मुझे

शहर की जिंदगी, घुटन बन गई हैं।

शहर की जिंदगी, घुटन बन गई हैं।जब शहर था सपना , तब गाँव था अपना।सोचा था शहर से एक दिन कमा लूँगा, के गाँव मे एक दिन कुछ बना लूँगा।शहर की चमक ने मुझे ऐसे मोड़ा, शहर मे ठहर जो गया थोड़ा।अब जिंदगी बन गई हैं, किराए का साया।मोडू जो गाँव का रुख थोड़ा, शहर की चमक बन गई है रोड़ा।कमाया था जो हमने शहर से, वो सब यही



रब्बा मेरे रब्बा (Rabba Mere Rabba )- मुझे कुछ कहना है

मुज कुच खेना है से रब्बा मेरे रब्बा गीत: यह अनुू मलिक द्वारा अच्छी तरह से तैयार संगीत के साथ सोनू निगम द्वारा एक बहुत अच्छा गाया गया गीत है। रब्बा मेरे रब्बा के गीत खूबसूरती से समीर द्वारा लिखे गए हैं।मुझे कुछ कहना है (Mujhe Kucch Kehna Hai )रब्बा मेरे रब्बा (Rabba Mere Rabba ) की लिरिक्स (Lyrics



मुझे कुछ कहना है (Mujhe Kucch Kehna Hai )

"Mujhe Kucch Kehna Hai" is a 2001 hindi film which has Tusshar Kapoor, Kareena Kapoor, Dalip Tahil, Amrish Puri, Rinke Khanna, Vrajesh Hirjee, Hemant Pandey, Alok Nath, Dinesh Hingoo, Himani Shivpuri, Pankaj Berry, Asha Sharma, Yashpal Sharma and Rashmi Sachdeva in lead roles. We have one song lyri



आप मुझे अच्छे लगने लगे - टाइटल सांग

आप मुजे आचे लगने लेज शीर्षक गीत गीत अल्का याज्ञिक और अभिजीत द्वारा गाए गए एक प्यारे गीत हैं, इसका संगीत राजेश रोशन द्वारा रचित है और गीत समीर द्वारा लिखे गए हैं।आप मुझे अच्छे लगने लगे (Aap Mujhe Achche Lagne Lage )मोहब्बत की हसीं शुरुआत हो गयीमोहब्बत की हसीं शुरुआत हो गयीमेरी दुनियामंजिलें हैं नयीरा



हवाओं ने यह कहा - आप मुझे अच्छे लगने लगे

Hawaon Ne Yeh Kaha Lyrics from movie Aap Mujhe Achche Lagne Lage. The song is sung by Udit Narayan, music is scored by Rajesh Roshan while lyrics are written by Dev Kohli.आप मुझे अच्छे लगने लगे (Aap Mujhe Achche Lagne Lage )[नहीं मारना गंवारा प्यार मेंतुमसे यह कहना हैतुम्हें भी ज़िंदा रहना हैमुझे भी



आप मुझे अच्छे लगने लगे (Aap Mujhe Achche Lagne Lage )

"Aap Mujhe Achche Lagne Lage" is a 2002 hindi film which has Hrithik Roshan, Ameesha Patel, Kiran Kumar, Mukesh Tiwari, Nishigandha Wad, Jimmy Moses, Alok Nath, Ali Asgar, Hemant Pandey, Prithvi Zutshi, Shahbaaz Khan, Shaikh Sami, Jasbir Thandi, Suchit Jadhav and Madhuri Sanjeev in lead roles. We h



“गीतिका” पिया गए परदेश में छोड़ मुझे ससुराल

“गीतिका”पिया गए परदेश में छोड़ मुझे ससुराल रब जाने किस हाल में होगे उनके भाल देखन में सुंदर लगें मुस्कायें दिल खोलमानों पिय बहुरूपिया नजर चित्त पयमाल॥ कलंगी अस सँवारते तिरछे नैना वाह फिर आएंगे जब पिया लाल करूँगी गाल॥रोज लिखूँ चित पातियाँ घायल विरहन गीत पायल पग लपटा गए



satya Sayri

Mai ghar we nikala tha manzil ki tarafMai manzil se bhi dur chala aya huMai laut bhi jau waps to kya hasil haiMai sab kuch chhod kar mazbur chala aya huMuje lagat hai khusiyo ki talash me mai zannat se bahut dur chala aya hu.



