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ईरान के नये राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी कट्टरपंथियों की पसंद है

ईरान के नयेराष्ट्रपति इब्राहीम रईसी कट्टरपंथियों की पसंद है डॉ शोभा भारद्वाज ईरानीक्रान्ति राजशाही के खिलाफ जन क्रान्ति थी जिसमें स्टूडेंट्स ने बढ़ चढ़ कर हिस्सालिया था लेकिन धर्म के नाम पर सत्ता पर मौलानाओ ने पूरी तरह कब्जा कर इस्लामिकगणराज्य की स्थापना की .ईरान के बाशिंदे कहते थे मुल्लाओं ने



corona virus and black fungash

corona virus and black fungash रहेगा दूर कृपया मास्क सेनीटाइजर और चश्मा लगाए जरूर<!--/data/user/0/com.samsung.android.app.notes/files/clipdata/clipdata_210531_043912_472.sdoc-->



किसान आन्दोलन बनाम महत्वकांक्षा

किसान आन्दोलन बनाम महत्वकांक्षा डॉ शोभा भारद्वाज देश को आजादी मिली लेकिन आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी राशन में लाल या सफेद गेहूं ( चोकर जैसा ) वह भी लंबी कतारों में लग कर मिलता था यह गेहूं अमेरिका और कनाडा से आता .1962 एवं 1965 में भारत को दो युद्ध पहला चीन के साथ दूस



तिरंगे का अपमान करने वाले कौन थे ?

तिरंगे का अपमानकरने वाले कौन थे ?डॉ शोभा भारद्वाज 26 जनवरी की शाम ,हमारे एरिया में सब्जी वाले सब्जीबेचने आये उन्होंने मुझे देखा घेर कर खड़े हो गये उनके चेहरे से दुःख साफ़ झलक रहाथा सब एक साथ बोलने लगे आंटी जी आज का दिन हम कभी नहीं भूल सकते 26 जनवरी कैसाहंगामा मचाया है, लाल किले पर से हमारा तिरंगा झंडा



तिरंगा

तिरंगाडॉशोभा भारद्वाज 15 अगस्त 1947 पहला स्वाधीनता दिवस ,लाल किले से देशके पहले प्रधान मंत्री श्री जवाहरलालनेहरू ने तिरंगा फहराया था, लहराता हुआ झंडा शान बान के साथ आजादी का संदेश दे रहा था. आजाद भारत केनागरिक घरों से निकल कर लाल किले के मैदान में इकठ्ठे हो कर आजादी का जश्न मना रहेथे ‘अपने’ राष्ट्र



देश में ‘‘लोकतंत्र‘‘ ‘‘खत्म’’ हो गया है! राहुल गांधी! सही!/?

महामहिम राष्ट्रपति को किसानों के मुद्दे पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सांसदों द्वारा अपने नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विरोध मार्च कर ज्ञापन सौंपने की अनुमति देने के बजाए धारा 144 लागू किये जाने पर राहुल गांधी को यह कहना पड़ गया कि देश में ‘‘लोकतंत्र समाप्त‘‘ हो गया है। रात्रि की अंधकार की गहरा



सरकार और किसान नेता क्या ‘‘दिशाहीन‘‘ होकर मुद्दे से ‘‘भटक गये‘‘ या ‘‘परस्पर भटका‘‘ रहे है?

किसान आंदोलन के 22 दिन हो गये है। लेकिन अभी तक दोनों पक्षों के अंतिम निष्कर्ष व निर्णय पर पंहुच न सकने के कारण स्थिति रबड़ के समान खिंच कर वापिस न आने के कारण पूर्वतः दो विपरीत छोरों पर (दिल्ली सीमा के दोनों पार) रुकी हुई है। लेकिन इसका यह मतलब कदापि नहीं है कि इन 21 दिनों में कुछ भी सकारात्मक व नका



इस त्‍यौहार दुआ करो बूढा सरोवर का सौंदर्य ऐसा ही बना रहे !

इस त्‍यौहार दुआ करो बूढा सरोवर का सौंदर्य ऐसा ही बना रहे !धन्‍य है छत्‍तीसगढ की धरती::यहां की मिटटी, पानी ओर गोबर तीनों ने लागों को जीने का तरीका बता दिया: इसकी सच्‍चाईजानना है तो राजधानी रायपुर के बूढ़ा तालाब में शाम थोडा सा समय निकालिये और यहां केरंगीन नजारों के साथ स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्व



भेदियों से देश को कितना नुकसान!

भेदियों से देश को कितना नुकसान!अक्सर होता यह है कि किसी आपराधिक वारदात को रोकने पहले कोई एहतियाती कदम नहीं उठाये जाते किन्तु जब हो जाता है तो यह बवंडर बन जाता है तथा उसके पीछे जनता का पैसा इतना खर्च हो जाता है कि उसकी कोई सीमा नहीं रहती. उत्तर प्रदेश में भले ही छोटे मोटे अपराध को ज्यादा तबज्जो नहीं



‘‘आंकड़ों’’ के ‘‘खेल’’ की ‘‘बाजीगरी’’ द्वारा ‘‘कोरोना’’ पर ‘‘राजनीति’’क्यों?

