पोएट्री

कविता - आ लिपट गले

चप्पा चप्पा हर सडक सडककरता मेरा दिल धडक धडकतुझसे मिलने की चाहत मेंन रहता दिल मेरा राहत मेंहै तू गई कहाँ मेरी बंजारनआ लिपट गले जा मनहारन. तेरी झीनी उस खुशबू मेंखोता रहता क्यों मजनू मैंलाली गुलाब सी होंठ खूबनरमाई जैसे हो घास दूबअब लौट के आजा मनभावनआ गले लिपट जा मनहारन. उन सख्त गर्म दोपहरी मेंउन नर्म अ



" जीवन अपना ही अपना है "

आज तनिक अनमनी व्यथित होसोचा कैसा जीवन है यह?रोज़ एक जैसी दिनचर्या !न कुछ गति न ही कोई लय !!इक विचार फिर कौंधा मन में चलो किसी से बदली कर लें कुछ दिन कौतूहल से भर लें ,कुछ नवीन तो हम भी कर लें!एक -एक कर सबको आँका सबकी परिस्थिति को परखाकुछ-कुछ सबमें आड़े आयानहीं पात्र फिर कोई सुहाया !कहीं बहुत





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