राष्ट्र



सीखा दो सबक इन गद्दारों को

मैं अबला नहीं, सबला बनना चाहती हूं; मैं आज बॉलीवुड में पनप रहे ,अपराधों का भंडाफोड़ करना चाहती हूं।बॉलीवुड पर कुछ गुंडों का, एकाधिकार मिटाना चाहती हूं।बॉलीवुड हमारी संस्कृति और राष्ट्रप्रेम ,युवा वर्ग की प्रगति का दुश्मन जो ठहरा;उसे सुधारने



गुरुकुल शिक्षा पद्धति

प्राचीन शिक्षा पद्धति का विलोपन, नवीन शिक्षा पद्धति का आगमन; ऋषि मुनियों द्वारा प्रदत्त शिक्षा ,गुरुकुल पद्धति वाली शिक्षा को नमन;आश्रम में रह कर गुरु और गुरुमाता की सेवा करते हुए शिष्यों का होता अध्ययन;किताबी ज्ञान के साथ साथ वास्तव में मिल



वह पुरानी किताब

धूल से पटी पड़ी एक किताब को झटक,उसके पुराने पन्नों को धीरे से पलटते रहा;अतीत को वर्तमान के झरोखे से झांकते रहा।मै पिछले कई वर्षों का हिसाब देखता रहा,अंधेरे में गुजारे कई दिनों को याद करता हुआ;सोचता रहा क्या ये उजियारा दिन हमेशा का हुआ।वक़्त ने मुझे अपने आप को तलाशने का मौका ना दिया,गुलाम भारत को स्व



कट्टर पंथियों द्वारा राम मन्दिर के भूमि पूजन के खिलाफ प्रोपगंडा

कट्टर पंथियों द्वारा राम मन्दिर के भूमि पूजन के खिलाफ प्रोपगंडा डॉ शोभा भारद्वाज 'ऑल इंडिया इमाम एसोसियेशन के मौलाना साजिद रशिदी टीवी डिबेट में कहते थे राम मंदिर बनाइये कौन मना करता है ,मन्दिर वहीं बनायेंगे तारीख नहीं बतायेंगे| जब मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन हुआ उनके विचार अलग थे मौलाना ने कहा



भारत-चीन संघर्ष के निहितार्थ

विषय-भारत-चीन संघर्ष के निहितार्थचीन और भारत के बीच सप्ताह भर का तनाव इस सप्ताह घातक हो गया। यहाँ हम एक दूरस्थ हिमालयी क्षेत्र में होने वाली झड़पों के बारे में जानते हैं जो पड़ोसियों के बीच संबंधों को काफी खराब कर सकती हैं। और चीन के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। दोनों देश-जो दुनिया की सबसे लंबी अचिह



महामारी के बाद के विश्व में भारतीय विदेश नीति

कोरोना वायरस के प्रकोप से विश्व व्यवस्था व्यापक परिवर्तन के दौर से गुज़र रही है। इन परिवर्तनों की व्यापकता सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक क्षेत्रों के साथ ही मानव के



अपना राष्ट्र बचाना है ....!

धैर्य और अनुशासन से, अपना राष्ट्र बचाना है ....! देखा नहीं था हमने कभी ,आज़ादी के परवानों को ,जो कफ़न बाँध कर निकले थे …… शहीद हुए , पर, आने वाली नस्लों को वे आज़ाद हवा देकर वे गए । सोचो , हम सब में भी तो भगत सिंह , राजगुरु, सुखदेव है खड़ा ,आज देश पर ही नहीं, मानवता पर सं



क्या कहता है, ये विराम ........?

क्या कहता है, ये विराम ........?<!--[if gte vml 1]><v:shapetype id="_x0000_t75" coordsize="21600,21600" o:spt="75" o:preferrelative="t" path="m@4@5l@4@11@9@11@9@5xe" filled="f" stroked="f"> <v:stroke joinstyle="miter"/> <v:formulas> <v:f eqn="if lineDrawn pixelLineWidth 0"/> <v:f eqn="sum @0 1 0"/



हिन्दुराष्ट्र का स्वागत करने को रहिए तैयार

#हिन्दुराष्ट्र : #राह_प्रशस्त Waiting 10 Year Onlyआ_रहे_है_हम_हिन्दू_छा_रहे_है_हम_हिन्दू..विजय के शंखाड़नद को व् हिन्दुराष्ट्र के स्वागत को तैयार रहियेकोरोना भी ईशवरीय वरदान सिद्ध होगा सनातन हिन्दू संस्कृति के प्रसार पचार व् स्वीकार्यता का आधार भी बनेगा. .समझिये निचे दिए विश्लेषण मात्र से1757 -1857 =



मानव एवं प्रकृति :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में मनुष्य जैसा कर्म करता उसको वैसा ही फल मिलता है | किसी के साथ मनुष्य के द्वारा जैसा व्यवहार किया जाता है उसको उस व्यक्ति के माध्यम से वैसा ही व्यवहार बदले में मिलता है , यदि किसी का सम्मान किया जाता है तो उसके द्वारा सम्मान प्राप्त होता है और किसी का अपमान करने पर उससे अपमान ही मिलेगा |



महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

अन्तर्राष्ट्रीयमहिला दिवस की सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँसारी की सारीप्रकृति ही नारीरूपा है – अपने भीतरअनेकों रहस्य समेटे – शक्ति के अनेकों स्रोत समेटे - जिनसेमानवमात्र प्रेरणा प्राप्त करता है... और जब सारी प्रकृति ही शक्तिरूपा है तो भलानारी किस प्रकार दुर्बल या अबला हो सकती है ? आज की नारीशारी



राष्ट्र प्रेम

मेरा न्यारा देश है ये भारतदीप जले घर-घर, हर आँगनरंग-बिरंगी सजी रंगोली द्वारों परप्रिये का श्रृंगार देख, इठलाये साजनविजय-ध्वजा फहरे हर चौबारेवीरों का ये देश राष्ट्र की सीमा संवारेपाई हर बच्चे ने आज महारथदेश-प्रेम से बड़ा न कोई स्वारथजग-मग करता मेरा प्यारा भारतस्वरचित ©®★★★★★★★★★★★★★★प्रेरणात्मक सृजन



दुनिया के सबसे खूबसूरत राष्ट्रीय उद्यानों में : दिनेश डाक्टर

क्रोएशिया में लैंड होने के बाद बहुत जगह एक बात बहुत सारे क्रोएशयन ने कई बार जो बड़े गर्व से दोहराई वो है यहां के पानी के बारे में उनका विश्वास । ' आप बोतल के पानी में पैसा खराब न करे ! हमारे हर नल का पानी किसी भी बोतल के पानी से ज्यादा अच्छा और शुद्ध है । क्योंकि मेरे अपने देश में बहुत सारी बीमारियों



जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म के प्रत्येक धर्म ग्रंथ में स्वर्ग एवं नर्क की व्याख्या पढ़ने को मिलती है और साथ ही यह भी बताया जाता है कि मनुष्य के यदि अच्छे कर्म होते हैं तो वह स्वर्ग का अधिकारी होता है और बुरे कर्म करने वाले नर्क में जाकर अनेक प्रकार की यातनाएं सहन करते हैं | स्वर्ग एवं नर्क की व्याख्या पढ़ने के बाद



हमारा संविधान :--+ आचार्य अर्जुन तिवारी

*प्राचीनकाल में हमारे देश भारत में राजाओं का शासन होता था , जो कि कुल परंपरा के अनुसार चला करता था | राजा के चुनाव में प्रजा का कोई अर्थ नहीं होता था | आदिकाल से लेकर के अंग्रेजों के शासन तक यही परंपरा चलती रही जिसे राजतंत्र कहा गया है , परंतु जब हमारे देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के अथक परिश



हमारा गणतन्त्र दिवस :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*किसी भी परिवार , समाज एवं राष्ट्र को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए नियम एवं संविधान की आवश्यकता होती है , बिना नियम एवं बिना संविधान के समाज एवं परिवार तथा कोई भी राष्ट्र निरंकुश हो जाता है | इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अंग्रेजों की दासता से १५ अगस्त सन १९४७ को जब हमारा देश भारत स्वतंत्



राजधर्म :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*हमारे देश भारत में आदिकाल से राजा एवं प्रजा के बीच अटूट सम्बन्ध रहा है | प्रजा पर शासन करने वाले राजाओं ने अपनी प्रजा को पुत्र के समान माना है तो अपराध करने पर उन्हें दण्डित भी किया है | हमारे शास्त्रों में लिखा है कि :- "पिता हि सर्वभूतानां राजा भवति सर्वदा" अर्थात किसी भी देश का राजा प्रजा के लिए



भय बिनु होइ न प्रीति :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरती पर मानव समाज में वैसे तो अनेकों प्रकार के मनुष्य होते हैं परंतु इन सभी को यदि सूक्ष्मता से देखा जाय तो प्रमुखता दो प्रकार के व्यक्ति पाए जाते हैं | एक तो वह होते हैं जो समाज की चिंता करते हुए समाज को विकासशील बनाने के लिए निरंतर प्रगतिशील रहते हैं जिन्हें सभ्य समाज का प्राणी कहा जाता है ,



आज का भारत :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*प्राचीनकाल से ही भारत देश आपसी सौहार्द्र , प्रेम एवं भाईचारे का उदाहरण समस्त विश्व के समक्ष प्रस्तुत करता रहा है | वैदिककाल में मनुष्य आपस में तो सौहार्द्र पूर्वक रहता ही था अपितु इससे भी आगे बढ़कर वैदिककाल के महामानवों ने पशु - पक्षियों के प्रति भी अपना प्रेम प्रकट करके उनसे भी सम्बन्ध स्थापित करन



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