राज



शिव सूत्र

महेश्वर सूत्र माहेश्वर सूत्रों की उत्पत्ति भगवान नटराज (शिव) के द्वारा किये गये ताण्डव नृत्य से मानी गयी है|नृत्तावसाने नटराजराजो ननाद ढक्कां नवपञ्चवारम्|उद्धर्त्तुकामो सनकादिसिद्धादिनेतद्विमर्शे शिवसूत्रजालम्||अर्थात:- नृत्य (ताण्डव) के अवसान (समाप्ति) पर नटराज (शिव) ने सनकादि ऋषियों की सिद्धि और क



08 मार्च 2020

द्वादश माधव परिक्रमा: धरती की प्राचीनतम परिक्रमा 600 वर्षों के स्थगन के बाद पुन: प्रारम्भ

प्रयाग तीर्थों के राजा हैं! सनातन धर्म के अनुसार संसार के सारे तीर्थ प्रयाग से हे हैं, न कि अन्य तीर्थों से प्रयाग! भगवान् श्री ब्रह्मा जी ने सृष्टि का आरम्भ प्रयाग कि भूमि से ही किया था! सृष्टि के क्रम में सर्व प्रथम भगवान् श्री ब्रह्मा जी ने यज्ञ की उत्पत्ति की और यज्ञ



सीनियर सिटिजन की 8 मार्च की वर्कशाप में सभी का आमँत्रण

डी एल एस एल्डर सपोर्ट सर्विसेज़ प्रयागराज आपको सीनियर सिटिजन की एक वर्कशाप में सम्मिलित होने का निमँत्रण देता है।डीएलएस एल्डर सपोर्ट सर्विसेज़ मेडिसिन और केयर सेवाएँ घर पर उपलब्घ कराने का एक सामाजिक उपक्रम है।आपको यह जानकर सुखद आशचर्य होगा कि सीनियर सिटिजन की आबादी के सन्दर्भ में भारत दूसरे नम्बर पर



एल्डर हीलर की ट्रेनिंग लेकर अपना मेडिकल बिल ८०% कम कीजिये, तदुपरान्त रोगियों की सेवा कीजियें

60 वर्ष से उपर का कोई भी महिला या पुरूष एल्डर हीलर बन कर सर्वप्रथम अपना और अपने परिवार के रोगों का प्रबन्धन कर सकेगा। तदुपरान्त आप अपने घर पर ही रोगियों की सेवा कर सकते हैं।एल्डर हीलर बन कर आप अपने परिवार का मेडिकल बिल 50 से 80% तक कम कर सकते हैं।एक सफल एल्डर हीलर बनने के



हार्ट अटैक से बचाव के गुर सिखाये गये वरिष्ठ नागरिकों को

रविवार, 1 मार्च को डीएलएस एल्डर सपोर्ट सर्विसेज़, प्रयागराज द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के लिये एक वर्कशाप का आयोजन प्रात: 9.30 पर स्थानीय नवचेतना साहित्य विस्तार पटल, बाघम्बरी रोड में किया गया। इस वर्कशाप में विषय प्रवर्तन मुख्य कार्यकारी श्री दिनेश कुमार ने किया। कार्यशाला में वरिष्ठ नागरिकों को हार्ट



है,जहाँ जीना कठिन, मरना जहाँ आसान है! क्या .... यही हिंदोस्तान है ?

है,जहाँ जीना कठिन, मरना जहाँ आसान है! क्या .... यही हिंदोस्तान है ? पकड़ो, पकड़ो , .... मारो ,मारो , की आवाज़ों से वहकांप रहा था । एकाएक आवाज़ें नजदीक आने लगी । उसे कुछ समझ नहीं आ रहाथा। वह जड़ खड़ा था, तभीकिसी ने झपट कर उसे खींच लिया और छिपा लिया अपने आँचल में.....थोड़ी दूर का मंजर देखकर वह छटपटाने ल



