महान वैज्ञानिक मैडम क्यूरी

महान वैज्ञानिक मैडम मैरी क्यूरी पार्ट -1 डॉ शोभा भारद्वाज ‘भौतिक एवं रसायन शास्त्री दोनों में नोबल पुरूस्कारप्राप्त करने वाली मैरी स्क्लाडोवका क्यूरी’ आज के छात्रों की रूचि साईंस सब्जेक्ट पढने में कम होगयी हैं वह शार्ट कट में ऐसी पढ़ाई करना चाहते हैं जिसमें बड़ा पे पैके



हासिल

शीर्षक :- हासिलकभी – कभी बिन माँगें बहुत कुछ मिल जाता हैऔर कभी माँगा हुआ दरवाज़े पे दस्तक दे लौट जाता हैशायद इसी को ज़िन्दगी कहते हैंसब्र का दामन थाम कर यहाँ हर कोई यूं ही जिये जाता है …मिले न मिले ये मुकद्दर उसकाफिर भी कोशिश करना फ़र्ज़ है सबकाआगे उसकी रज़ा कि किसको क्या हासिल हो पाता है …कभी – कभी सब्र



जिंदगी

हालात ए जिंदगी , संघर्षरत् हैं इस रुट की सभी लाईने अ़यस्त व्यस्त हैं माना किस्मत का सितारा, अभी ध्वस्त हैं पर हम भी , अपने प्रयासो मे ,निरंतर अभ्यस्त हैं



तुलना खुद से ही।

कोई भी व्यक्तिप्रतिभावान हो सकता है चाहे वो किसी भी परिवेश या समाज से संबंध रखता हो। ये बातअलग है कि कहीं कहीं लोग अपने जान- पहचान वालों को ही मौका देना पसंद करते हैलेकिन इसका अर्थ ये नहीं कि आपको दूसरे इंसान को अपने से कमतर आंकने का अधिकार मिलगया है। कुछ इंसानों की बहुत बुरी आदत होती है कि वो हमेशा



ज़िंदगी कुछ ऐसे सिखाती है।

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इंसानियत की परख़

कुछ वर्षों पहले कीबात है सज्जनपुर में एक सेठ था जो करोड़ों कमाता था। उसने अपनी सहायता के लिए दीपकनाम के एक सचिव को नियुक्त किया था, क्योंकि सेठ की कोई संतान नहीं थी तो उन्होंने सोचा क्यों नासारी संपत्ति दीपक के नाम कर दी जाए। दीपक उनके बहीखातों का हिसाब तो अच्छी तरहर



संगत का असर

आज मनोहर घरआया तो उसकी मां उसे देखकर हक्की बक्की रह गई, चेहरे की हवाईयां उड़ी हुई और कपड़ों पर मिट्टीऔर धूल के धब्बे ऐसे प्रतीत हो रहे थे किमानो मिट्टी में लोट कर आया हो।तब उसकी मांने पूछा बेटा “ये क्या हाल



लकी ड्रेस - एक प्रेरणादायी कथा

संजीवनी का आज कॉलेजमें प्रथम वर्ष का फायनल एग्ज़ाम है, उसकापेपर सुबह 8 बजे है, लेकिन ये क्या वो तो 6.30 बजने के बाद भी उठी ही नहीं। उसकीमां ने आवाज़ देकर उसे जगाया कहा “बेटा तुम्हारा आज इम्तिहान है और तुम सो हीरही हो, रोज तो सुबह 4 बजे उठ



बहुत देर

बहुत देर कर दी ज़िन्दगी तूनेमेरे दर पे आने मेंहम तो कब से लगे थेतुझे मनाने मेंअब तो न वो प्यास हैन वो तलाश है ,मानोंखुद को पा लिए हमनेकिसी के रूठ जाने मेंबहुत देर कर दी ज़िन्दगी तूनेमेरे दर पे आने मेंतेज़ हवा में जलाया चिरागक्यों बार बार बुझ जाता हैजब की कोई कसर नहीं छोड़



