न्यायपालिका

1


स्वाति बरूआ : असम की पहली और देश की तीसरी जज जिन्होंने LGBT समुदाय को……

न्यायपालिका प्रजातंत्र के चार स्तम्भों में से एक है। न्यायपालिका ही वो जगह है जहाँ हर किसी को इंसाफ मिलता है और अपने हक़ मिलते है। आज उसी न्यायपालिका में अपने हक़ की लड़ाई हमेशा लड़ती आ रहीं ट्रांसजेंडर स्वाति बरूआ न्याय की कुर्सी पर बैठ के न्याय करेंगी।बता दें कि 26 वर्षीय स्वाति अब असम की पहली और देश



“न्यायपालिका में भ्रष्टाचार या अवहेलना न्यायालय की”? - उत्कर्ष श्रीवास्तव

न्याय का अर्थ है नीति-संगत बात अर्थात उचित अनुचित का विवेक | वात्स्यायन ने न्याय सूत्र में लिखा है- “प्रमाणैर्थपरीक्षणं न्यायः“ अर्थात प्रमाणों द्वारा अर्थ का परिक्षण ही न्याय है | भारतीय संविधान ने प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार प्रदान किय





1
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x