मिला

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जाने और समझे कितना उचित हैं बोलते नाम (प्रचलित नाम) से विवाह हेतु गुण मिलान ??

पंचांग के अनुसार नाम से लड़का-लड़की कुंडली मिलान कितना उचित ??--ज्यादातर भारतीय हिन्दू परिवार ज्योतिषी के पास विवाह के लिए श्रेष्ठ कुंडली मिलान या जन्मपत्रिका मिलान के लिए जाते ही हैं, ताकि विवाहित होने वाला जोड़ा किसी प्रकार के दुर्भाग्य का शिकार न हो, और अपनी जिंदगी हंसी ख़ुशी से काट सके. लोग ये विश्व



"गीतिका" साथ मन का मिला दिल रिझाएँ चलो वक्त का वक्त है पल निभाएँ चलो

मापनी--212 212 212 212, समान्त— बसाएँ (आएँ स्वर) पदांत --- चलो "गीतिका" साथ मन का मिला दिल रिझाएँ चलोवक्त का वक्त है पल निभाएँ चलोक्या पता आप को आदमी कब मिलेलो मिला आन दिन खिलखिलाएँ चलो।।जा रहे आज चौकठ औ घर छोड़ क्योंखोल खिड़की परत गुनगुनाएँ चलो।।शख्स वो मुड़ रहा देखता द्वार कोगाँव छूटा कहाँ पुर बसाएँ



दोहे

मानव जीवन है मिला , कर ले प्रभु का ध्यान। धन दौलत कामोह तज, त्याग सकल अभिमान।। इस जीवन का सार है, कर ले प्रभु से प्रीत। परम गति यदि पा सका, तो है सच्ची जीत।। प्राणी आया जगत में, क्या है इसका अर्थ। काम क्रोध मद लोभ में,फँस कर मत



बता दो राम गए किस और - भरत मिलाप

भारत मिलप से बाटा दो राम गाय किस या गीत: यह शाहरु राव व्यास द्वारा अच्छी तरह से तैयार संगीत के साथ शाहू मोडक द्वारा एक बहुत अच्छा गाया गया गीत है। बाटा दो राम गाय केस के गीत या खूबसूरती से बालम द्वारा लिखे गए हैं। Http://localhost/lyricsoff/images/common/pencil.gifभरत मिलाप (Bharat Milap )बता दो राम



भरत मिलाप (Bharat Milap )

'भारत मिलप' 1 9 42 की हिंदी फिल्म है जिसमें प्रेम आदिब, शाहू मोडक, शोभना समर्थ, दुर्गा खोटे, उमाकांत, विमला रमन और रतन माला प्रमुख भूमिका निभाते हैं। हमारे पास भारत मिलप के एक गीत गीत हैं। शंकर राव व्यास ने अपना संगीत बना लिया है। शाहू मोडक ने इन गीतों को गाया है जबकि बालम ने अपने गीत लिखे हैं।इस फि



शादी में जन्मकुंडली का महत्व

प्राचीन काल सेही भारत मेंविवाह करने सेपूर्व कुंड्ली मिलानकरने का प्रचलनहै। परम्परागत माता-पिता होंया आधुनिक सभीचाहते है किविवाह के पश्चातउनके पुत्र-पुत्रीका वैवाहिक जीवनसुखमय रहें। यहीकारण है किभारत में विवाहप्रक्रिया एक उत्सवऔर समारोह केरुप में मनायाजाता है। यहमान्यता है किजिनका विवाह कुंडलीमिलान क



कहाँ सुखद विश्राम मिला, मन नेह लगा ली है, गीतिका

“गीतिका”खुलकर नाचो गाओ सइयाँ, मिली खुशाली है अपने मन की तान लगाओ, खिली दिवाली है दीपक दीपक प्यार जताना, लौ बुझे न बातीचाहत का परिवार पुराना, खुली पवाली है॥कहीं कहीं बरसात हो रही, सकरे आँगन मेंहँसकर मिलना जुलना जीवन, कहाँ दलाली है॥होना नहीं निराश आस से, सुंदर अपना घर नीम छ



“गीतिका” मिला सका ना नैन नैन से छिद्र छुपा है कन कन में

“गीतिका” कभी कभी जब मन को भाता, खो जाता हूँ बचपन में यदा कदा वह मिलने जब आता, जी लेता हूँ तनमन में उठा पटक वो छल ना जाने, जो करता था मनमानी अभी दिखा पर मिल न सका वो, डूब गया है अनबन में॥ बड़ी बड़ी इन दीवारों में, शायद उसका हिस्सा हो मिला सका ना नैन नैन से, छिद्र छु



मिलावटी होते इन्सान

मिलावटी खाद्यान्न खाते-खाते इन्सान भी दिन-प्रतिदिन मिलावटी होते जा रहे हैं। यह पढ़-सुनकर तो एकबार हम सबको शाक लगना स्वाभाविक है। यदि इस विषय पर गहराई से मनन किया जाए तो हम हैरान रह जाएँगे कि धरातलीय वास्तविकता यही है। हम मिलावटी हो रहे हैं यह कहने के पीछे तात्पर्य है कि हम सभी मुखौटानुमा जिन



क़दम मिलाकर चलना होगा

मित्रो,पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल विहारी बाजपेई अनेकानेक प्रतिभाओं के साथ जितनी अद्वितीय नेतृत्व क्षमता के धनी रहे हैं उतनी ही अनुपम हैं उनकी काव्य रचनाएँ भी । किताबों के पन्ने पलटते जब कभी ऐसी मनहर-मनोग्य रचनाएँ सम्मुख होती हैं तो जी चाहता है कि आपके साथ इन्हें साझा करूँ...बाधाएँ आती हैं आएँघिरें



आशादीप

दूर तक फैली हुई ,दुनिया को रौशन कर दिया ,ज़िन्दगी में ज़िन्दगी का,रंग फिर से भर दिया |थर-थराते थे जो बरसों से ,बहुत बेचैन थे ,प्यार ने आकर के उन अधरों,को चुम्मन कर दिया |फूल-कलियों और गलियों में नए एहसास हों,सोचकर हमने यही ,पतझड़ को सावन कर दिया |अब मनाओ शौक से ,हर रोज दीवाली यहाँ ,योग कर संसार के





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