पानी को पानी रहने दो

पानी को पानी रहने दोनदी अकेले बहकर अनेको घाट बनाती थी। हर घाट निराला होता था।पनघट मे पानी भारी बाल्टी रस्सी से खीच कर औरत सुस्ताती थी।भर मटका कलस फुरसत मे सखी सहेलियों से बतियाती थी, बेटी बहू।चरवाहा बैठ पेड़ की छांव मे मन से गीत गुंगुनाता, गीले होठो से। जानवर तालाबो मे डुबकी लगाते तैरते इतराते ले



बचपन की यह छोटी सी आदत कर देगी मोटापे की छुट्टी

बचपन में बच्चे ऐसे कई चीजें करते हैं, जो बड़े होते-होते कहीं पीछे छूट जाती हैं। फिर चाहे बात खेलने कूदने की हो या मस्तमौला स्वभाव की। वक्त बीतने के साथ यह सभी आदतें व्यक्ति के स्वभाव में नजर नहीं आतीं। लेकिन बचपन की ऐसी बहुत सी आदतें होती हैं, जो बड़े होने पर भी यदि बरकरार रखी जाए तो इससे कई तरह के ला





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