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पानी को पानी रहने दो

पानी को पानी रहने दोनदी अकेले बहकर अनेको घाट बनाती थी। हर घाट निराला होता था।पनघट मे पानी भारी बाल्टी रस्सी से खीच कर औरत सुस्ताती थी।भर मटका कलस फुरसत मे सखी सहेलियों से बतियाती थी, बेटी बहू।चरवाहा बैठ पेड़ की छांव मे मन से गीत गुंगुनाता, गीले होठो से। जानवर तालाबो मे डुबकी लगाते तैरते इतराते ले



ये कूचे (Ye Kooche )- जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वह कहाँ हैं

Ye Kooche - Jinhe Naaz Hai Hind Par Woh Kahaan Hain Lyrics of Pyaasa : Ye Kooche - Jinhe Naaz Hai Hind Par Woh Kahaan Hain is a beautiful hindi song from 1957 bollywood film Pyaasa. This song is composed by S. D. Burman. Mohammad Rafi has sung this song. Its lyrics are written by Sahir Ludhianvi. प्



प्यासा (Pyaasa )

'पयासा' 1 9 57 की हिंदी फिल्म है जिसमें गुरु दत्त, माला सिन्हा, वहीदा रहमान, श्यामा और मेहमूद प्रमुख भूमिका निभाते हैं। हमारे पास और पियासा के 2 गीत गीत हैं। एसडी बर्मन ने अपना संगीत बना लिया है। मोहम्मद रफी और आशा भोसले ने इन गीतों को गाया है जबकि साहिर लुधियानवी ने अपने गीत लिखे हैं।इस फिल्म के गा



ग़ज़ल (जिंदगी का ये सफ़र ) - Sahityapedia

ग़ज़ल (जिंदगी का ये सफ़र )कल तलक लगता था हमको शहर ये जाना हुआइक शक्श अब दीखता नहीं तो शहर ये बीरान हैबीती उम्र कुछ इस तरह की खुद से हम न मिल सकेजिंदगी का ये सफ़र क्यों इस कदर अनजान हैगर कहोगें दिन को दिन तो लोग जानेगें गुनाहअब आज के इस दौर में दीखते नहीं इन्सान हैइक दर्द का



गुनगुनाना चाहता हूँ

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औरत

तपिश ज़ज़्बातोंकी मन में,न जाने क्योंबढ़ी जाती ?मैं औरत हूँ तोऔरत हूँ,मग़र अबला कहीजाती ।उजाला घर मे जोकरती,उजालों से हीडरती है ।वह घर के हीउजालों से,न जाने क्योंडरी जाती ?जो नदिया हैपरम् पावन,बुझाती प्यास तनमन की ।समन्दर में मग़रप्यासी,वही नदिया मरीजाती ।इज़्ज़त है जोघर-घर की,वही बेइज़्ज़तहोती है ।



भूख प्यास मजबूरी का आलम देखा

भूख प्यास मजबूरी का आलम देखा,जब से होश संभाला केवल ग़म देखा। नहीं मिला ठहराव भटकते क़दमों को,जिसके भी मन में झाँका बेदम देखा। वादों और विवादों की तक़रीर सुनी,जख्मीं होंठों पर सूखा मरहम देखा। बिना किये बरसात बदरिया चली गई, कई मर्तबा ऐसा भी मौसम देखा। सर पे छप्पर नहीं मह्ज नीला अम्बर था,उन आंखों में स्वा





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