Motivational Hindi Poetry on life - वख्त की आज़मायिश ; अर्चना की रचना

जीवन पर आधारित हिंदी कविता वख्त की आज़मायिशये जो मेरा कल आज धुंधला सा है सिर्फ कुछ देर की बात है अभी ज़रा देर का कोहरा सा हैधुंध जब ये झट जाएगी एक उजली सुबह नज़र आएगी बिखरेगी सूरज की किरण फिर से ये ग्रहण सिर्फ कुछ देर का है अभी जो अँधेरा ढीठ बना फैला हुआ है तुम्हें नहीं पता,



दुनिया के सबसे ताकतवर सेनापति नेपोलियन के अनमोल विचार

दुनिया के महान सेनापतियों में एक नेपोलियन बोनापार्ट का नाम भी आता है। जिन्होंने फ्रांसीसी क्रांतिकरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन्होंने कुशलता, बुद्धिमता और कूटनातिज्ञ के चलते यूरोप का नक्शा बदल कर रख दिया था। इतना ही नहीं उन्होंने अनपी विवेकशीलता के चलते फ्रांस की जर्जर सेना को आधुनिक और शक्ति



सफलता का मूलमंत्र

सांप सीढ़ी सिर्फखेल नहीं,जीवन दर्शन भी है.सफलता और विफलता दुश्मन नहीं, एक दूसरे की साथी है.हर रास्ते पर सांप सा रोड़ा, कभी मंजिल के बेहद करीब आकर भी लौटना पड़ता है.कभी सिफ़र से शिखर तो कभी शिखर से सिफ़र का सफ़र तय करना पड़ता है.सफलता का कोई



क्यों बेअसर हो जाते है मोटिवेशनल विचार कुछ वक्त बाद ?

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जानिए भाग्य बड़ा या कर्म

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प्रेरणा

चिड़िया प्रेरणास्कूल का पहला दिन । नया सत्र,नए विद्यार्थी।कक्षा में प्रवेश करते ही लगभग पचास खिले फूलों से चेहरों ने उत्सुकता भरी आँखों और प



Archana Ki Rachna: Preview " मैं बदनाम "

ऐसा क्या है जो तुम मुझसेकहने में डरते हो पर मेरे पीछे मेरी बातें करते हो मैं जो कह दूँ कुछ तुमसे तुम उसमें तीन से पांचगढ़ते होऔर उसे चटकारे ले करदूसरों से साँझा करते होमैं तो हूँ खुली किताबबेहद हिम्मती और बेबाक़रोज़ आईने में नज़रमिलाता हूँ अपने भीतर झाँक, फिरऐसा क्या है जो



Archana Ki Rachna: Preview "देखो फिर आई दीपावली"

देखो फिर आई दीपावली, देखो फिर आई दीपावलीअन्धकार पर प्रकाश पर्व की दीपावली नयी उमीदों नयी खुशियों की दीपावली हमारी संस्कृति और धरोहर की पहचान दीपावली जिसे बना दिया हमने "दिवाली"जो कभी थी दीपों की आवलीजब श्री राम पधारे अयोघ्या नगरीलंका पर विजय पाने के बादउनके मार्ग में अँ



रिजेक्शन

धीरज जैसे ही बाइक खड़ी कर हेलमेट उतारता है, वैसे ही बगल वाली सविता आंटी की आवाज़ आती है, "क्यों धीरज बेटा, इंटरव्यू देकर आ रहे हो? "जी आंटी" "अब तक तो कई इंटरव्यू दे चुके हो, कहीं कुछ बात नहीं बनी क्या?" ह



आपकी सफलता में सलाहकार की भूमिका

संजय कुमार सुमन sk.suman379@gmail.comदोस्तो सलाहकार ये ऐसा सब्द है, जो कि हम सब के जीवन मे लागू होता है।ऐसा कोई व्यक्ति नही जिसे अपने जीवन मे किसी की सलाह की आवश्यकता नही पड़ी हो। कभी अपने व्यापार संबंधी या फिर अपने निजी जीवन संबंधी हमे



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