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यह कैसा नियम है ? ( ईद मुबारक के अवसर पर संसमरण )

यह कैसा नियम है ?(ईद मुबारक के अवसर पर संसमरण)डॉ शोभा भारद्वाज विदेश में रहने वाले भारतीयों एवं पाकिस्तानियों के बीच अच्छे सम्बन्ध बन जाते है कारण भाषा एक से सुख दुःख | ईरान के प्रांत खुर्दिस्तान की राजधानी सनंदाज में पठान डाक्टर हुनरगुल उनकी पत्नी सूफिया के साथ



रहस्य

ए जिंदगी तू है तो रहस्य... तुझे तरस कहूं ,तुझे ओस कहूं तुझे पारस कहूं, तुझे नूर कहूं तुझे धारा कहूं, तुझे किनारा कहूं तुझे धानी चुनर कहूं , तुझे काली ओढ़नी कहूं तुझे आस कहूं, तुझे विश्वास कहूं तुझे रंग कहूं, तुझे जंग कहूं तुझे पतंग कहूं, तुझे बहता नीर कहूं तुझे उपहार कहूं, तुझे अभिशाप कहूं तुझे कर्म



धैर्य की परीक्षा

धैर्य की परीक्षा संत एकनाथ को अपने उत्तराधिकारी की तलाश थी वे किसी योग्य शिष्य को यह दायित्व सौंपना चाहते थे। उन्होने शिष्यों की परीक्षा लेनी चाही ।एक दिन उन्होंने सभी शिष्यों को बुलाया ओर एक दीवार बनाने का निर्देश दिया ।शिष्य इस काम में जुट गए ।दीवार बन कर तैयार भी हो गई ।लेकिन तभी एकनाथ ने उसे तो



चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को विस्तार वाद एवं बाजार दोनों चाहिए ?

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को विस्तारवाद एवं बाजार दोनों चाहिए ?डॉ शोभा भारद्वाज राष्ट्रपति जिनपिंग की गिद्ध दृष्टि विश्व के बाजार पर हैं चीन आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न देश बन चुका है चीनी सामानों से बाजार पटे हुए हैं कारण चीनी सामान सस्ता है क्योकि चीनी सरकार कारखानों को कच्चे माल पर सब्सिडरी देती ह



एक था बचपन (संस्मरण)भाग 1

मेरी कार भुसावल शहर से सुनसगांव के रास्ते पे तेजी से दौड़ रही थी,और मेरे दृष



‘‘चीन’’ का नाम ‘‘क्यों’’ नहीं लिया ? भारतीय? राष्ट्रीय? कांग्रेस!

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘अचानक’ ‘‘लेह’’ (लद्दाख) की 11000 फुट की उंचाई पर स्थित अग्रिम चौकी ‘‘नीमू’’ पंहुचकर सैनिकों के बीच ‘‘दम’’ भर कर सेना की हौसला अफजाई की। यह कहकर कि ‘‘बहादुरी और साहस शांति की जरूरी शर्ते है, दुश्मन ने हमारे जवान की ताकत व गुस्से को देखा है‘‘। उक्त दौरे के बाद कांग्रेस क



वृद्धाश्रम

वृद्धाश्रम.....पहले तो होते नहीं थे क्यूंकि पहले के वृद्ध खुद को वृद्ध समझते थे। आज के वृद्ध पहले जैसे नहीं रहे।पहले वृद्ध अपने नाती पोतों में व्यस्त होते थे।आज के बुजुर्ग फोन टीवी और लैपटॉप में।बदलाव आया है सबमें पहले के बुजुरगों को बच्चो की हर एक्टिविटी से मतलब होता था आज के बुज़ुर्ग को सिर्फ फोन



गुरुपूर्णिमा पर विशेष

*जय श्रीमन्नारायण* *श्रीमते गोदाम्बाय नमः*🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 *गुरुपूर्णिमा विशेष* *भाग तृतीय*🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 वैष्णव के चिन्ह स्वयं व्यक्ति को देव तुल्य बना देते हैं वैष्णव दीक्षा लेने के बाद पंच संस्कार युक्त मनुष्य स्वयं एक दिव्य यंत्र अर्थात दिव्य पुरुष के रूप में इस धरा धाम को आलोकित करता है



क़िस्सा गिलहरी और कोरोना का - दिनेश डाक्टर

फुदकती फुदकतीमेरी खिड़की परफिर आ बैठी गिलहरीछोटी सी लीची कोकुतर कुतर छीलाफिर मुझसे पूछाक्या हुआ सब खैरियत तो हैदेखती हूँ कई महीनों सेकैद हो महज घर में न बाहर जाते होन किसी को बुलाते होबस उलझे उलझे उदास नज़र आते हो ? मैंने देखा उसकीचौकन्नी आंखों कोसफेद भूरीचमकती धारियों कोछोटे छोटे सुंदर पंजो कोपल पल ल



कन्या के घर भोजन :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म की मान्यतायें एवं परम्परायें आदिकाल से दिव्य रही हैं | हमारे पूर्वजों ने जो नियम बनाए थे उसमें मानव का हित समाहित था | मानव जीवन में अनेक प्रकार की पुण्य धर्म करने का वर्णन मिलता है इन्हीं में दान को बहुत बड़ा महत्व दिया गया है | दान करके मनुष्य अपनी जाने अनजाने कर्मों से छुटकारा तो पाता



