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छोटी सोच और पैर की मोच

छोटी सोच हो या पैर की मोच, कभी आगे नहीं बढ़ने देती. जहां छोटी सोच के चलते नीयत डोलने में देर नहीं लगती,वहीं पैर की मोच अपाहिज बना देती है. बाकी बची दुनिया, जिसके पीछे पड़ जाए, तो ऐसे पड़ती है कि जैसे खुद दूध की धुली हो. किसी काम की सकारात्मक या नकारात्मक समीक्षा हो सकती है. लेकिन किसी के अस्तित्व को



संत महात्माओं के हाथो संजय अमान की पुस्तक ''प्रेरणा '' का विमोचन समरोह सम्पन्न

संत महात्माओं के हाथो संजय अमान की पुस्तक ''प्रेरणा '' का विमोचन समरोह सम्पन्न मुंबई - पवार पब्लिशर कोलकाता द्वारा प्रकाशित , कवि ,पत्रकार , संजय अमान की लिखी तीसरी पुस्तक ''प्रेरणा '' का विमोचन समारोह बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सभागार में दिनाँक ३० सितम्बर को संपन्न हुआ। यह पुस्तक मुम्बई महानगर के





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