने का प्रयत्न करूँ।हर हर महादेव



मेरे खिलाफ

गजल गजल



"हाइकु"मेरे आँगन

"हाइकु"मेरे आँगनगीत गाती सखियाँ तुलसी व्याह।।-१कार्तिक माहभर मांग सिंदूरतुलसी पूजा।।-२तुलसी दलघर-घर मंगलसु- आमंत्रण।।-३तुलसी चौरा रोग विनाशकदीप प्रकाश।।-४तुलसी पत्तासाधक सुखवंतादिव्य औषधि।।-५महातम मिश्र गौतम गोराखपुरी



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