पाते

Dhaniya Khane ke Fayde – हरा धनिया के फायदे

Hara Dhaniya ke waise to achuk fayde hai jise sabjiyon mein upyog kiya jata hai. हरा धनिया लगभग हर घरों में उपयोग में लाया जाता है और यह भोजन में स्वाद बढ़ाने के कारण इसे पूरी दुनिया में जाना जाता है | इसके अलवा धनिया अपने कई गुणों और फायदे के बारे से जाना जाता है |



बिगड़े नेताओं के ‘‘बिगडे़ बोल’’-‘‘विवादित बोल’’! फायदा-नुकसान कितना!

भारतीय राजनीति में हमेशा से ही ‘‘बयानवीर’’ मीडिया में सुर्खिया पाते रहे है। विभिन्न राजनैतिक पार्टियों के कुछ नेतागण अपने बेवाक बयानों के माध्यम से सुर्खियाँ बटोरनें के उदे्श्य से ऐसे बयान देते रहते है, जिसके परिणाम स्वरूप उनकी छाप एक चर्चित चेहरे की होकर वे माने जाने



"गज़ल" हँसा कर रुलाते बड़ी सादगी से खिलौना छुपाते बड़ी सादगी से

वज़्न---122 122 122 122✍️अर्कान-- फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन✍️ क़ाफ़िया— आते स्वर की बंदिश) ✍️रदीफ़ --- बड़ी सादगी से "गज़ल"हँसा कर रुलाते बड़ी सादगी सेखिलौना छुपाते बड़ी सादगी सेहवा में निशाना लगाते हो तुम क्यों पखेरू उड़ाते बड़ी सादगी से।।परिंदों के घर चहचहाती खुशी हैगुलिस्ताँ खिलाते बड़ी सादगी से।।शिकारी कहू



"गज़ल" छोड़कर जा रहे दिल लुभाते रहे झूठ के सामने सच छुपाते रहे

वज़्न--212 212 212 212 अर्कान-- फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन, बह्रे- मुतदारिक मुसम्मन सालिम, क़ाफ़िया— लुभाते (आते की बंदिश) रदीफ़ --- रहे"गज़ल"छोड़कर जा रहे दिल लुभाते रहेझूठ के सामने सच छुपाते रहे जान लेते हक़ीकत अगर वक्त कीसच कहुँ रूठ जाते ऋतु रिझाते रहे।।ये सहज तो न था खेलना आग सेप्यास को आब जी भर प



अक्सर समझ नहीं पाते हैं लोग

अक्सर समझ नहीं पाते हैं लोग मन से मन की बातों को,शब्दों के जज्बातों को, सोचती जागती रातों को, अक्सर समझ नहीं पाते हैं लोग.......संबंधों की गहराई को, समय की दुहाई को, अपनों की अच्छाई को,अक्सर समझ नहीं पाते हैं लोग....... नेह से



गजल, बे-वजह की यह जलन तपते तपाते क्यों

बह्र - २१२२ २१२२ २१२२ २,कफिया- आते, रदीफ-क्यों...."गजल"चाह गर मन की न होती तो बताते क्योंआह गर निकली न होती तो सुनाते क्योंआप भी तकने लगे अनजान बीमारीबे-वजह की यह जलन तपते तपाते क्यों।।खुद अभी हम तक न पाए भाप का उठनाकब जला देगी हवा किससे छुपाते क्यों।।शोर इतना तेज था विधन



काश वो भी जान पाते जो निभा सकते नहीं "ग़ज़ल"

"ग़ज़ल" आप मेहरबान को मैं भुला सकता नही दर्द है मेरे बदन का जो दिखा सकता नही घाव भीतर से लगा है दाग मरहम दूर है ढूढता हूँ नैन लेकर पर रुला सकता नही।। आप ने इसको जगाया फिर सवाया कर दिया चाह कर इस शूल को फिर से दबा सकता नही।। क्या कहूँ जी आप से यह आप की दरिया दिली धार





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