ध्यान के समय भोजन का प्रभाव

ध्यान की तैयारी की बात कर रहे हैं तोआगे बढ़ने से पूर्व ध्यान की तैयारी से सम्बद्ध कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्यों को भीसमझ लेना आवश्यक होगा |ध्यान के समय भोजन का प्रभाव :योग का मनोविज्ञान चार प्राथमिकस्रोतों का वर्णन करता है – चार प्राथमिक इच्छाएँ जो हम सभी को प्रेरित करती हैं,और ये हैं – भोजन, सम्भोग,



ध्यान के अभ्यास के लिए तैयारियाँ

हम बात कर रहे हैं कि ध्यान के अभ्यासके लिए स्वयं को किस प्रकार तैयार करना चाहिए | इसी क्रम में आगे :पञ्चम चरण : ध्यान में बैठना :श्वास के अभ्यासों के महत्त्व के विषयमें पिछले अध्याय में चर्चा की थी | श्वास के उन विशिष्ट अभ्यासों को करने के बादआप अब ध्यान के लिए तैयार हैं | ध्यान के आसन में बैठ जाइए



ध्यान

ध्यानऔर इसका अभ्यासध्यान के लिए स्वयं को तैयार करना :हम बात कर रहे हैं कि ध्यान के अभ्यासके लिए स्वयं को किस प्रकार तैयार करना चाहिए | इसी क्रम में आगे : तृतीय चरण…ध्यान की तैयारी के लिए विश्राम केअभ्यास (Relaxation Exercises) :शरीर को खींचने के अभ्यास (StretchExercises) के बाद कुछ देर का विश्राम का



ध्यान के लिए स्वयं को तैयार करना

ध्यानऔर इसका अभ्यासध्यान के लिए स्वयं को तैयार करना :ध्यान के अभ्यास के लिए आपने अपने लिएउचित स्थान और अनुकूल समय का निर्धारण कर लिया तो समय की नियमितता भी हो जाएगी |अब आपको स्वयं को तैयार करना है ध्यान के अभ्यास के लिए | इस विषय में क्रमबद्धरूप से तैयारी करनी होगी | इसी क्रम में...प्रथम चरण – ध्यान



ध्यान के लिए समय निकालना

ध्यानके लिए समय निकालना और उसकी नियमितता बनाए रखनाध्यान के लिए समय निकालना :ध्यान का अभ्यास रात को अथवा दिन मेंकिसी भी समय किया जा सकता है | किन्तु प्रातःकाल अथवा सायंकाल का समय ध्यान के लिएआदर्श समय होता है – क्योंकि इस समय का वातावरण ध्यान में सहायक होता है | आपकेचारों ओर का संसार शान्त होता है और



ध्यान के लिए तैयारियाँ

ध्यान के लिए तैयारियाँ :अब तक बात चल रही थी कि ध्यान कहतेकिसे हैं तथा ध्यान के सम्बन्ध में किस प्रकार के भ्रम हो सकते हैं | अब बात करतेहैं ध्यान के लिए स्वयं को तैयार करने की |ध्यान के अभ्यास में सबसे अधिकमहत्त्वपूर्ण और आवश्यक चरण है ध्यान के अभ्यास के लिए स्वयं को तैयार करना –जिसकी हम प्रायः उपेक्



ध्यान धर्म नहीं है

ध्यान धर्म नहीं है :पिछले अध्याय में हम चर्चा कर रहे थेकि भ्रमवश कुछ अन्य स्थितियों को भी ध्यान समझ लिया जाता है | जैसे चिन्तन मननअथवा सम्मोहन आदि की स्थिति को भी ध्यान समझ लिया जाता है | किन्तु हम आपको बता दें कि ध्यान न तोचिन्तन मनन है और न ही किसी प्रकार की सम्मोहन अथवा आत्म विमोहन की स्थिति है |



ध्यान और इसका अभ्यास

ध्यानऔर इसका अभ्यासकिसी विषय पर मनन करना अथवा सोचनाध्यान नहीं है :चिन्तन, मनन – विशेष रूप से कुछप्रेरणादायक विषयों जैसे सत्य, शान्ति और प्रेम आदिके विषय में सोचना विचारना अर्थात मनन करना – चिन्तन करना – सहायक हो सकता है, किन्तु यह ध्यान की प्रक्रिया से भिन्न प्रक्रिया है | मनन करने में आपअपने मन को



मन की वृत्ति

मन की वृत्ति :मन की वृत्ति होती हैपुरानी आदतों की लीक से चिपके रहना और उन अनुभवों के विषय में सोचना जो सम्भवतःभविष्य में कभी न हों | मन वर्तमान में, यहीं और इसी समय में जीना नहीं जानता | ध्यानहमें वर्तमान का अनुभव करना सिखाता है | ध्यान की सहायता से जब मन अन्तःचेतना मेंकेन्द्रित हो जाता है तो वह अपन



ध्यान - खोज मन के भीतर - स्वामी वेदभारती जी

ध्यानऔर इसका अभ्यासध्यान – खोज मन के भीतर :जीवन का यदि हम स्पष्ट रूप से अवलोकनकरें तो हम पाएँगे कि हमें बचपन से ही केवल बाह्य जगत की वस्तुओं को परखना औरपहचानना सिखाया गया है और किसी ने भी हमें यह नहीं सिखाया कि अपने भीतर कैसेझाँकें, कैसे अपने भीतर खोज करें और कैसे अपने भीतर के उस परम सत्य को जानें |



