पंछी

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मन

ये मन... ये मन बिन डोर की पतंग, ये मन... इस का कोई ओर न छोर, ले चले चहुंओर। ये मन... कभी खुद से, तो कभी खुदा से, करें गिले शिकवे.. ये मन... ख्वाबों, चाहतों के बाग करें हरे, तो कभी इन्हीं के घाव लिए फिरे। ये मन... कभी लगे मनका(मोती), तो कभी लगे मण का( बोझिल)। ये मन... अदा भी इसी से, तबहा भी इसी से। य



ख़ुद पंछी क्यों ना बन जाए- एक सुन्दर कविता

कविता जो दिल को छू जाये पंछी क्या सोचे वो क्या जाने, पंछी बन जो उड़ना ना जाने. नहीं कल को सोच पछताना, क्या होगा सोच ना घबराना. सोने का पिंजरा पसंद नहीं, पेड़ों पर जाकर सो जाना. दाना-पानी का व्यापार नहीं, सोने-चांदी की भी चाह नहीं. जो है सब तेरा - मेरा है,



तुम रूठी रहो मैं मनाता रहूँ - आस का पंछी

Tum Roothi Raho Main Manata Rahoon Lyrics from Aas Ka Panchhi: This is a very well sung song by Lata Mangeshkar and Mukesh with nicely composed music by Shankar and Jaikishan. Lyrics of Tum Roothi Raho Main Manata Rahoon are beautifully penned by Hasrat Jaipuri.आस का पंछी (Aas Ka Panchhi )तुम रूठी र



आस का पंछी (Aas Ka Panchhi )

आस का पंची 1 9 61 की हिंदी फिल्म है। हमारे पास और का का पंची का एक गीत गीत है। शंकर और जयकिशन ने अपना संगीत बना लिया है। लता मंगेशकर और मुकेश ने इन गीतों को गाया है, जबकि हसरत जयपुरी ने अपने गीत लिखे हैं।इस फिल्म के गाने तुम रूठी रहो मैं मनाता रहूँ - Music - ShankarJaikishanLyrics - Hasrat JaipuriSi





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