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टीबी के उपचार में आसान घरेलू उपाय | TB Ka Gharelu Ilaz In Hindi

भारत देश में टीबी रोग एक महारोग के रुप में फैल चुका है टीबी के कारण वर्षभर में लाखों लोगों की मौत हो जाती है इसका एक प्रमुख कारण यह भी इस रोग के बारें में लोगों में जानकारी का अभाव है। टीबी मानव शरीर में माइकोइक्टीरियम ट्युबरक्लोसिस बैक



बिगड़े नेताओं के ‘‘बिगडे़ बोल’’-‘‘विवादित बोल’’! फायदा-नुकसान कितना!

भारतीय राजनीति में हमेशा से ही ‘‘बयानवीर’’ मीडिया में सुर्खिया पाते रहे है। विभिन्न राजनैतिक पार्टियों के कुछ नेतागण अपने बेवाक बयानों के माध्यम से सुर्खियाँ बटोरनें के उदे्श्य से ऐसे बयान देते रहते है, जिसके परिणाम स्वरूप उनकी छाप एक चर्चित चेहरे की होकर वे माने जाने



"गज़ल" जिंदगी के दिन बहुत आए हँसा चलते बने थे नैन सूखे कब रहे की तुम रुला चलते बने थे

बह्र- 2122 2122 2122 2122 रदीफ़- चलते बने थे, काफ़िया- आ स्वर"गज़ल" जिंदगी के दिन बहुत आए हँसा चलते बने थेनैन सूखे कब रहे की तुम रुला चलते बने थेदिन-रात की परछाइयाँ थी घूरती घर को पलटकरदिन उगा कब रात में किस्सा सुना चलते बने थे।।मौन रहना ठीक था तो बोलने की जिद किये क्योंकाठ न था आदमी फिर क्यों बना चलते



"गज़ल" पास आती न हसरत बिखरते रहे चाहतों के लिए शोर करते रहे

वज़्न--212 212 212 212, अर्कान-- फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन, बह्रे- मुतदारिक मुसम्मन सालिम, क़ाफ़िया— करते, (अते की बंदिश) रदीफ़ --- रहे"गज़ल" पास आती न हसरत बिखरते रहेचाहतों के लिए शोर करते रहेकारवाँ अपनी मंजिल गया की रुकाकुछ सरकते रहे कुछ फिसलते रहे।।चंद लम्हों की खातिर मिले थे कभीकुछ भटकते रहे कु



"मुक्तक" हार-जीत के द्वंद में, लड़ते रहे अनेक। किसे मिली जयमाल यह, सबने खोया नेक।

"मुक्तक" हार-जीत के द्वंद में, लड़ते रहे अनेक।किसे मिली जयमाल यह, सबने खोया नेक।बर्छी भाला फेंक दो, विषधर हुई उड़ान-महँगे खर्च सता रहे, छोड़ो युद्ध विवेक।।-1हार-जीत किसको फली, ऊसर हुई जमीन।युग बीता विश्वास का, साथी हुआ मशीन।बटन सटन है साथ में, लगा न देना हाथ-यंत्र- यंत्र में तार है, जुड़ मत जान नगीन।।-2



"गज़ल" छोड़कर जा रहे दिल लुभाते रहे झूठ के सामने सच छुपाते रहे

वज़्न--212 212 212 212 अर्कान-- फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन, बह्रे- मुतदारिक मुसम्मन सालिम, क़ाफ़िया— लुभाते (आते की बंदिश) रदीफ़ --- रहे"गज़ल"छोड़कर जा रहे दिल लुभाते रहेझूठ के सामने सच छुपाते रहे जान लेते हक़ीकत अगर वक्त कीसच कहुँ रूठ जाते ऋतु रिझाते रहे।।ये सहज तो न था खेलना आग सेप्यास को आब जी भर प



राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की कहानी

राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की कहानी (विजयी विश्व तिरंगा प्यारा ) डॉ शोभा भारद्वाज 15 अगस्त 1947 पहला स्वाधीनता दिवस ,लाल किले से देश के पहले प्रधान मंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू ने तिरंगा फहराया था, लहराता हुआ झंडा शान बान के साथ आजादी का संदेश दे रहा था| आजाद भारत के नागरिक घरों से निकल कर लाल किले क



रउब्दुत (Rubdoot )- टूनपुर का सुपरहेरो

रूबूट गीत टूनपुर का सुपरहीरो: रूबूट 2010 बॉलीवुड फिल्म टूनपुर का सुपरहीरो से एक सुंदर हिंदी गीत है। यह गीत अनु मलिक द्वारा रचित है। अल्ताफ राजा, अजय देवगन, सुदेश भोसले और सोनू निगम ने इस गीत को गाया है। इसके गीत मम्मी स्ट्रेंजर द्वारा लिखे गए हैं।टूनपुर का सुपरहेरो (Toonpur Ka Superhero )रउब्दुत (R



टूनपुर का सुपरहेरो (Toonpur Ka Superhero )

'टूनपुर का सुपरहीरो' एक 2010 हिंदी फिल्म है जिसमें अजय देवगन, काजोल, रजा मुराद, संजय मिश्रा, मुकेश तिवारी, तनुजा, डेलानाज पॉल, विवेक वासवानी, अमेय पांड्य और शेरेवीर वाकील प्रमुख भूमिका निभाते हैं। हमारे पास टूनपुर का सुपरहीरो का एक गीत गीत है। अनु मलिक ने अपना संगीत बना लिया है। अल्ताफ राजा, अजय देव



"गीत"चैन की बांसुरी बजा रहे बाबा

"गीत"चैन की बांसुरी बजा रहे बाबासु-धर्म की धूनी जगा रहे बाबाआसन जमीनी जगह शांतिदायी नदी पट किनारे नहा रहे बाबा॥..... चैन की बांसुरी बजा रहे बाबामाया सह काया तपा रहे बाबा सुमन साधना में चढ़ा रहे बाबा सुंदर तट लाली पीत वसन धारीराग मधुर संध्या



“गज़ल-गीतिका ” जा रहे हो किधर दर्द सारे लिए

छंद ‘’वाचिक स्रिग्वणी’’ मापनी- २१२ २१२ २१२ २१२, पदांत- लिएसमांत- आरे..... “गज़ल, छोड़ जाओ दवा है हमारे लिए सह न पाती सहुलियत इस मर्ज को खिल सकी क्या शमा भग्न तारे लिए॥बात इतनी कहूँ लौट जाओ सनम विष न घोलो जलज नयन खारे लिए॥टूटकर फिर न जुड़ती कड़ी साख सेरख उम्मीदें हार दामन सिता



"माँ" शब्द की महिमा

मेरे कार्यालय में पानी के लिए बोरिंग हो रही थी तब मुझे "माँ" शब्द की महिमा एक और उदाहरण मिला।"माँ" शब्द की महिमा का बखान करने के लिए मेरा जीवन तो पर्याप्त नहीं है बस इतना कह सकता हु की "माँ" शब्द जोड़ते ही कोई भी महान हो जाता है। बोरिंग करते हुए एक के बाद एक कितने ही पाइप



कारवाँ गुजर गया

कारवाँ गुजर गया, गुबार देखते रहेकत्ल करने वाले, अख़बार देखते रहे|तेरी रूह को चाहा, वो बस मै थाजिस्म की नुमाइश, हज़ार देखते रहे||मैने जिस काम मे ,उम्र गुज़ार दीकैलेंडर मे वो, रविवार देखते रहे||जिस की खातिर मैने रूह जला दीवो आजतक मेरा किरदार देखते रहे||सूखे ने उजाड़ दिए किसानो के घरवो पागल अबतक सरकार





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