किसान आन्दोलन बनाम महत्वकांक्षा

किसान आन्दोलन बनाम महत्वकांक्षा डॉ शोभा भारद्वाज देश को आजादी मिली लेकिन आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी राशन में लाल या सफेद गेहूं ( चोकर जैसा ) वह भी लंबी कतारों में लग कर मिलता था यह गेहूं अमेरिका और कनाडा से आता .1962 एवं 1965 में भारत को दो युद्ध पहला चीन के साथ दूस



शर्मनाक राजनीति

बेहद अफसोस है कांग्रेस राजनैतिक अनैतिकता में और आगे निकल गयी। टीवी पर दृश्य देखकर दंग रह गया। कांग्रेस पार्टी के कुछ कार्यकर्ता महान क्रिकेटर भारत रत्न श्री सचिन तेंदुलकर का कटआउट लेकर उनके खिलाफ नारे लगाते चल रहे थे । वे यहीं तक सीमित नहीं रहे उन्होने उनके कट आउट पर काली स्याही भी डाली । वजह उनका र



सत्ता माँ की गोद नहीं है

सत्ता माँ की गोद नहीं है डॉ शोभा भारद्वाज 26 / 11 तीन दिनों तक चला आतंकी हमला इसका मास्टर माईंड हाफिज सईद था ,हमले में देश विदेश के अनेक लोग ,पुलिस कर्मी शहीद हुए उन शहीदों को ‘नमन’ 300 घायल थे . अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपनी पुस्तक में 26 /11 के आतंकी हमले का जिक्र करते हुए लिखा ह



त्रासदी पर्यटन और अफ़सोस का मेला

यह अवांछित और दुर्भाग्य पूर्ण सच है कि समाज में सब तरह के अपराध अब भी घटित होते हैं किन्तु सभी सुर्ख़ियों में नहीं आते। हत्या और बलात्कार जघन्य अपराध हैं। एक तो ये अपराध निंदनीय हैं और शर्मसार करने वाले है। उस पर मीडिया ,सरकारों और विभिन्न पार्टियों के नेताओं की प्रत



भारत की विदेश नीति में गांधी वाद की समाप्ति

भारत की विदेश नीति में गांधी वाद की समाप्ति डॉ शोभा भारद्वाज भारत सरकारपाकिस्तान को विभाजन समझौते के अनुसार 55 करोड़ रु० अभी नहींदेना चाहती थी क्योंकि सरदार पटेल जैसे नेताओं को भय था पाकिस्तान इस धन का उपयोगभारत के खिलाफ जंग छेड़ने में करेगा. गांधी जी ने आमरण अनशन आरम्भ कर दिया पाकिस्तान की हरकत पर



कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के लिए चुनाव हो के पक्ष में उठती आवाज

कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के लिए चुनाव के पक्ष में उठती आवाज डॉ शोभा भारद्वाज आजादी के बाद पहली सरकार कांग्रेस की बनीं, वर्षों तक राज किया दल में एक से एक विद्वान राजनेता विचारक रहे हैं जिनके ऑटोग्राफ लेना उन्हें संभाल कर रखना छात्रों का शौक था .आज भी कांग्रेस म



भारतीय राजनीति में ‘सवालों’ के ‘जवाब’ के ‘उत्तर’ में क्या सिर्फ ‘सवाल’ ही रह गए हैं?

भारतीय राजनीति का एक स्वर्णिम युग रहा है। जब राजनीति के धूमकेतु डॉ राम मनोहर लोहिया, अटल बिहारी बाजपेई, बलराम मधोक, के. कामराज, भाई अशोक मेहता, आचार्य कृपलानी, जॉर्ज फर्नांडिस, हरकिशन सिंह सुरजीत, ई. नमबुरूदीपाद, मोरारजी भाई देसाई, ज्योति बसु, चंद्रशेखर, तारकेश्वरी सिन्हा जैसे अनेक हस्तियां रही है।



भारत-चीन संघर्ष के निहितार्थ

विषय-भारत-चीन संघर्ष के निहितार्थचीन और भारत के बीच सप्ताह भर का तनाव इस सप्ताह घातक हो गया। यहाँ हम एक दूरस्थ हिमालयी क्षेत्र में होने वाली झड़पों के बारे में जानते हैं जो पड़ोसियों के बीच संबंधों को काफी खराब कर सकती हैं। और चीन के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। दोनों देश-जो दुनिया की सबसे लंबी अचिह



गांधार राज शकुनी की नीति

गांधार राज शकुनी की नीतिडॉ शोभा भारद्वाजयह उन दिनों की कहानी है जब राजधर्म में राजनीति को मान्यता दी गयी थी लेकिन कूटनीति का स्थान नहीं था शकुनी पहला कुटिल कूटनीतिकार था छलनीति उसका हथियार था माना हुआ षड्यंत्र कारी था |समय का प्रचलित खेल चौसर राजा महाराजों के प्रिय खे



‘‘आंकड़ों’’ के ‘‘खेल’’ की ‘‘बाजीगरी’’ द्वारा ‘‘कोरोना’’ पर ‘‘राजनीति’’क्यों?

