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थरूर की परेशानी ओर राजनीति मे जहर का घूट पीते वरिष्ठ

थरूर की परेशानी ओर राजनीति मे जहर का घूट पीते वरिष्ठकांग्रेस अंदर ही अंदर झुलसने लगी है: अब उसके बडे नेता नेत्रत्‍व कोलेकर खुल्‍लम खुल्‍ला बेबाक हैं:सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता शशि थरूर इस मामले में सबसे आगे हैं वे कोईभी बात खुल



काली काली रात में

काली काली रात में काले काले बादलों को देखकरकाला हो गया मैं अब काल देव भी काले रथ में आ रहे है काले काले बादलों को देखकर अब नजरो के सामने दोनों आ चुके है काले काले बादलों को देखकर ये भी काले मैं भी कालासारा जहां है काला काले काले बादलों को देखकरअब प्राण ले जा रहे है मे



युवा

युवा नौकरी का टैग पाने के लिए घर परिवार से दूरहोकर डिप्रेशन में हैं युवा|कर एम.फिल. पीएचडी शर्मसार है युवा, कर पढाईलिखाई बेरोजगार हैं युवा|गुजर रही आधी उम्र पढाई में, बाकी की उम्र में बीमारहैं युवा |निकलती हैं नौकरी आठवी पास की, उसमे भी साईकिलचलाने को तैयार है युवा|शादी -विवाह की बात छोडो, खुद का पे



तनाव

कई दिनों से देख रहा हूं कि मेरे कई मित्र इस बीच कम बोलने लगे हैं . वह कटे कटे से रहते हैं. उदासीन रहते हैं या फिर गुस्से से भर जाते हैं. ऐसे व्यक्ति तनाव और घबराहट के शिकार होते हैं और यही तनाव ज्यादा हो जाने पर भी आत्महत्या की शिकार भी हो जाते हैं. अगर आंकड़े की बात करें तो पूरी दुनिया में 2



मैं जिंदगी से मिलूं

हर घड़ी गम से गुफ़्तगू में निकल जाती है,गम अगर छोड़े कभी तो कहीं ख़ुशी से मिलूं,आँखों में अश्क़ की नदियां-सी उभर आती है,आँखों के अश्क़ रुके तो कहीं हँसी से मिलूं,राह कोई भी चलूँ जख्म हैं स्वागत में खड़े,दर्द फुर्सत दे अगर तो कहीं राहत से मिलूं,रोजमर्रा की जरूरतों से जंग जारी है,प्यास-पानी से बढे बात तो चाह



कहने को शहर है पर हालात गाँव से बदतर है ।

कहने को शहर है पर हालात गाँव से बदतर है | दो दशको से रहता आया हूँ  महाराष्ट्र - पालघर जिले के नालासोपारा शहर में (पहले ठाणे जिले में था ) | परंतु आज भी वक़्त=बेवक़्त विद्युत् प्रवाह में बाधा आम सी बात है | नालासोपारा का जिक्र तो अपने कई फ़िल्मों, टीवी कार्यक्रमों में सुना ही होगा पर यहाँ के नागरिकों की



आईने पे धुंध सी है ज़िन्दगी!!

साफ़ कर अपनी नज़र,अपना गिरेवाँ देखते हैं , और  कितने लोग हैं ,जो अपना ईमां देखते हैं ।ऐव अक्सर ढूँढना ,दस्तूर है अहले ज़माने का , खुदगर्ज हैं रिश्ते यहां सब अपना अरमाँ देखते हैं काश मिल जाये शकूंने दिल जूनून-ऐ-दौर में ,इसलिए हम दर-बदर अपना नशेमां देखते हैं|  ख्वाब है या कोई हकीक़त कुछ समझ आता नहीं, अपन





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