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सविता

सविता अपने बचपन की सारी खुशीयों को अपने माँबाप के साथ नही बाँट पाई। गाँव को समझ नही पाई, चाँद तारों की छाव में उनकीठंडक को भाँप नही पाई, चन्द सवाल ही पूछ पाती कि चंदा मामा कितनीदूर है? गोरी कलाइयों में बंधे दूधिया तागे कमजोर पड़ गए थे| पैरो में पड़ी पाज़ेब की खनक छनक से अपने नानी नाना के दिल को मोहने ल



"गीत" लहराती फसलें खेतों की, झूमें गाँव किसान बरगद पीपल खलिहानों में, गाते साँझ बिहान......लहराती फसलें .....

आधार छंद - सरसी (अर्द्ध सम मात्रिक) शिल्प विधान सरसी छंद- चौपाई + दोहे का सम चरण मिलकर बनता है। मात्रिक भार- 16, 11 = 27 चौपाई के आरम्भ में द्विकल+त्रिकल +त्रिकल वर्जित है। अंत में गुरु /वाचिक अनिवार्य। दोहे के सम चरणान्त में 21 अनिवार्य है"गीत" लहराती फसलें खेतों की, झूमें गाँव किसानबरगद पीपल खलिहा



क्या आपको पता है गिरा हुआ पेड़ फिर कैसे खड़ा हो गया?

हमारे देश में कुछ भी अजीबोग़रीब हो जाए तो उसे चमत्कार कहकर धर्म से जोड़ देना बहुत आम बात है. ताजा मामला है उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले के रेउसा ब्लॉक का. यहां के सुरेठा गांव में ज़मीन पर पड़ा हुआ एक पीपल का पेड़ अपने आप खड़ा हो गया. धीरे-धीरे लोगों को इसके बारे में पता चला और



“गज़ल” पेड़ पीपल और बरगद तर छहाना सीख लें ॥

“गज़ल”आइए जी आज से हम दिल लगाना सीख लें जाइए मत छोड़कर हँस मुस्कुराना सीख लेंखो गए वो पल पुराने जो हमारे पास थे पेड़ पीपल और बरगद तर छहाना सीख लें ॥ हर गली कब छाँव जाती धूप कितने पल रहा रात कैसी भी कटी हो दिन बिताना सीख लें ॥ खो गया क्या आप का कोई खजाना कीमती बैठिए जी साथ मे





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