प्रेरणात्मक

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रिजेक्शन

धीरज जैसे ही बाइक खड़ी कर हेलमेट उतारता है, वैसे ही बगल वाली सविता आंटी की आवाज़ आती है, "क्यों धीरज बेटा, इंटरव्यू देकर आ रहे हो? "जी आंटी" "अब तक तो कई इंटरव्यू दे चुके हो, कहीं कुछ बात नहीं बनी क्या?" ह



ईमानदारी जिंदा है अभी तक

ईमानदारी जिंदा है अभी तक आदरणीय राणोजी नमस्कार!      पिछले एक महीने से मैं लगातार सोच रहा था कि, आपकोकिस प्रकार से शुक्रिया अदा करूँ, लेकिन समझ नहीं पा रहाथा। इस भागती-दौड़ती स्वार्थी और मतलबी दुनियां में आपकी ईमानदारी और सरल स्वभाव मेरे लिए एक सुखद एहसास ही नहीं बल्किआर्थिक रूप से भी लाभकारी रहा है।



काम करो ,कुछ नाम करो

@@@@@ काम करो , कुछ नाम करो @@@@@ ********************************************************** काम करो ,कुछ नाम करो ,पर नहीं देश बदनाम करो | भय को दूर भगाओ तुम ,जमीर को जगाओ तुम | दुखियों का तुम दुःख हरो | काम करो ,कुछ नाम करो ,पर नहीं देश बदनाम करो || धन खूब कमाओ तुम ,पर पूरा कर चुकाओ तुम | ईमान से त



हम होंगे कामयाब

हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाबहम होंगे कामयाब एक दिन ओ हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास,हम होंगे कामयाब एक दिन॥हम चलेंगे साथ-साथ, डाल हाथों में हाथहम चलेंगे साथ-साथ एक दिनओ हो, मन में है विश्वास, पूरा है विश्वासहम चलेंगे साथ-साथ एक दिन॥होगी शांति चारों ओर, होगी शांति चारों ओरहोगी शांति चारों



06 मई 2015

अपने दिल की सुनें ,आप सब कुछ कर सकते हैं

दो छोटे लड़के घर से कुछ दूर खेल रहे थे। खेलने में वे इतने मस्त थे कि उन्हें पता ही नहीं चला कि वे भागते-भागते कब एक सुनसान जगह पहुँच गए। उस जगह एक पुराना कुंवा था , और उनमे से एक लड़का गलती से उस कुवें में जा गिरा। “बचाओ-बचाओ”, वो चीखने लगा। दूसरा लड़का एकदम से डर गया और मदद के लिए चिल्लाने लगा , पर उस



इतने बदसूरत है फिर भी दर्पण देख रहे है

एक बार सुकारात सुबह के समय दर्पण देख रहे थे ऐसा वह लगभग रोज करते थे  ऐसा देखकर उनका एक शिश्य पीछे से मुसकरा रहा था कि सुकारात इतने बदसूरत है फिर भी दर्पण देख रहे है  सुकारात ने उसे मुसकराते देखा तो पूँछा क्या बात है  उसने कहा कुछ नही  तब सुकारात ने कहा मै दर्पण इस लिए देखता हूँ  कि और कितने अच्छे का



बुद्धिमानों की सलाह गंभीरता से लेनी चाहिए

एक बहुत बड़ा विशाल पेड़ था। उस पर बहुत से हंस रहते थे। उनमें एक बहुत सयाना हंस था। वह बुद्धिमान और बहुत दूरदर्शी था। सब उसका आदर करते 'ताऊ' कहकर बुलाते थे। एक दिन उसने एक नन्ही-सी बेल को पेड़ के तने पर बहुत नीचे लिपटते पाया। ताऊ ने दूसरे हंसों को बुलाकर कहा,  "देखो, इस बेल को नष्ट कर दो। एक दिन यह ब





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