ध्यान धार्मिक अनुष्ठान नहीं

ध्यान और इसका अभ्यासध्यान कोई धार्मिक अनुष्ठान नहीं :जिस प्रकार पर्वतारोहण के समय पर्वतके उच्च शिखर तक पहुँचने के लिए सम्भव है कई मार्ग मिल जाएँ, किन्तु लक्ष्य सबकाएक ही होता है – पर्वत के शिखर तक पहुँचना | उसी प्रकार ध्यान की भी अनेकोंपद्धतियाँ हो सकती हैं जो देखने में परस्पर भिन्न प्रतीत हों, किन्



ध्यान की प्रक्रिया और मन्त्र

ध्यान और इसका अभ्यासध्यान की प्रक्रिया और मन्त्र :ध्यान के साधकों को मन को एकाग्र करनेमें सहायता मिले इसके लिए किसी ध्वनि का प्रयोग किया जा सकता है | कभी किसी दृश्य वस्तु पर भी ध्यान केन्द्रित करने का सुझाव दिया जा सकताहै | ध्यान में मस्तिष्क को केन्द्रित करने के लिए जिनध्वनियों का प्रयोग किया जाता



ध्यान एक प्रक्रिया

ध्यान और इसका अभ्यासहिमालयन योग परम्परा के गुरु स्वामी वेदभारती जी की पुस्तक Meditationand it’s practices के कुछ अंश ध्यान के साधकों के लिए...ध्यान एक प्रक्रिया :---ध्यान की प्रक्रिया में मन से आग्रहकिया जाता है सोचने विचारने, स्मरण करने, समस्याओं का समाधान करने और भूतकाल की घटनाओं अथवा भविष्य की आश



ध्यान और इसका अभ्यास - ध्यान क्या है

हिमालयन योग परम्परा के गुरु स्वामी वेदभारती जी की पुस्तक Meditationand it’s practices के कुछ अंश ध्यान के साधकों के लिए...ध्यान क्या हैसम्पूर्ण विश्व में प्रत्येक समाज मेंलोग उन योग्यताओं में निपुण होते हैं जो अपनी संस्कृति के अनुसार कार्य करने औरजीवन जीने के लिए उपयोगी होती हैं – जैसे: किस तरह वार्



ध्यान और इसका अभ्यास

हिमालयन योग परम्परा के गुरु स्वामी वेदभारती जी की पुस्तक Meditationand it’s practices के कुछ अंश ध्यान के साधकों के लिए...ध्यानकिसे कहते हैं ध्यान शब्द का प्रयोग अनेक अर्थों मेंकिया जाता है | यही कारण है कि ध्यान क्या है औरइसका अभ्यास किस प्रकार किया जाए इस विषय में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है | कुछ



गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टैगोर की एक रचना का अंश

मै अनेक वासनाओं को प्राणपन से चाहता हूँ;तूने मुझे उनसे वंचित रख, बचा लिया.तेरी यह निष्ठुर दया मेरे जीवन के कण कण में व्याप्त है.तूने आकाश, प्रकाश, देह, मन, प्राण बिना मांगे दिए हैं.प्रतिदिन तू मुझे इस महादान के योग्य बना रहा है;अति इच्छा के संकट से उबार कर...मित्रों , अर्थात अपने आप को अति इच्छा के



मानवता

मानवता ही नैतिकता का आधार है । सभी नैतिक मूल्य सत्य अहिंसाप्रेम सेवा शांति करुणा इत्यादि गुणों का मूल “मानवता” ही है । ‘मानवता’ हीनैतिकता का आधार है, जैसे कोई निर्धन, असहाय, बीमार व्यक्ति भूखा है; वहां दया सेपूरित होकर कोई सेवा करता है, भूखे को भोजन कराता है; तो



प्राण जाये पर वचन ना जाये (Pran Jaye Par Vachan Na Jaye )

"Pran Jaye Par Vachan Na Jaye" is a 1974 hindi film which has Sunil Dutt, Rekha, Premnath, Ranjeet, Bindu, Jeevan, Madan Puri, Veena, Iftekhar, Birbal, Suresh Chatwal, Rajan Haksar, Jankidas, Ratna Mala, Tiwari and Jay Shree T in lead roles. We have and one song lyrics of Pran Jaye Par Vachan Na J



"चरखा" 'कविता'

हे ! वरदानीतुम आनबसो !मेरे अंदर वो प्राण भरो ! कायर होता,मैंमन ही मनवीर सा तुमउत्कर्ष भरो ! हे ! मानव रक्षकअभिमानीविश्वास भरो !आभास भरो ! चित्त को पावन अब कर दो ! तुम अमृत वाणी ! कुछ कहके तुमजीवन का मार्गप्रशस्त्र करो !हे ! वरदानीतुम आनबसो !मेरे अ



कार्टूनिस्ट प्राण ! कॉमिक्स जगत के एक युग का अंत

कार्टूनिस्ट प्राण15 अगस्त को  कार्टूनिस्ट प्राण साहब का जन्मदिन है  l उन्हें इस दुनिया से गए 2 साल हो गए 5 अगस्त 2014 को उन्होंने कॉमिक्स जगत के साथ ही इस स्थायी शरीर को विदा कह दिया l'चाचा चौधरी ' बिल्लू ,पिंकी ,के रचयिता कार्टूनिस्ट'प्राण ' नहीं रहे l 75 साल की उम्र में उनके निधन से कॉमिक जगत को अ



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