प्रथा

1


नीतेश अजनबी

🚗 दहेज लेना कोई गुनाह नही* 💰आज के वर्तमान सत्र में दहेज लेना कोई गुनाह नहीं क्योंकि कन्या पक्ष के हमेशा यह सोचते हैं कि मेरी बेटी को ससुराल में कोई काम न करना पड़े और मेरी बेटी की शादी ऐसे घर में हो जहां पर नौकर नौकरानी कार्यरत हों और मेरी बेटी बैठकर हुकूमत चलाए अब इस क्रिया में लड़की पक्ष के गरीब



क्या सेकुलरिज्म का मतलब अब सिर्फ तुस्टीकरण ही रह गया है?

चाहे कोई भी समुदाय हो या कोई भी धर्म, जब तुस्टीकरण किया जाता है तो दूसरा वर्ग स्वयं को उपेछित समझने लगता है | जब हिन्दू आस्था की परवाह ना कर सती प्रथा, बाल विवाह, पर्दा प्रथा, छुआछूत, दहेज़ आदि कई बुराइओं को कानूनी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया



अन्धविश्वास की भेंट चढ़ते सूखा रोग से पीड़ित मासूम बच्चे.

आज के समय भी जब छोटे शहरों और गाँव में रहने वाले लोगों के यहाँ जब कोई बच्चा कमजोर पैदा होता है, या फिर उसे जन्म के बाद सूखा रोज हो जाए तो वे लोग उसे ठीक करने के लिए एक अनोखा उपाय करते हैं| वे लोग बुजुर्गों के बताये नुस्खे पर अम्ल करते हैं|ये लोग शनिवार या इतवार के



दहेज प्रथा ने दो बेगुनाहों की जान

प्रिय साथियों शब्दनगरी में आपका स्वागत है। ये कहानी कुछ सीख देती है हम सबको। इसलिए हमने अपने एक साथी की इस रचना को यहां रखना उचित समझा। शब्दनगरी टीम से अपेक्षा है कि वह इसे उचित स्थान दे। ताकि लोगों तक एक संदेश पहुंच सके। दरअसल, मोहल्ले में रहने वाली दो लडकियों मीना और सोनाली की शादी एक ही दिन तय





1
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x