नैतिक

1


देश में ‘‘लोकतंत्र‘‘ ‘‘खत्म’’ हो गया है! राहुल गांधी! सही!/?

महामहिम राष्ट्रपति को किसानों के मुद्दे पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सांसदों द्वारा अपने नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विरोध मार्च कर ज्ञापन सौंपने की अनुमति देने के बजाए धारा 144 लागू किये जाने पर राहुल गांधी को यह कहना पड़ गया कि देश में ‘‘लोकतंत्र समाप्त‘‘ हो गया है। रात्रि की अंधकार की गहरा



कैसी हो शिक्षा नीति ?

स्वतंत्र भारत में आजादी के बाद कई बार शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव किए गए । लेकिन एक भी बार उसे अमलीजामा नहीं पहनाया गया। इन सभी नीतियों में जोअमूल चुल परिवर्तन हुए वो हमारे देश के विद्वानों ने किए,लेकिन



आज के समाचार पत्र

दैनिक समाचार पत्र हो या सांध्यकालीन पटा पडा रहता है चोरी , डेकैती,हत्या और आत्महत्या के समाचारों से। रही सही कसर बलात्कार, लिव इन में रहने के बाद शादी से इंकार ऐसी खबरें भी मन को विचलित कर देती है।छेड़छाड़ ,प



लोकतंत्र में

लोकतन्त्र में जायज कुछ चीजें ऐसी हैं कि कब उनका रूप नाजायज़ हो जाये कुछ कह नहीं सकते । एक है किसी मांग को लेकर आंदोलन और जुलूस। नहीं कह सकते कि कब ये हिंसक और विध्वंसकारी हो जाये । कुछ नारे कनफ्यूज करते हैं ,और डराते भी हैं । उनमें एक है "हमें चाहिये आज़ादी"। बड़े संघर्ष और बलिदानों के बाद तो देश को आज़



नैतिक मूल्यों पर संगोष्ठी .....

https://duniaabhiabhi.com/clean-administration-is-possible-only-with-moral-values-%e2%80%8b%e2%80%8band-transparency/



भाव देने की जरूरत ही क्या है?

किसी भी बात को तभी भाव मिलता है जब उसे भाव देने वाले देते हैं. भाव नकारात्मक हो या सकारात्मक, दोनों ही स्थितियों में भाव खाने वाला अगर भाव नहीं खाएगा तो क्या करें. ऐसी स्थिति में अच्छा यह है कि भाव दिया ही न जाए. मतलब पूर्ण बहिष्कार. भला जिंदगी भी किसी के रुके से रुकी है क्या. जिंदगी को जहां तक बहना



मानवता

मानवता ही नैतिकता का आधार है । सभी नैतिक मूल्य सत्य अहिंसाप्रेम सेवा शांति करुणा इत्यादि गुणों का मूल “मानवता” ही है । ‘मानवता’ हीनैतिकता का आधार है, जैसे कोई निर्धन, असहाय, बीमार व्यक्ति भूखा है; वहां दया सेपूरित होकर कोई सेवा करता है, भूखे को भोजन कराता है; तो



शिक्षा के आँसू

अपनों से दो शब्द“जब अनैतिक शक्ति संस्था-प्रधान के सिंहासन में पदास्थापित हो जाती है तोव्यवस्थाएँ तो चरमराती ही हैं, नैतिक शक्ति को अवसर भी नहीं मिलता और इसकानंगा-नृत्य स



खूंखार मंजर

बढ़ ही रहा है ---------------------------- यह खूंखार मंजर ----------------------------------- साल गुज़रते रहे ======तरसते रहें हम "अच्छे दिनों " को और " सबका विकास " से !!!!!!!???????? RSS को हिन्दुओं की नहीं बल्कि हिंदुत्व की चिंता सता रही है. यह आडम्बर किस लिए ????!!!!!!



.... कितने ईमानदार.…

ऑफिस में होने वालीधांधली, घूँस एवं दूसरे अनैतिक व्यवहार की स्थिति जानने के लिए नवम्बर 2016 से फरवरी2017 के बीच किए गए । एक शोधकर्ता संस्था- वैश्विक बाजार अनुसंधान एजेंसी (इपसॉस) द्वारा ‘एसिया-पेसेफिक फ़्रौड सर्वे-2017किया गया । इस सर्वे के दौरान विभिन्न बड़ी कम्पनियों में कार्यरत 1,698 कर्मचारियोंके



क्यों मीडिया और लोग मंगलो और उनके मामले के बारे में इस तरह के एक हो-हल्लाह कर रहे हैं?

क्यों मीडिया और लोग मंगलो और उनके मामले के बारे में इस तरह के एक हो-हल्लाह कर रहे हैं? वह असली नायक या सिर्फ एक रील हीरो है? न्यायिक प्रणाली के बारे में तो भूल ही जाओ. यहाँ पर तो अदालत और न्यायाधीश उल्लेख के लायक ही नहीं है .उनके कार्यों और निर्णय



मोदी की सोच महिलाओं के बारे में -

मोदी की सोच महिलाओं के बारे में -- अगर लड़की अचार की बोतल लेकर खड़ी हो जाए ---हालंकि बात दो साल पहले की है --उस समय भी मैंने ब्लॉग लिखा था जो ज्यादातर अंग्रेजी में था- अभी यादगार ताज़ा हुई और याद आया की देश के प्रधानमन्त्



सभी यांत्रिक और अवैध बूचड़खाना बंद होंगे।

सभी पाठको का हार्दिक अभिनंदन,बीते दिनों कुछ राजनैतिक बदलाव हुए। एक मुद्दा बहुत चर्चा ने है "सभी यांत्रिक और अवैध बूचड़खाना बंद होंगे।" सुनने में अच्छा लगता है कुछ नहीं से तो कुछ सही। मेरे मन में एक सवाल है :



यौन नहीं, नैतिक शिक्षा की जरूरत

आज बच्‍चों को यौन शिक्षा की नहीं, नैतिक शिक्षा की जरूरत है. बच्‍चों को नैतिक रूप से मजबूत बनाने की आवश्‍यकता है. यह तो ज्‍यादा पढे लिखे समझदार और जिम्‍मेदार लोगों का एक घटिया मजाक है समाज के साथ कि बच्‍चों को यौन शिक्षा दी जाए. क्‍या ज



अरमानो पर झाड़ू

मैं किसी राजनीति क पार्टी से जुड़ा हुआ नहीं हूँ फिर भी राजनैतिकऔर राजअनैतिक गतिविधियों से प्रभावित तो होता ही हूँ । जब श्री अरविंद केजरीवाल राजनीति में आये और ए ए पी बनायी मुझे लगा देश में वाकई क्रांति आने वाली है । इसका शुरुआती अच्छा असर ये हुआ था कि सारे राजनीतिक दल



किसान रैली ने हिला दी मोदी सरकार

Rahul Gandhi, Sonia Gandhi and Manmohan Singh at the kisan rally पिछले लोकसभा चुनाव [मई २०१४] में बीजेपी के हाथों भारी पराजय की चोट खाई कॉंग्रेस पार्टी १९ अप्रैल २०१५ को दिल्ली में हुई ''किसान -खेतिहर मजदूर रैली '' में पहली बार अपने पुराने रंग मे





1
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x