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आओं लौट चले

आओं लौट चले तिनका तिनका जोड़कर, चिड़ियाँ बना लेती हैं बबूर मे घोसला |उड़कर-उड़कर पंख पसार, करती नदी सागर घर आँगन पार |पर ना जाने क्यो? चुँगने उड़ने के बाद, घर को वापस आती हैं |भर चोंच मे दाना लिए ऊँची उड़ान, लौट आती हैं बच्चो के लिए |भोर भई चहचाई चिड़ियाँ अपनी डाली मे, अब तो



‘जय हो पंखो वाली मईया ‘

कल से ही देख रहा हु ! कुछ दिनों पहले ही हमारे गोदाम में एक खम्बे पर एक कबूतरी ने अंडे दिए थेजो अब बच्चो में परिवर्तित हो चुके है ! चूँकि वे एक बंद गोदाम में जन्मे है इसलिए बाहरी वातावरण की तुलना में उन्हें उड़ने का अभ्यस्त होने में जरुरत से ज्यादा समय लगना है ,बच्चे माँ की आधी बराबरी इतने बड़े तो हो ह





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