पढ़ते

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कार्डो के अधीन जिंदगी

कार्डो के अधीन जिंदगी मानव जीवन जीने के लिए मेहनत करता था| अपना पेटभरने के साथ और दो चार लोगो का पेट भर लेता था| वह अपनी पहचान के लिए कभी सरकार केअधीन नही होता था| नेक ईमानदारी से जीने के लिए किसी प्रमाणपत्र की जरुरत नहीं थी|जब शासन और शासक का दबदबा बना तब से मानव जीवन बदहाल होता जा रहा हैं| लोगो का



बिछुडन ा

मिलकर बिछुड़ना लोगों का जिदंगी का दस्तूर बन गया , जिंदगी का वो हर एक पल जीवन का इतिहास बन गया , कारवां गुजर गया पढते पढ़ते इस इतिहास को , मालूम हु यी ना राज बिछुड़ने का , सिर्फ ये प्रकृति के बदलाव का बहाना बन गया ।। धन्यवाद





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