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भारत में बढ़ती आबादी चिंता का विषय है

भारत में बढ़ती आबादी चिंता का विषय है डॉ शोभा भारद्वाजकोरोना महामारी ने विश्व के देशों की अर्थव्यवस्था की ग्रहण लग गया महामारी से बचाने के लिए लाक डाउन मजबूरी थी लेकिन बेरोजगारी बढ़ती जा रही था | भारत सरकार कोरोना से पीड़ित भारतीयों की स्वदेश वापसी करवाई क्या वह वापिस जा सकेंगे यदि नहीं उनके रोजगा



नंदा मैं आ रही हूं.......!

कहानीनंदा मैं आ रही हूं.......! रामकिशोर पंवार रोंढवाला उस रात अचानक नींद से जाग कर वह बिस्तर पर बैठ गया। उसने लगता है कि कोई बुरा सपना देख लिया हो, उसका पूरा बदन पसीने से लथपथ और मँुह से आवाज तक नहीं निकल रही थी। कुछ देर बाद पत्नि ने जैसे ही कमरे में झांका तो वह दंग रह गई! उसे लगा आज फिर इनको नींद



रहिमन धागा प्रेम का

रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय टूटे से फिर ना जुड़े जुड़े तो गांठ पड़ जाए



क्या ‘‘कोरोना’’ ने ‘‘नौकरशाही’’ को कुंठित तो नहीं कर दिया है?

लॉकडाउन-4 समाप्त! लॉकडाउन-5 प्रारंभ नहीं। बल्कि इसकी जगह देश अनलॉक-1 (नॉकडाउन-1) के नये दौर में देश प्रवेश कर रहा हैं। यह नया दौर कैसा होगा, यह तो भविष्य ही बतलायेगा। आइये, तब तक नौकरशाही द्वारा जारी अपरिपक्व आधे-अधूरे आदेशों निर्देशों के संबंध में गुजरे लॉकडाउन का थोड़ा अवलोकन कर लें। ‘देश’ व ‘जीवन



कोरोना का कहर

मनुष्य पर छाई है छिपी अंधेरा, रूप धारण कर वाईरस कोरोना ।इसका अर्थ है मनुष्य पर भारी , क्योंकि है ये महामारी ।अब मानव की दशा क्या होगी ?क्या कोरोना की विदाई होगी ?देख दृश्य मन विचलित हो उठता, क्या यही है सभ्य की कृपा ।क्या यह , मानव जीवन सिहर उठेगा ?या संसार पुनः हिलस उठेगा ?



रानी बेटी ,लाडो बेटी असुरक्षित क्यों ?

रानी बेटी ,लाडो बेटीअसुरक्षित क्यों ?डॉ शोभा भारद्वाज देश में एक ही प्रश्न पूछा जा रहा है देश कीलगभग 48% आबादी महिलायें हैं |हर क्षेत्र में महिलायें पुरुष समाज से कमतर नहीं हैकई क्षेत्रों में आगे हैं |देश के विकास में उनका बराबर का योगदान है नेवी में एकमहिला पायलेट बनी , फाईटर पायलेट हैं लेकिन असुर



राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्टूबर)

..... इंसानियत ही सबसे पहले धर्म है, इसके बाद ही पन्ना खोलो गीता और कुरान का......"जय हिन्द"



बदल गया सुखदुआ समाज

किन्नर से बने सुखदुआ | SUKHDUA SAMAJहारमोनल इनबायलेंस के कारण आयी एक बीमारी की वजह से हमारा समाज हमेशा ही उन्हें कौतुहल से देखता आया है। सैंकड़ो-हजारोंं वर्षों से उपेक्षित इस समाज को किन्नर, हिजड़ा, छकका और भी न जाने किन-किन नामों से पुकारा जाता रहा लेकिन डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने 14 नवंब



मैं तेरे साथ जी न सका ,अकेला मर तो सकता हूँ

मैं तेरे साथ जी नहीं सका, अकेलामर तो सकता हूँ डॉ शोभा भारद्वाज रिसेटेलमेंट कालोनी के छोटेप्लाट में बने चार मंजिला घर में हा –हाकार मचा था उस घर के जवान बेटे ने फांसीलगा ली थी घर का कमाऊ बेटा तीन भाई पाँच बहनों का भाई अंधे पिता ,बीमार माँ कासहारा जिसने भी सुना हैरान रह गया फांसी के बाद लम्बी गर्दन



सविता

सविता अपने बचपन की सारी खुशीयों को अपने माँबाप के साथ नही बाँट पाई। गाँव को समझ नही पाई, चाँद तारों की छाव में उनकीठंडक को भाँप नही पाई, चन्द सवाल ही पूछ पाती कि चंदा मामा कितनीदूर है? गोरी कलाइयों में बंधे दूधिया तागे कमजोर पड़ गए थे| पैरो में पड़ी पाज़ेब की खनक छनक से अपने नानी नाना के दिल को मोहने ल



