प्रेम की अद्भुत दास्ताँ रानी ने राजा को भेंट किया अपना शीश

इतिहास की बात की जाये तो पूरे देश के इतिहास को यदि तराजू के एक तरफ रख दें और केवल मेवाड़ के ही इतिहास को दूसरी ओर रख दें, तो भी मेवाड़ का पलड़ा हमेशा भारी ही रहेगा | कभी गुलामी स्वीकार न करने वाले शूरवीर महाराणा प्रताप ने इतने संघर्षों के बाद अकबर को मेवाड़ से खदेड़ने पर मजबूर कर दिया था |न जाने मेव



जय हो जय हो राजस्थान

कभी पायल की रूनझुन थीकभी खड्को की खनथन थीकभी जौहर की चीखे थीकभी अबला भी हारी थीकभी मीरा सी त्यागी थीकभी जोधा भी ब्याही थीकभी काटे थे शीशो कोकभी पगड़ी लजाई थीजय हो जय हो राजस्थान .....उमापति महादेव रो ध्यान ....





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