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प्रकृति एक भविष्य

प्रकृति एक भविष्य आशमाँ की छोर में, फैले जैसे आंधी,तूफान मचती जाये, जैसे दीप को बुझाती, पल दो पल में हो रही है ,काफी बर्बादी ,चारो ओर अँधेरा घोर ,फैला ये आबादी,ये मानवो की देन है ,और मानवो का अंत ,भविष्य की तू चिंता कर, क्या लेगा कोई



“गज़ल” पेड़ पीपल और बरगद तर छहाना सीख लें ॥

“गज़ल”आइए जी आज से हम दिल लगाना सीख लें जाइए मत छोड़कर हँस मुस्कुराना सीख लेंखो गए वो पल पुराने जो हमारे पास थे पेड़ पीपल और बरगद तर छहाना सीख लें ॥ हर गली कब छाँव जाती धूप कितने पल रहा रात कैसी भी कटी हो दिन बिताना सीख लें ॥ खो गया क्या आप का कोई खजाना कीमती बैठिए जी साथ मे



27 अगस्त 2015

काले मेघा! काले मेघा ! इतना क्यूँ तरसाए?

काले मेघा! काले मेघा ! इतना क्यूँ तरसाए,बहुत हुई अब देर सही, पर अब क्यूँ न बरसे हाय,गरमी से परेशां जनता सब बोले हाय! हाय!काले मेघ बोले, "तब तू( जनता) क्यूँ न पेड़ लगायें"?जब बारिश की इतनी आस तो क्यूँ प्रदुषण फैलायें ?जहाँ देखो वहां, तू पेड़ ही पेड़ कटवाए!फिर हमसे पूछे, हम क्यूँ न बरसे हाय!इसे बात पर



नीम के अनगिनत फायदे।

नीम के फायदे पारिस्थितिकी नीम का पेड़ सूखे के प्रतिरोध के लिए विख्यात है। सामान्य रूप से यह उप-शुष्क और कम नमी वाले क्षेत्रों में फलता है जहाँ वार्षिक वर्षा 400 से 1200 मिमी के बीच होती है। यह उन क्षेत्रों मे भी फल सकता है जहाँ वार्षिक वर्षा 400 से कम होती है पर उस स्थिति मे इसका अस्तित्व भूमिगत जल





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