"गीतिका" छा रही कितनी बलाएँ क्या बताएँ साथियों द्वंद के बाजार में क्या क्या सुनाएँ साथियों

छन्द- सीता (मापनीयुक्त वर्णिक) वर्णिक मापनी - 2122 2122 2122 212 अथवा लगावली- गालगागा गालगागा गालगागा गालगा पारंपरिक सूत्र - राजभा ताराज मातारा यमाता राजभा (अर्थात र त म य र)"गीतिका" छा रही कैसी बलाएँ क्या बताएँ साथियोंद्वंद के बाजार मे



रहीम के २० प्रसिद्ध दोहे सार सहित - Rahim ke dohe in Hindi

दोहा :- दोनों रहिमन एक से, जों लों बोलत नाहिं। जान परत हैं काक पिक, रितु बसंत के नाहिं॥अर्थ :- रहीम कहते हैं कि कौआ और कोयल का रंग एक समान कला होता हैं. जिस कारण जब तक उनकी आवाज़ सुनाई न दे दोनों में भेद कर पाना बेहद कठिन है परन्तु जब बसंत ऋतु आती है तो कोयल की मधुर आवाज़ से दोनों में का अंतर स्प



जातियां और आज का भारत

आज के भारत में जातियां अस्तित्वहीन हो चुकी है। परन्तु राजनीति बांटने और वोट बैंक बनाने के लिये आज भी इसका भरपूर प्रचार कर रही हैं। इसे रोका जाना चाहिये। भारत सरकार को अब सरकारी फार्मों आदी से जाति का कॉलम हटा देना चाहिये। इसके स्थान पर केवल वर्ग जैसे - साम



पाकिस्तानी प्रधान मंत्री इमरान खान की भारत के प्रति विदेश नीति

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान , भारत के प्रति विदेश नीति डॉ शोभा भारद्वाज पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की भारत के प्रति विदेश नीति ने वैसी ही करवटें बदलीं जैसीपकिस्तान के हुक्मरानों की आदत रही है चुनावी भाषणों में उनका भारत के प्रति रुखआक्रामक था लेकिन चुनाव में जीत के बाद अपने भाषण



भूख ?

भूख ? डॉ शोभा भारद्वाज भारत विकास शील देश है, राजधानी दिल्ली में चर्चा है तीन बच्चियाँ मर गयी पोस्ट मार्टम करने वाले डाक्टर ने कहा उनके पेट में अन्न का दाना भी नहीं था कुपोषण की शिकार आभा रहित बच्चियाँ सूख गयीं थी उनके शव देख कर ऐसा लगता था जैसे आठ दिन से कुछ खाया नही



“गीतिका”हर मौसम के सुबह शाम से इक मुलाक़ात रही है

समांत- अही पदांत- है मात्रा भार-२९ १६ १३ पर यति “गीतिका”हर मौसम के सुबह शाम से इक मुलाक़ात रही है सूरज अपनी चाल चले तो दिन और रात सही है भोर कभी जल्दी आ जाती तब शाम शहर सजाती रात कभी दिल दुखा बहकती वक्त की बात यही है॥हरियाली हर ऋतु को भाती जब पथ पुष्प मुसुकाते गुंजन करते



कुछ तो लोग कहेंगे

जब किसी को अपने में कोई खूबी नज़र नहीं आती तब वो दुसरो में बुराई खोजता है. ऐसे लोगो की जिंदगी दुसरो में बुराई ढूंढ़ने और बुराई करने में ही गुज़र जाती है, और एक रोज़ जब वो दुनिया छोड़ देते है तो लोग भी उसको याद करना छोड़ देते है. रहीम ने कहा है " बुर



11 जुलाई विश्व जनसंख्या दिवस और भारत

11 जुलाई विश्व जनसंख्या दिवस और भारत डॉ शोभा भारद्वाज विश्व में 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है |जिस तेजी से अनियमित रूप से जनसंख्या की वृद्धि हो रही है जबकि सार्थक जनसंख्या की वृद्धि कम है चिंता का विषय है देश का विकास गरीब बिमार, अस्वस्थ और बेरोजगारों क



एक बूँद की कहानी है...

एक बून्द की कहानी है... एक बून्द की ज़ुबानी है .. इस रामझिम बारिश की हर एक बून्द की बस यही निशानी है ... गिरती है ज़मीन पर तोह एक तड़पती प्यास को बुझाती है... पड़ती है तन पर तोह ... एक ख़ुशी का एहसास जगाती है... केहती है सबसे की बेवजह न दूषित करो मुझे मेरी लीला भी न्यारी ह



2017 में यह बड़ी हस्तियाँ गिरी मुँह के बल

आज बात करते है उन बड़ी हस्तियां की जिनके लिए रहा यह साल रहा बेहद खराबसाल 2017 को खत्म हुए कुछ दिन हो गए हैं, यह साल किसी के लिए अच्छा था तो किसी के लिए बुरा। बहुत लोग इस साल ज़मीन से उठ कर आसमान पर जा बैठे, वहीं कुछ हस्तियां एसी भी हैं जो



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