नशा

" नशा किसी को शराब का हैं, नशा किसी को मज़हब का हैं. कोई बहकता हैं पीके शराब, बहक रहा हैं कोई ले मज़हब का नाम." (आलिम) एक गाना हैं शराब चीज़ ही ऐसी है ना छोड़ी जाए , मैं समझता हूँ कि मज़हब चीज़ ही ऐसी है ना छोड़ी जाए. कोई शराब पीके जी बहला रहा



जीवन का अनमोल "अवॉर्ड "

" नववर्ष मंगलमय हो " " हमारा देश और समज नशामुक्त हो " नशा जो सुरसा बन हमारी युवा पीढ़ी को निगले जा रहा है ,



तेरा नशा (Tera Nasha )- नशा टाइटल सांग

तेरा नाशा गीत नाशा (2013) से है सिद्धार्थ हल्दीपुर और संगीत हल्दीपुर द्वारा रचित है। तेरा नाशा गीत के गीत उत्कृष्ट हैं।नशा (Nasha )तेरा (Tera Nasha ) टाइटल सांगकी लिरिक्स (Lyrics Of Tera Nasha )जिस तरह शाम ढलती है सुबह सुबह.. आहा..धुल गया चाँद जैसे हल्का हल्का.. आहा..बिन कहे आने लगे बातों का मज़



नशा (Nasha )

'नाशा' एक 2013 हिंदी फिल्म है जिसमें मुख्य भूमिका में पूनम पांडे हैं। हमारे पास एक गीत गीत, एक वीडियो गीत और नाशा का एक ट्रेलर है। सिद्धार्थ हल्दीपुर और संगीत हल्दीपुर ने अपना संगीत बना लिया है।इस फिल्म के गाने तेरा नशा - Directed By - Amit SaxenaProduced By - Surender SunejaAditya BhatiaBanner - Ea



विश्व तम्बाकू निषेध दिवस (31मई)

“हर फिक्र को धुएं में उड़ाता चला गया..” आपने यह गाना तो जरूर ही सुना होगा, लेकिन हकीकत यही है कि यूं धुआं उड़ाने से फिक्र नहीं, बल्कि आपकी जिंदगी के बेशकीमती लम्हें ही उड़ते चले जाते हैं । तम्बाकू धूम्रपान से होने वाले नुकसान से शायद



दारु का क़र्ज़



कहाँ है मेक इन इण्डिया

हमारे देश के नेता लोग मेक इन  इण्ड़िया की बात करते है लेकिन ये बहुत दूर-दूर तक दिख हीनहीं रही है   रहीहै चाइना की भरमार है यहाँ तक देश के नेता भी चाइना का प्रयोग करते हैं कुछ दिन पहले योग दिवस पर मैटी भी चाइना की थी हर ओर चाइना ही चाइना क्यों नहो सस्ता जो है फिर बात किस चीज की कर रहे हो मेड़ इन इण्ड



गन्दगी ही गन्दगी

हमारे देश 



नशा से नाश हो रही जवानी

    हमारे देश में नशा का प्रभाव बढ़ रहा है   ज्यादा खतरा युवाओं को है उनकी जवानी नाश हो रही उन्हे नशा हर एक चीज से बड़ा लगता है यहाँ तक नशा के लिए कुछ भी कर सकते हैं अपनी पत्नी को भी बेंच सकते हैं जिस समय में उन्हें टाईट रहना चाहिए लेकिन नशा ने उनके इस प्रवृत्ति को नाश करके उन्हें आलसी बना दिया |न व



तम्बाकू नहीं हमारे पास भैया कैसे कटेगी रात

कभी गांव में जब रामलीला होती और उसमें राम वनवास प्रसंग के दौरान केवट और उसके साथी रात में नदी के किनारे ठंड से ठिठुरते हुए आपस में हुक्का गुड़गुड़ाकर बारी-बारी से एक-एक करके-“ तम्बाकू नहीं हमारे पास भैया कैसे कटेगी रात, भैया कैसे कटेगी रात, भैया............ तम्बाकू ऐसी मोहिनी जिसके लम्बे-चौड़े पात, भैय





1
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x