हींग लगे न फिटकरी, रंग भी चोखा

एक राजा था। उसका मंत्री बहुत ही होशियार और अड़ियल था। दरबार के कई सभासद मंत्री के खिलाफ षड्यंत्र रचते रहते थे। एक बार राज्य के एक नगर में सत्ता रोग फ़ैल गया। उस बीमारी से राजा बहुत परेशान हो गया। ना दिन को चैन, ना रात को आराम। वो राज्य को देखे या उस नगर को। राजा की परेशानी को देखते हुए, उसके मंत्री ने



नादान उठो।

नादान उठोसोये हुए को जगाना आसान है, अलसाए हुए को उठाना मुश्किल है। बोलियां चलती है तो लोग कहते है बकवास है, गोलियां चलती है तो कहते इनका दिल मर गया है। मांगते है तो, भिखारी कहते है। अगर छीनने में उतर आए, तो हैवान कहते है। पढ़ते नही तो अनपढ़ है, पढ़े लिखे तो बेरोजगार, मेहनत से कमाए तो मजदूर , मिल गई सर



आज़ादी के नारे और मुद्दों की बिरयानी।

एक स्वतत्र संप्रभुता सपन्न राष्ट्र में जब लोगनारे लगाते हैं, “हमें चाहिये आज़ादी।” तो बड़ी विडम्बना सी लगती है। साथ ही कुछ आशंकाएजन्म लेती है। आजकल नागरिकता संशोधन बिल का कुछ लोग विरोध कररहे हैं। विरोध किसी भी मुद्दे पर हो कुछ लोगों का प्रिय नारा आज़ादी का नारा है। यहनारा एक विद्रोह के नारे जैसा लगता ह



वो नक़ाबपोश कौन थे?

इंडिया बहुत बड़ा देश है। इसमें साल के बारह महीने कोई न कोई चुनाव चलता रहता है। और कोई भी सरकार रहे कहीं न कहीं किसी मुद्दे पे या मुद्दा खड़ा करके या बेमतलब धरना ,प्रदर्शन ,हड़ताल चलते रहते हैं। लोग जब हड़ताल होती है तो कभी कभी आर्थिक नुक्सान का आंकलन करते हैं। मुझे जिज्ञासा है किसी ने अध्ययन किया हो



आज़ादी के नारे ,अब

आजकल होने वाले कुछ आंदोलनों में ,ख़ास कर कुछ युवा आन्दोलनों में एक नारा बड़ी उलझन में डाल देता है और डराता भी है। वह है "आज़ादी, हमें चाहिये आज़ादी।" इसके साथ एक से अधिक उलझे सवाल पैदा किये जाते है। आंदोलन फासिस्ट और सांप्रदायिक लोगों ,पार्टियों या सरकारों के खिलाफ बताया जाता है और नारे में आगे जोड़ दिया



ए टू ज़ेड राजनीति

सी ए ए ,एन सी आर , एन पी ए , डिटेन्शन सेंटर की ए बी सी डी ने देश में कोहराम मचा रखा है । साथ ही शायद मच रहे उत्पात के पीछे मुद्दों की ए बी सी डी न समझना भी है । उपरोक्त मुद्दों पर जिसकी जो राय हो उसका सम्मान करते हुए मैं सिर्फ दृष्टिगत



आतंकवाद के साये में कमजोर होता दक्षेस

आतंकवाद के साये में कमजोर होता दक्षेस________________________________बांग्लादेश के तात्कालिक राष्ट्रपति जियाउर रहमान द्वारा 1970 के दशक में एक व्यापार गुट सृजन हेतु किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप दिसम्बर 1985 में दक्षिण एशियाई देशों के उद्धार के लिए दक्षेस जैसे संगठन को विश्व पटल पर लाया गया। यह सं



लोकतंत्र .......?

