प्यार



कुछ तो कहती हैं आंखे..

देखती, समझती, परखती और खामोश होने पर बहुत कुछ कहती हैं ये आंखेलेकिन जब बर्दाश्त के बाहर होता है दुख तो कभी-कभी जी भर के सैलाब सा बहती हैं ये आंखे....हर किसी को कुछ बताने, जताने को उत्सुक रहती हैं ये आंखे..इंतेजार में किसी की हर रात सुबह देखने को बन्द होती हैं ये आंखेहर किसी को सब कह देने का मौका भी



04 फरवरी 2021

रील लाइफ VS रियल लाइफ_3

रील लाइफ में एक सीरियल आता है छोटी सरदारनी जिसमें एक लड़की की शादी ऐसे लड़के से होती है जिसके एक बेटा होता है परम , वो लड़की उसकी सौतेली माँ होते हुए भी उसे सगी माँ सा प्यार और दुलार देती है , उस बच्चे को अपना समझती है और अपने बच्चे और सौतेले बच्चे में कोई फर्क नहीं करती हैं अब बात



तिरंगा

तिरंगाडॉशोभा भारद्वाज 15 अगस्त 1947 पहला स्वाधीनता दिवस ,लाल किले से देशके पहले प्रधान मंत्री श्री जवाहरलालनेहरू ने तिरंगा फहराया था, लहराता हुआ झंडा शान बान के साथ आजादी का संदेश दे रहा था. आजाद भारत केनागरिक घरों से निकल कर लाल किले के मैदान में इकठ्ठे हो कर आजादी का जश्न मना रहेथे ‘अपने’ राष्ट्र



माँ मुझे अच्छे से प्यार कर लेना

माँ मुझे अच्छे से प्यार कर लेना, मेरी आँखों में अपनादुलार भर देना,दुनियाँ को सारी मैं ममता सिखाऊँ,ऐसा तुम मेरा श्रंगार कर देना । ....माँ मुझे अच्छे से मैं घुटनों चलूँगी, गिर- गिर पड़ूँगी, गोदी नाचूँगी, खिल खिल हसूँगीझुलूंगी, खेलूँगी , सबको खिलाऊँगी, आँगन मेँ



लव जेहाद ,प्यार में शर्त कैसी ?

लव जेहाद , प्यार में शर्त कैसी? डॉ शोभा भारद्वाज कोई शर्त होती नहीं प्यार में ,मगर प्यार शर्तों पे तुमने किया फ़िल्मी गाना लव जिहाद के लिए सटीक बैठता है . लव जिहाद ऐसा मानना है मुस्लिम युवको द्वारा गैर-मुस्लिम समुदायों की लड़कियों को टारगेट कर प्रेम का ढोंग रचना है चिंता इस लिए है आजकल मुस्लिम लड़कों



बसेरा

बसेरातिनतिन बिन, बना बसेरा लेती चिड़ियाँ।सांझ से रह बसेरे मे, रात गुजार लेती चिड़ियाँ।उड़ भोर परे खेतों से, दाना चुँग लेती चिड़ियाँ ।कुछ दबा चोच मे दाना, उड़ आती चिड़ियाँ ।बैठ बुने बसेरे मे, बच्चो को दाना चुनती चिड़ियाँ।कर प्यार पूरा, उड़ेल दाना बच्चे के मुँह मे,दूर गगन मे उड़ जाती चिड़ियाँ।न मांगती भीख किस



बरिश की बूंदे

ए बारिश की बूंदे जब भी पड़ती हैमुझे मेरा यौवन याद आता हैकभी श्रृंगार की हुईं नव वधू की तरह दिखती हैकभी मानो अपने मै समा जाने को तरसती हैजब भी आती है साथ अपने प्यार लाती है



वचनामृत

https://vishwamohanuwaach.blogspot.com/2020/06/blog-post_26.html वचनामृतक्यों न उलझूँ बेवजह भला!तुम्हारी डाँट से ,तृप्ति जो मिलती है मुझे।पता है, क्यों?माँ दिखती है,तुममें।फटकारती पिताजी को।और बुदबुदाने लगता हैमेरा बचपन,धीरे से मेरे कानों में।"ठीक ही तो कह रही है!आखिर कितना कुछसह रही है।पल पल ढह र



कोरोना की मार

वाह! क्या हाल और समाचार है? सावन की बौछार है। कोरोना की मार है। बनती बिगड़ती सरकार है, चुनाव कराने के लिए आयोग हर हाल में तैयार है। बाहरवी में बहुत से बच्चे 90% से पार है। वही दसवीं कक्षा का रिजल्ट पिछली बार से बेकार है। चीन, पाकिस्तान सीमा पर कर रहा वार है। इधर नेपाल भी कर रहा तकरार है। यूपी में



प्यार

प्यार एक खूबसूरत एहसास है जो अधूरा होकर भी अपने आप में ही पूरा होता है प्यार अगर सच्चा हो तो वो बदले में प्यार नहीं चाहता बल्कि उसको खुश देखना चाहता है जिससे प्यार करता है चाहे उसे प्यार म मिले न मिले ....... वो बस....



