"पिरामिड"

"पिरामिड"क्याहुआसहाराबेसहाराभूख का मारालालायित आँखनिकलता पसीना।।-1हाँचोरसिपाहीसहायतापक्ष- विपक्षअपना करमबेरहम मलम।।-2महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



"पिरामिड"

"पिरामिड"वो रीतिप्रतीतिपरंपराज्ञान अक्षरासकुचाती गईक्यों छोड़कर जाती।।-1वोशुद्धदीवालीप्रतिपालीजीवन शैलीबदलती ऋतुनव फूल खिले हैं।।-2महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



#MeeToo मी टू सैलाब ( वर्ण पिरामिड )

येमी टू ले आया रज़ामंदी दोगलापन बीमार ज़ेहन मंज़र-ए-आम पे !वो मर्द मासूम कैसे होगा छीनता हक़ कुचलता रूह दफ़्नकर ज़मीर !क्यों इश्क़ रोमांस बदनाम मी टू सैलाब लाया है लगाम ज़बरदस्ती को "न"न मानो सामान औरत को रूह से रूह करो महसूस है ज़ाती दिलचस्पी। है चढ़ी सभ्यता दो सीढ़ियाँ दिल ह



"पिरामिड"

"पिरामिड" वोलंकारावणमंदोदरीसीता हरणजंगल भ्रमणदशानन दहन।।-1वोप्रणप्रणामक्षमादानलंकेश वधआदर्श चलनमाँ जानकी रहन।।-2महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



"पिरामिड"

ॐ जय माता दी, ॐ जय माँ शारदा......!"पिरामिड"माँपूजाअर्चनाअभ्यर्थनानमन क्षमाशारदीय ऋतुनवरात्रि विनय।।-1जैजगजननीकात्यायनीब्रम्हाचारिणीदुख निवारिणीजय माँ चंद्रघंटा।।-2महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



“पिरामिड”

“पिरामिड”रे हवा बदरी आसमान साँझ विहान पावस रुझान घटता तापमान॥-१ रीबाढ़ निगोरी भीगी ओरीरूप अघोरीपागल बदरी गिरा गई बखरी॥-२ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



“पिरामिड”

“पिरामिड”ये ड्रामा देख लो रोती आँखहँसता दिल खेल रहे मिल सजी है महफ़िल॥-१ क्या हुआ पुराना अभिनय प्रेम विनय यादों को जगाता कला मंच लुभाता॥-२ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



“पिरामिड”

“पिरामिड”वो वहाँ तत्पर बे-खबर प्रतीक्षारत मन से आहतप्यार की चाहत आप यहीं बैठे हैं॥-१ है वहाँ उद्यत आतुरता सहृदयितानैन चंचलता विकल व्याकुलता-२ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



“पिरामिड”

“पिरामिड”वो गया समय बचपन लौट न आए मन बिछलाए झूला झूले सावनी॥-१ ये वक्त बे-वक्त शरमाना होठ चबाना उँगली नचानाप्रेमी प्रेम दीवाना॥-२ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



"पिरामिड"

"पिरामिड"ये मनमंदिरशानदारसदाबहारभावना अपारमूर्तियां जानदार।।-१हैभव्यनक्काशीवनवासीमथुरा काशीगोकुल यमुनाभारतीय गहना।।-२महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



“पिरामिड”

“पिरामिड”ये हवा हवाई पुरवाई नैना लगाई उड़ते विमान मुट्ठी में आसमान॥-१वो उड़ा जहाज लहराया दिल डराया सिर फिरा गिरा बादल घहराया॥-२महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



"पिरामिड"

"पिरामिड"ये जग जीवनजनधन पशु व पंक्षीलगती है अच्छीसागर मिली नदी।।-१हैयह संसारउपहारवाणी विचारसुगमानुसारजीव जीव से प्यार।।-२महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



"पिरामिड"

"पिरामिड"ये मौन विरोध द्वंद क्रोध प्रत्यारोपनआत्म विलोपन मैल पे उबटन॥-१ क्या इच्छाअर्पणप्रतीकार प्रतिद्वंदितामन आतुरता लाये निखालिसता॥-२ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



“पिरामिड”

“पिरामिड”है सुखनगर बिनाघरकिरायेदार आनंदातिरेक प्रलोभन प्रत्येक॥-१है छद्म छलावाहर्षोत्कर्ष कल उत्कर्ष हृदय कस्तुरी वन नाचे मयूरी॥-२ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



“पिरामिड”

“पिरामिड”हो गई बेगानी रातरानी मंद खुशबू महकाती गलीसूखने लगी कली॥-१ हो गया बेगाना अनजाना नया बहानादिल का चुराना मत शोर मचाना॥-२ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



“पिरामिड”

“पिरामिड”ये आँसूविलापभावनाएंघिरे बादलहृदय घायलटप टप टपके।।-१येवक्त विदाई शहनाईहल्दी लेपनसिंदूर सौभाग्यहर्ष रुदन कंठ।।-२महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



“पिरामिड”

“पिरामिड”दो रोटी दो जून सूखी सूखी रखती भूखी पकड़े है पेट आंटा चक्की की भेंट॥-१ ये गर्मचपाती दादा नाती स्त्री अहिवाती घर संसार है रसोई दुलार है॥-२ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



“पिरामिड”

“पिरामिड”वो भीरु हिरण भोला भालानैन निराला भल मृगछाला कोमल दिल वाला॥-१है पशु सियारहोशियार अति कायर लालच लाचार शिकार का शिकार॥-२महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



“पिरामिड”

“पिरामिड”ये पीर पराई असमाई बदरी छाई कड़की बिजली घिर आफत आई ॥-१दे पीड़ा पतित छद्म घातघृणित बात अशुद्ध विचार किसका अधिकार॥-२महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



“पिरामिड”

“पिरामिड”खा खाना सु स्वाद अपवाद नशा खराब जहर जुलाब छोड़ लत तंबाकू ॥-१ न स्वाद सुंदर घास पूससूखी पत्तियाँतलब तंबाकू दुर्गंध थूक फाकू॥-२ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



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