राग रंग में रंगा मिलन का त्यौहार

22 मार्च को WOW India की ओर से डिज़िटल प्लेटफ़ॉर्म ज़ूम पररंगोत्सव मनाने के लिए एक काव्य सन्ध्या का आयोजन किया गया... जिसमें बड़े उत्साहसे सदस्यों ने भाग लिया... कार्यक्रम की अध्यक्षता की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रमासिंह ने और संचालन किया WOW India की Cultural Secretary लीना जैन ने... सभी कवयित्रियों के काव



जिससे यह तन मन रंग जाए

22 मार्च को WOW India की ओर से डिज़िटल प्लेटफ़ॉर्म ज़ूम पररंगोत्सव मनाने के लिए एक काव्य सन्ध्या का आयोजन किया गया... जिसमें बड़े उत्साहसे सदस्यों ने भाग लिया... कार्यक्रम की अध्यक्षता की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रमासिंह ने और संचालन किया WOW India की Cultural Secretary लीना जैन ने... सभी कवयित्रियों के काव



सैनिक की होली ....

सैनिक की होली....*** तुम रंग रंगी बरसाने की, हम केसरिया टोली रे, आओ प्रिय दोनों खेलें, रंगों की आँख मिचौली रे। लाल गुलाबी हरा बसंती , सारे रंग रंगाना जी, सपनों में आ ज



तिरंगा

तिरंगाडॉशोभा भारद्वाज 15 अगस्त 1947 पहला स्वाधीनता दिवस ,लाल किले से देशके पहले प्रधान मंत्री श्री जवाहरलालनेहरू ने तिरंगा फहराया था, लहराता हुआ झंडा शान बान के साथ आजादी का संदेश दे रहा था. आजाद भारत केनागरिक घरों से निकल कर लाल किले के मैदान में इकठ्ठे हो कर आजादी का जश्न मना रहेथे ‘अपने’ राष्ट्र



ज़िन्दगी के कैनवास में रंग भर दूं

ज़िन्दगी के खाली पड़े कैनवास पे,जब चाहे मैं चित्र उकेर दूं। उस चित्र में जब चाहे मैं रंग भर,जिंदगी के उस कैनवास में रंग भर दूं।ज़िन्दगी का वह खाली कैनवास,अब ना रहेगा हमेशा की तरह बेरंग।पानी की लहरों की तरह,पहाड़ी झरने की तरह,अब इसमें रहेगा स



मत्तगयंद सवैया

मत्तगयंद सवैयासात भगण अंत दो गुरु211 211 211 211, 211 211 211 22साजन छोड़ गए परदेश लगे घर सून मुझे दिन राती।दूर पिया सुध में प्रियसी दिन रात जलूं जस दीपक बाती।कौन कसूर हुआ हमसे प्रिय छोड़ गए सुलगे निज छाती।ब्याह किया खुश थे कितना पर आज कहें मुझको अपघाती।निश्चल प्रेम किया उनसे समझे न पिया दिल की कछु बा



प्रकृति को समझने में चूक संकट की सबसे बडी वजह !

प्रकृति को समझने में चूक संकट की सबसे बडी वजह !अगर कोई यह दावा करें कि उसने प्रकृति को समझ लिया है तो इसपर आसानी से विश्‍वास नहीं किया जा सकता: वर्तमान समय में इस सत्‍यता को समझना काफी है कि जब यह कहा जाता है कि आज बारिश होगी या खबू गर्मी पडेगी तो उसका निष्‍कर्ष भी अक्‍सर उन भविष्‍यवाणियों की तरह हो



क्या सचमुच गलती फेयरनेस क्रीम की है ?

कुछ दिनों से क्रीम्स में जुड़े फेयरनेस शब्दको लेकर लोगों में एक नाराजगी देख रही हूं और कंपनी ने भी अपनी इस क्रीम से इस तरह के शब्द को हटाने काफैसला किया है, लेकिन कई क्रीम में सीधे सीधेफेयर शब्द नहीं जुड़ा है ग्लो या शाइन देने वाली बात कहकर भी अप्रत्यक्ष रुप सेगोरेपन को ही तव्वजोह दी जाती रही है।रह



कुछ रंग जिंदगी के



क्या काले रंग की ब्रा पहने से स्तन कैंसर हो सकता है !

ब्रा पहनने का कारण ख़ास तौर पर स्तनों को सपोर्ट देना है।





होली की शुभकामनाएं

सभी हिन्दी सपरिवार को मेरी तरफ से होली एवं रंगोली की ढेर सारी बधाई व हार्दिक शुभकामनाएं



रंग की एकादशी - कुछ भूली बिसरी यादें

रंग की एकादशी – कुछ भूली बिसरी यादेंआज फाल्गुनशुक्ल एकादशी है, जिसे आमलकी एकादशी और रंग की एकादशी के नाम से भी जाना जाता है | इस दिनआँवले के वृक्ष की पूजा अर्चना के साथ ही रंगों का पर्व होली अपने यौवन मेंपहुँचने की तैयारी में होता है | बृज में जहाँ होलाष्टकयानी फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होली के उत्सव



नम आँखें

उसकी आँखें नम थी।पदक संभालते हुए हाथ भी काँप रहे थे।पर चेहरे पर गर्व था।शहीद की माँ जो थी।लोगों ने बहुत सम्मान दिया।मगर जैसे सब कल की बात हो गई।आज किसी के पास उस बुढ़िया के लिए समय नहीं था।किसी तरह पेंशन से गुजारा हो जाता था।अपने बेटे की आँखों में देश के लिए कुछ करने की चाह देखती ,तो गर्व होता था



सतरंगी थी जिंदगी

दोहावली मार्गशीर्ष की ठण्ड में , प्रियतम गए विदेश lपूस माघ रोता फिरे, फागुन दे सन्देश ll सतरंगी थी जिंदगी , सात वचन के साथ l मन की रंगत ले गए , मुझको किया अनाथ llसधवा मन विधवा हुआ ,कर



हो जाएगा मेरा अंत....

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आस्था और विश्वास का पर्व -" छठ पूजा "

" छठ पूजा " हिन्दूओं का एक मात्र ऐसा पौराणिक पर्व हैं जो ऊर्जा के देवता सूर्य और प्रकृति की देवी षष्ठी माता को समर्पित हैं। मान्यता है कि -षष्ठी माता ब्रह्माजी की मानस पुत्री हैं,प्रकृति का छठा अंश होने के कारण उन्हें षष्ठी माता कहा गया जो लोकभाषा में छठी माता के नाम



जीवन का आनन्द

*💐 श्री राधे कृपा हि सर्वस्वम 🌹*☘🌳☘🌳☘🌳☘🌳 *जय श्रीमन्नारायण**जय श्री सीताराम*🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚 *जीवन के विविध रंग*🌲🌷🦜🌳🌷☘🦚☘💐🌹 जीवन और मृत्यु यह दोनों परस्पर मानव जीवन की अभिन्न अंग है दोनों का संबंध परस्पर जुड़ा हुआ है जीवन का उपभोग वैसे तो मनुष्य ही नहीं पशु-पक्षी कीड़े मकोड़े



किस रंग के कपडे पहने करवा चौथ पर ...

https://duniaabhiabhi.com/what-color-clothes-to-wear-today-on-karva-chauth/



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