बेपनाह प्यार है आजा हिंदी सोंग लिरिक्स हिंदी में

सूना सूना लम्हा लम्हा मेरी राहें तन्हा तन्हा आकर मुझे तुम थाम लो मंजिल तेरी देखे रस्ता मुड़के जरा अब देख लो ऐसा मिलन फिर हो ना हो सब कुछ मेरा तुम ही तो हो बेपनाह प्यार है आज्या पूरे सोंग के लिरिक्स देखने के लिए नीचे क्लिक करें सूना सूना लम्हा लम्हा



तुम

मैं अब भी तुम्हारे बारे मे लिखती हूँहाँ, मैं अब भी तुम्हारे बारे मे लिखती हूँ। एक अरसे से साथ हैं हम, और इस साथ के बारे मे लिखती हूँ। मैं अब भी तुम्हारे बारे मे लिखती हूँ। जानती हूँ कभी कहोगे नहीं तुम, परये बात बहुत खुशी देती है तुम्हे, किमैं अब भी तुम्हारे बारे मे लिखती हूँ। वो अहसास जो कुछ 18 साल



मैं जब भी

कविताजब भी मैंमैं चुप बैठकर जब भी खुद से बात करता हूँ,मैं हर उस पल उसके साथ टहलता और विचरता हूँ।साथ मेरे दूर तक जाती है वीरान तन्हाईयां,फिर भी मैं उसकी बाहों में गर्म राहत महसूस करता हूँ।होता है सफर मेरा अधूरा दूर छीतिज तक, मैं फिर भी हर सफर में उसके साथ रहता हूँ।होती नहीं वो पास मेरे किसी भी पड़ा



तोहमत ए दिलशिकनी

उनकी नाराज़गी में भी अगर है प्यार, हमारी नाराज़गी में भी नफरत तो नहीं है. वो है दिलशाद हम भी संगदिल तो नहीं है.दिलशिकनी की तोहमत क्यों हम पे लगी है. (आलिम)



लाल गुलाब 'मरजानया ' से जीन जोग्या'' तक के नाम

लाल गुलाब ‘मरजानया’ से जीन जोग्या तक के नाम डॉ शोभा भारद्वाज वेलेंटाइन डे के मौके पर मुझे पाकिस्तानी इंजीनियर अहसान कीकहानी याद आई वह हमारे ईरान में प्रवासके दौरान परिचितभारतीय के साथ घूमने आया था | पाकिस



मर्ज़

मर्ज़ कोई ले गया चुराकर ऐसा मैं बीमार हुआ। शुमार नहीं था किस्मत में जोक्यों उसका दीदार हुआ।। 💔



सुरक्षा कवच

बचपन में खेलते, दौड़ते ठोकर लग कर गिर जाने पर भैया का मुझे हाथ पकड़ कर उठाना,भीड़ भरे रास्तों पर, फूल-सा सहेज कर अँगुली पकड़ स्कूल तक ले जाना,और आधी छुट्टी में माँ का दिया खानामिल-बाँट कर खाना, याद आता है। बहुत-बहुत याद आता है। सर्कस और सिनेमा देखते समय हँसना - खिलखिलाना,बे-बात रूठना-मनाना,फिर देर रात त



लघुकथा ...........स्विच आफ

किसी के प्रति आकर्षण कभी भी सम्मोहन में बदल सकता है ।रुचियां हमेशा हमसफर ढूँढ़ती रहती हैं । प्यार वो समुंदर है जिसमें हर उम्र समा जाती है ।प्यार शक्ति है तो कमजोरी भी यही बनता है ।______________________________________________________लघुकथास्विच आफ " इतने दिन से कहां थीं ? "" होना कहां है ,घर पर ही



हमे तुमसे प्यार है.

ना तुमको फुर्सत मिली आने की, ना हमें ही फुर्सत मिली तुम्हे भूल जाने की. तुम अपने कामों में मशरूफ थे, और हम बस तुम्हारी ही यादों में ग़मगीन थे. खुशियां तो सब तुम्हारे साथ थी, गम ही बेचारे हमारे पास थे, हज़ारों तुमसे मिलने को बेताब थे, हम तुम्हारे ख्वाबो के



इश्क

💕💕 *इश्क* 💕💕इश्क कोई अज़ूबा 'रिश्ता' नहींइश्क कोई गहरी साज़िश नहींइश्क कोई बेहिसाब सज़ा नहींइश्क क़ुदरत का एक फ़रमान हैक़ायानात से उतरा हुआ,आशिकों की आन जान हैइश्क क़ायदा है हुश्न फ़रमाने काइश्क उल्फ़त का आइना हैइश्क "चाहत" हैइश्क नेह की डगर हैइश्क "ज़न्नत" का पैगाम हैइश्क हदों के पार दोस्तना है



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