मै सिस्टम लाचार मुझे लाचार रहने दो……………..

मै सिस्टम लाचार मुझे लाचार रहने दो दुनिया कहे बीमार मुझे बीमार रहने दो !! कठपुतली बनके रहा गया हूँ चन्द हाथो कीहावी शाशन के चाबुक का शिकार रहने दो !! बहुत भटका हूँ दर बदर पहन ईमान का चोला बदले में मिला कटु नजरो का त्रिस्कार रहने दो !! बिक



लाल गुलाब कब्र में सोई अनजान लड़की के नाम

लाल गुलाब कब्र में सोयी अनजान लड़की के नाम डॉ शोभा भारद्वाज “यह प्यार था या खुदगर्जी जिसमें माँ बाबा का प्यार गौण हो गया |हर वैलेंटाइ



मुझे जीवन मानो, मृत्यु मानो या कुछ नहीं

कल रात एक घुप्प अँधेरे घने जंगल में शून्य ने मेरा साक्षात्कार लिया .... - कल क्या था ?कुछ नहीं ... आज क्या है ?कुछ नहीं … कल क्या होगा ?कुछ नहीं … फिर जीवन क्या है ?कुछ भी समझने की एक स्थिति … मृत्यु ?उस स्थिति का केंचुल, जिसे समझने की जद्दोजहद के बाद हम उतार देते हैं … नए सिरे से समझने का खेल खेलने



कभी शून्य की देहरी पर जाओ, तो …मुझे पढ़ना

शून्य में टिकी मेरी आँखें हाथों में एक कलम देखती है और लिखती जाती है - काव्य-महाकाव्य ग्रन्थ-महाग्रंथ कभी शून्य की देहरी पर जाओ तो … पढ़ना उसे हुबहू समझने के लिए कोलाहल में मुझसे बातें करना जब सन्नाटा साँसें अवरुद्ध करने लगे तो लिखे हुए किसी शब्द को रेखांकित करना कई स्वर मुखरित हो उठेंगे !शून्य में म



मैं वही रहना चाहती हूँ जो ईश्वर ने मुझे बनाया

मैं अर्जुन नहीं होना चाहती गुरु द्रोण से एकलव्य को लेकर प्रश्न अर्जुन की प्रतिभा को कम करता है यदि अर्जुन की ईर्ष्या एकलव्य को निरस्त कर गई तो उसके कुशल धनुर्धर होने पर दाग भी बन गईद्रोण ने गुरु के नाम पर पक्षपात कियाअपनी मूर्ति के लिए दक्षिणा की माँग करके एकलव्य का अंगूठा लिया .... मैं द्रोण भी नही



क्यूँ मुझे होड़ में खड़ा करना

कभी कुछ कभी कुछ सवालों का चक्रव्यूह आखिर क्यूँ ? मेरी होड़ तो न ज़िन्दगी से है न मौत से फिर क्यूँ मुझे होड़ में खड़ा करना ! मेरी खुद्दारी किसी मंशा को सफलीभूत होने नहीं देगी !! मत बनाओ झूठ की लम्बी चादर नींद उसे बनाते हुए भी उड़ेगी बन जाने के बाद मेरा और



देकर दुआएँ आज फिर हम पर सितम वो कर गए

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मुझे मेरी सोच ने मारा

नही जख़्मो से हूँ घायल, मुझे मेरी सोच ने मारा ||शिकायत है मुझे दिन सेजो की हर रोज आता हैअंधेरे मे जो था खोयाउसको भी उठाता हैकिसी का चूल्हा जलता होमेरी चमड़ी जलाता है |कोई तप कर भी सोया है,कोई सोकर थका हारा ||नही जख़्मो से हूँ घायल, मुझे मेरी सोच ने मारा ||मै जन्मो का प्यासा हूँनही पर प्यास पानी कीना



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