"गज़ल" निकला था सीप से कहीं मोती उठा लिया मैने भी आज दीप से ज्योती उठा लिया

बह्र- 221 2121 1221 212 यूँ जिंदगी की राह में मजबूर हो गए , काफ़िया- मोती, ओती स्वर, रदीफ़- उठा लिया"गज़ल" निकला था सीप से कहीं मोती उठा लियामैने भी आज दीप से ज्योती उठा लियाखोया हुआ था दिल ये किसी की तलाश मेंमहफिल थी द्वंद की तो चुनौती उठा लिया।।जलने लगी थीं बातियाँ लेकर मशाल कोमगरूर शाम जान सझौती उठा



पूर्वी चंपारण केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज

17:7 HRS IST मोतीहारी, 21 अगस्त (भाषा) बिहार के पूर्वी चंपारण जिला मुख्यालय मोतिहारी स्थित महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय (एमजीसीयू) के एक प्रोफेसर के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की गयी है। प्रोफेसर पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को लेकर सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने पर चार दिन पहले ह



“कुंडलिया” नैन तुम मेरे मोती

“कुंडलिया”मोती जैसे अक्षर हैं सुंदर शब्द सुजान भाव मनोहर लिख रही कोरे पन्ने मान कोरे पन्ने मान बिहान न हो प्रिय तुम बिन सपने दिन अरु रात विरह बढ़ता है दिन दिनकह गौतम कविराय आँख असुवन झर रोती यह पाती नहिं वैन नैन तुम मेरे मोती॥ महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी



ग़ज़ल

गम बहुत है कहीं कोई गिनती नहीं ,तंग दामन है ,खुशियों के मोती नहीं |ज़िन्दगी बे-पनाह खूबसूरत मिली ,हाय अफ़सोस कमबख्त ,अपनी नहीं |मुस्कुराता हूँ लेकिन ,अलग बात है ,ये न समझे कोई ,पीर होती नहीं |घेरे रहते हैं हर वक़्त, साये मुझे ,मेरी- मुझसे ,मुलाक़ात होती नहीं |शाम है ना सहर,ना तमन्ना -ए-दिन ,आँख सोती नह





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