कोरोना वायरस को भारत में आए 4 महीने पूर्ण हो चुके हैं। हमारे देश में प्रथम मरीज 30 जनवरी को केरल के ‘‘त्रिशूर’’ में आया था। ‘‘कोरोना’’ (कोविड़-19) राष्ट्रीय महामारी और आपदा के रूप में, हमारे देश के लिये एक अत्यंत चिंता का विषय था। इसलिए सत्ता और विपक्ष के साथ देश की संपूर्ण जनता 30 जनवरी को एक साथ खड़



कोरोना का कहर

मनुष्य पर छाई है छिपी अंधेरा, रूप धारण कर वाईरस कोरोना ।इसका अर्थ है मनुष्य पर भारी , क्योंकि है ये महामारी ।अब मानव की दशा क्या होगी ?क्या कोरोना की विदाई होगी ?देख दृश्य मन विचलित हो उठता, क्या यही है सभ्य की कृपा ।क्या यह , मानव जीवन सिहर उठेगा ?या संसार पुनः हिलस उठेगा ?



जनता कर्फ़्यू

अब अपने को अपने ही घर मे कैद कर,अपने और अपने देश की कर लो हिफ़ाजत आज।अब जो आयीं ये संकट की घड़ी तो मिलकर काट लो आजबस ये मानों , आज ख़ुद से खुद के लिये एक जंग हैं,,पर ये देश हमारा ही एक अभिन्न अंग हैं।हा माना,, हमनें कभी इतनी बंदिशों में जीना नहीं सीखा,, पर यह तो समझो ये बंदिशे ही,, हमारा आने वाला कल है



जीवन में असफलता के 10 मुख्य कारण...

जीवन में असफलता के 10 मुख्य कारण... क्या आप बार-बार अपने जीवन में असफलता प्राप्त कर रहे हैं? क्या आप सोचने लगे हैं कि आपकी असफलता का मुख्य कारण आपका भाग्य है? अगर हाँ ! तो इस पोस्ट के द्वारा असफलता के 10 मुख्य कारण को पढ़ें और अपने जीवन में failure के सही कारणों को समझें। हो सकता



अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस भारत में भी मनाया जाने लगा है है

अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस भारत में भी मनाया जाने लगा हैडॉ शोभा भारद्वाजभारतीय समाजिक व्यवस्था में कन्या को देवी का दर्जा देकर पूजा जाता है लेकिन समाज पुरुष प्रधान माना जाता है लड़का , आज भी गाँव में किसी के घर से थाली पीटने की आवाज आती है आस पड़ोस समझ जाता है उनके घर में पुत्र रत्न ने जन्म लिया है |पह



क्या है सफेद दाग का इलाज ? दवा या परहेज, आइए जानते हैं

फिल्मों में अक्सर एक ऐसा कलाकार है जो अंग्रेजों का किरदार निभाता है, इसलिए क्योंकि उसका स्किन कलर बहुत सफेद होता है जो अंग्रेजों की तरह गोरा दिखता है। उसका नाम तो याद नहीं लेकिन वो फिल्म तीस मार खान में दिखाया गया था। क्या आप जानते हैं कि वो गोरा नहीं था बल्कि उसके शर



टीबी के उपचार में आसान घरेलू उपाय | TB Ka Gharelu Ilaz In Hindi

भारत देश में टीबी रोग एक महारोग के रुप में फैल चुका है टीबी के कारण वर्षभर में लाखों लोगों की मौत हो जाती है इसका एक प्रमुख कारण यह भी इस रोग के बारें में लोगों में जानकारी का अभाव है। टीबी मानव शरीर में माइकोइक्टीरियम ट्युबरक्लोसिस बैक



बिगड़े नेताओं के ‘‘बिगडे़ बोल’’-‘‘विवादित बोल’’! फायदा-नुकसान कितना!

भारतीय राजनीति में हमेशा से ही ‘‘बयानवीर’’ मीडिया में सुर्खिया पाते रहे है। विभिन्न राजनैतिक पार्टियों के कुछ नेतागण अपने बेवाक बयानों के माध्यम से सुर्खियाँ बटोरनें के उदे्श्य से ऐसे बयान देते रहते है, जिसके परिणाम स्वरूप उनकी छाप एक चर्चित चेहरे की होकर वे माने जाने



"गज़ल" जिंदगी के दिन बहुत आए हँसा चलते बने थे नैन सूखे कब रहे की तुम रुला चलते बने थे

बह्र- 2122 2122 2122 2122 रदीफ़- चलते बने थे, काफ़िया- आ स्वर"गज़ल" जिंदगी के दिन बहुत आए हँसा चलते बने थेनैन सूखे कब रहे की तुम रुला चलते बने थेदिन-रात की परछाइयाँ थी घूरती घर को पलटकरदिन उगा कब रात में किस्सा सुना चलते बने थे।।मौन रहना ठीक था तो बोलने की जिद किये क्योंकाठ न था आदमी फिर क्यों बना चलते



"गज़ल" पास आती न हसरत बिखरते रहे चाहतों के लिए शोर करते रहे

वज़्न--212 212 212 212, अर्कान-- फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन, बह्रे- मुतदारिक मुसम्मन सालिम, क़ाफ़िया— करते, (अते की बंदिश) रदीफ़ --- रहे"गज़ल" पास आती न हसरत बिखरते रहेचाहतों के लिए शोर करते रहेकारवाँ अपनी मंजिल गया की रुकाकुछ सरकते रहे कुछ फिसलते रहे।।चंद लम्हों की खातिर मिले थे कभीकुछ भटकते रहे कु



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