कोरोना वायरस को भारत में आए 4 महीने पूर्ण हो चुके हैं। हमारे देश में प्रथम मरीज 30 जनवरी को केरल के ‘‘त्रिशूर’’ में आया था। ‘‘कोरोना’’ (कोविड़-19) राष्ट्रीय महामारी और आपदा के रूप में, हमारे देश के लिये एक अत्यंत चिंता का विषय था। इसलिए सत्ता और विपक्ष के साथ देश की संपूर्ण जनता 30 जनवरी को एक साथ खड़



महामारी के बाद के विश्व में भारतीय विदेश नीति

कोरोना वायरस के प्रकोप से विश्व व्यवस्था व्यापक परिवर्तन के दौर से गुज़र रही है। इन परिवर्तनों की व्यापकता सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक क्षेत्रों के साथ ही मानव के



क्या जिंदगी जीने के मायने बदल जाएंगे

आज ऐसा समय आ गया है की भविष्य खतरे में नज़र आ रहा है | मनुष्य जाति सामाजिक प्राणी है जिसे समूहों में रहने की आदत है आदिकाल से चली आ रही है | पहले आदम जात जंगलो में कबिलो के रूप में समूह में रहता था की वो मिलकर दूसरे कबीलो से सुरक्षा कर सके जंगली जानवरो से अपनी रक्षा कर



क्यों है लॉकडाउन की मजबूरी

समाज की उत्पति से लेकर आजतक विश्व एक हीथ्यूरी पर चल रहा है कि समाज में वर्चस्व किस का होगा। जंगलराज को नकेल डालकर कुछव्यवस्थाएं स्थापित हो गईं लेकिन जिनके साथ अन्याय होता था उन्होंने प्रतिरोध जारीरखा। वर्तमान युग में विश्व की ओर से फेस की जा रही समस्याओं का मुख्य कारण पश्चिमजगत और उनका अंधानुकर



है,जहाँ जीना कठिन, मरना जहाँ आसान है! क्या .... यही हिंदोस्तान है ?

है,जहाँ जीना कठिन, मरना जहाँ आसान है! क्या .... यही हिंदोस्तान है ? पकड़ो, पकड़ो , .... मारो ,मारो , की आवाज़ों से वहकांप रहा था । एकाएक आवाज़ें नजदीक आने लगी । उसे कुछ समझ नहीं आ रहाथा। वह जड़ खड़ा था, तभीकिसी ने झपट कर उसे खींच लिया और छिपा लिया अपने आँचल में.....थोड़ी दूर का मंजर देखकर वह छटपटाने ल



आज़ादी के नारे और मुद्दों की बिरयानी।

एक स्वतत्र संप्रभुता सपन्न राष्ट्र में जब लोगनारे लगाते हैं, “हमें चाहिये आज़ादी।” तो बड़ी विडम्बना सी लगती है। साथ ही कुछ आशंकाएजन्म लेती है। आजकल नागरिकता संशोधन बिल का कुछ लोग विरोध कररहे हैं। विरोध किसी भी मुद्दे पर हो कुछ लोगों का प्रिय नारा आज़ादी का नारा है। यहनारा एक विद्रोह के नारे जैसा लगता ह



वो नक़ाबपोश कौन थे?

इंडिया बहुत बड़ा देश है। इसमें साल के बारह महीने कोई न कोई चुनाव चलता रहता है। और कोई भी सरकार रहे कहीं न कहीं किसी मुद्दे पे या मुद्दा खड़ा करके या बेमतलब धरना ,प्रदर्शन ,हड़ताल चलते रहते हैं। लोग जब हड़ताल होती है तो कभी कभी आर्थिक नुक्सान का आंकलन करते हैं। मुझे जिज्ञासा है किसी ने अध्ययन किया हो



आज़ादी के नारे ,अब

आजकल होने वाले कुछ आंदोलनों में ,ख़ास कर कुछ युवा आन्दोलनों में एक नारा बड़ी उलझन में डाल देता है और डराता भी है। वह है "आज़ादी, हमें चाहिये आज़ादी।" इसके साथ एक से अधिक उलझे सवाल पैदा किये जाते है। आंदोलन फासिस्ट और सांप्रदायिक लोगों ,पार्टियों या सरकारों के खिलाफ बताया जाता है और नारे में आगे जोड़ दिया



ए टू ज़ेड राजनीति

सी ए ए ,एन सी आर , एन पी ए , डिटेन्शन सेंटर की ए बी सी डी ने देश में कोहराम मचा रखा है । साथ ही शायद मच रहे उत्पात के पीछे मुद्दों की ए बी सी डी न समझना भी है । उपरोक्त मुद्दों पर जिसकी जो राय हो उसका सम्मान करते हुए मैं सिर्फ दृष्टिगत



आतंकवाद के साये में कमजोर होता दक्षेस

आतंकवाद के साये में कमजोर होता दक्षेस________________________________बांग्लादेश के तात्कालिक राष्ट्रपति जियाउर रहमान द्वारा 1970 के दशक में एक व्यापार गुट सृजन हेतु किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप दिसम्बर 1985 में दक्षिण एशियाई देशों के उद्धार के लिए दक्षेस जैसे संगठन को विश्व पटल पर लाया गया। यह सं



नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध कोरी रजनीति

नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध कोरी राजनीतिडॉ शोभा भारद्वाज‘अनेक बुद्धिजीवी जिनमें मुस्लिम भी शामिल हैं ’नें मुस्लिन समाज को समझाने की कोशिश की है नागरिकता संशोधन विधेयक का किसी भी भारतीय की नागरिकता से कोई सम्बन्ध नहीं है फिर भी विरोध प्रदर्शन के बहाने तोड़फोड़ हिंसा क्यों ?मुस्लिम समाज कई राजनीतिक



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