उत्तर प्रदेश बोर्ड परीक्षा में उत्तीर्ण सभी छात्रों को मैं बधाई

उत्तर प्रदेश बोर्ड परीक्षा में उत्तीर्ण सभी छात्रों को मैं बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूँ। आप सभी छात्र-छात्राओं को भारत का भविष्य निर्धारित करना है। आशा है आप अपने आगामी जीवन की सभी परीक्षाओं में अपना इसी प्रकार श्रेष्ठतम प्रदर्शन देगें। ‬‪जो छात्र इस वर्ष किसी कारणवश



हम पर भारी पड़ा फादर्स डे

हम पर भारी पड़ा फादर्स डे डॉ शोभा भारद्वाज 21 जून को पितृ दिवस दिन रविवार था | बेटी परिवार सहित सिंगापुर में रहती यहीं उच्चपद का आसीन है अक्सर वह व्यस्त रहती है लेकिन में लाक डाउन घर से काम करती है लेकिन इतवार के दिन वह अखबार पढ़ती है सिंगापुर में चीन से निकलने वाला दि ग्लोबल टाईम्स का इंग्लि



8 कारणों से Bollywood हो रहा है बर्बाद। Bollywood Nepotism and Future of Bollywood

किसी ने सही कहा है कि बॉलीवुड अब एक मुर्दा इंडस्ट्री हो चुकी है जिसमे ना तो कोई प्रतिभा रही है और ना ही कोई पहचान। साल में 10000 से भी ज्यादा छोटी बड़ी फिल्में बनाने वाली बॉलीवुड में मुश्किल से ही 10 फिल्में साल में अच्छी देखने को मिलती हैं, और ये गिनी चुनी फिल्में भी कहीं ना कहीं स्टारडम के नीचे आक



Sketches from life: घर में योग 2020

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को मनाया जाता है. हर साल इस 'त्यौहार' की कोई ना कोई थीम रख दी जाती है और इस बार अर्थात 2020 की थीम है 'घर में योग'. कोरोना के साइड इफ़ेक्ट कहाँ नहीं पहुंचे!पिछले बरसों में क्रम यूँ था:योग दिवस 2015 की थीम थी - सामंजस्य और शांति,योग दिवस 2016



आंखों से निकले हुए पानी को आँसू क्यो कहते है?

उसी पानी की बूँदों को खुसी कहते है। और कभी दुःख कहते है।कुछ लोग कहते है ये आंखे बोलती है। नजर नैना आंखों में अनगिनत गाने है। गानों में भी आँसू परछाई की तरह क्यो?



Sketches from life: परांठे पर टैक्स

परांठे पर टैक्स? वो भी 18%? ये तो सरासर अन्याय हो गया. सुबह नाश्ते में परांठा ना हो तो सारा दिन ऐसा महसूस होता है कि नाश्ता ही नहीं किया. कई बार तो परांठे का नाश्ता करने मूरथल भी हो आये. मूरथल ढाबों की तो शान है परांठा. पर जब अखबार पढ़ी तो पता लगा की खबर सही है. 'तैयार' या



क्या परिपक्व होते लोकतंत्र में ‘‘सरकारे’’ ‘‘गिराई’’ जाती है? अथवा ‘‘बनाई’’ जाती है?

राजस्थान में राज्य सभा के हो रहे चुनाव के संदर्भ में कांग्रेस का यह बयान आया है कि, राजस्थान में भी भाजपा ने मध्य प्रदेश के समान ही‘ ऑपरेशन कमल‘ पर अमल करना शुरू कर दिया है। भाजपा खरीद फरोख्त के द्वारा लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को गिराने का प्रयास कर रही है। विधायक दल के सचेतक द्वारा इसकी भ्



सफाई कर्मचारियों के हक और अधिकारों की दास्तां को बयां करती हुई नरेंद्र वाल्मीकि की कविता 'आखिर कब तक'

आखिर कब तकआखिर कब तककरते रहोगे अमानवीय कामढोते रहोगे मलमूत्रमरते रहोगे सीवरों मेंनिकालते रहोगे गंदी नालियाँढोते रहोगे लाशेंआखिर कब तकसहोगे ये जुल्मकब तक रहोगेखामोश ?सुनो सफाईकर्मियों !अब बजा दोबिगुलइन गंद



गिला नहीं

किल में टंगी गर्दन को भी आजाद होना था। रिस्क लेने, झेलने का दर्द भी बहुत हुआ, अब इसे भी खत्म करना जरूरी था। काम की दुनिया से बंधे थे, जो रिश्ते.. वो भी काम की ही दुनिया में सिमट जाएंगे। बिना हक और जरूरत के रिश्ते कब तक साथ चलेंगे? एक न एक दिन बीतते वक्त की धूल में गुम हो जाएंगे। सब भ्रम के पर्दे एक



प्रेम आशीष

घर में परिवार हुए एकल, मानव बड़े बूढों की छांव बिना, परछाई से नाता जोड़े हैं। अब बड़े बुजुर्ग पलक पसारे, अखियां रस्ता देखे हैं। अब आंगन में नीम, शीशम की छांव नहीं, आंगन भी अब सीमेंट से छाए हैं। बरामदे का दे नाम, दो गमले नीचे रख, कुछ छोटे गमले लटकाये है। बड़ा बूढ़ा दाढ़ी वाला बरगद पूजे का मिले नहीं



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