कैसा है ये लोकतंत्र ?जहाँ जनता है, ओछी मानसिकता और भ्रष्ट राजनीति की शिकार !यहाँ हर दिन नया मुद्दा , मुद्दे पर बहस होती है ,मरती है तो केवल जनता , राजनीति आराम से सोती है। त्रस्त हो चुकी है जनता , अवसाद की शिकार, मासूम जल रहे हैं या जला दिए जा रहे हैं। इंसानियत को गिरता देखकर भी हम गूंगे , बहरे ब



मुक्तक विधान

'मुक्तक चार पंक्तियाँ भार सम,मुक्तक का सिद्धांत lपंक्ति तृतीयं मुक्तता , तजि सामंत पदांत llव्यंग्य और वक्रोक्ति में , साधें शेर सदृश्य lपंक्ति तृतीयं सार है , निष्कर्षं परिदृश्य llराजकिशोर मिश्र राज प्रतापगढ़ी



मनमोहन सिंह ने कांग्रेस को लेकर किया बड़ा खुलासा, कहा- 'रोके जा सकते थे 1984 के सिख दंगे लेकिन..'

देश में चल रहे राजनीतिक विवादों के बीच अब ऐसे इंसान ने बोला है जिन्हें बोलते शायद ही आपने सुना होगा। हम यहां बात पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की करने जा रहे हैं जिन्होंंने कांग्रेस को लेकर एक खुलासा किया है और इसमें उन्होंने साल 1984 में हुए सिख दंगे का जिक्र भी किया है। आमतौर पर मममोहन सिंह को ज्



'40 हजार करोड़ बचाने के लिए सीएम बने थे देवेंद्र फडणवीस'- बीजेपी सांसद, जानिए पूरा बयान

पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र में जो कुछ भी हो रहा है उससे हर कोई वाकिफ है लेकिन असल में वहां की रणनीति कोई समझ ही नहीं पाता। जब भाजपा को वहां की सत्ता मिल गई थी तो इस्तीफा देने का क्या मतलब था। इस सवाल के साथ कई बीजेपी नेताओं ने पार्टी से सवाल किया लेकिन इसका जवाब किसी ने नहीं दिया। मगर अब इसका जवा



प.बंगाल सहित इन जगहों पर होने वाले विधानसभा उपचुनावों में बीजेपी का ऐसा रहा हाल

भारत में इन दिनों भारतीय जनता पार्टी यानी बीजेपी का खूब बोलबाला है और ऐसे में हर जगह बीजेपी की ही सरकार ज्यादातर राज्यों में बन रही है। बीजेपी की सरकरा महाराष्ट्र में भी बनने ही वाली थी लेकिन बीजेपी के देवेंद्र फिडणविश ने अनपे कदम पीछे कर लिए और अब शिवसेना के साथ कांग्रेस जा मिली है। मगर सिर्फ महारा



बहुत बड़ी कामयाबी मिलने के बाद मोदी सरकार ने ली चैन की सांस, जानिए क्या है वो खबर?

साल 2014 में पहली बार मोदी सरकार सत्ता में आई थी और इसके बाद से इस सरकार का क्रेज आम जनता के सिर हटा नहीं है। पिछली बार से ज्यादा मोदी सरकार ने लोकसभा-2019 के चुनाव में बाजी मारी और 300 के पार जाकर बहुमत से भारत में सरकार बनाई। मोदी सरकार के समर्थक देशभर में बहुत हैं तो कुछ लोगों के जलने से कोई फर्क



स्वर्गीय बाला साहब का नारा मराठा मानुष ,से सत्ता की चाह तक उद्धव ठाकरे

स्वर्गीय बाला साहब का नारा ‘मराठा मानुष’ से सत्ता की चाह तक उद्धव ठाकरे डॉ शोभा भारद्वाज एक मई 1960 बाम्बे प्रेसिडेंसी टूटने के बाद दो नये राज्यों का निर्माण हुआमहाराष्ट्र एवं गुजरात बाला साहब ठाकरे कोमहाराष्ट्र के राजनीतिक धरातल का भरपूर ज्ञान था | वह ‘मराठी मानुष के गौरव’ के ना



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