"चौपाई मुक्तक" वन-वन घूमे थे रघुराई, जब रावण ने सिया चुराई। रावण वधकर कोशल राई, जहँ मंदिर तहँ मस्जिद पाई।

"चौपाई मुक्तक"वन-वन घूमे थे रघुराई, जब रावण ने सिया चुराई।रावण वधकर कोशल राई, जहँ मंदिर तहँ मस्जिद पाई।आज न्याय माँगत रघुवीरा, सुनो लखन वन वृक्ष अधिरा-कैकेई ममता विसराई, अवध नगर हति कागा जाई।।-1अग्नि परीक्षा सिया हजारों, मड़ई वन श्रीराम सहारो।सुनो सपूतों राम सहारो, जस



काल विवश पति कहा न माना ( मंदोदरी )

काल विवश पति कहा न माना (मन्दोदरी ) डॉ शोभा भारद्वाज राम कथा के मंचन के बाद दशहरा के दिन हर वर्ष एक कतार में रावण के एक तरफमेघनाथ उसका महान शूरवीर प्रतापी पुत्र जिसने पुत्र का धर्म निभाते हुए पिता सेपूर्व युद्ध में शत्रू के हाथी मृत्यू का वरन किया दूसरी तरफ कुम्भकरण जिसने श्रीहरी की



रक्षा बन्धन

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल: |तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥जिस रक्षासूत्र को महान शक्तिशाली राजा इन्द्र को बाँधा गया था और उन्हेंबलप्राप्त होकर वे युद्ध में विजयी हुए थे उसी रक्षासूत्र में हम आपको बाँधते हैं| आप अपने संकल्पों में अडिग रहते हुए कर्तव्य प



तुलसीदास जयंती

सम्पूर्ण भारतवर्ष में गोस्वामी तुलसीदास के स्मरण में तुलसी जयंती मनाई जाती है| श्रावण मास की सप्तमी के दिन तुलसीदास की जयंती मनाई जाती है| इस वर्ष यह 17 अगस्त 2018 के दिन गोस



बुराई पर सच्चाई की जीत.... विजयादशमी पर्व

रावण का पश्चाताप : हे प्रभु राम, आजके समय में भी स्त्री के अपहरण का दंड आपके भारतवर्ष में दस वर्षों से अधिक काकारावास नहीं है । मुझे अपने अपराध का कितना और कब तक दंड देते रहेंगे... आपकेभारतवासी !!! यह सत्य है कि मेरी बहन शूर्पणखा के अ



क्यों ना हम पहले आपने अन्दर के रावण को मारें

क्यों ना हम पहले आपने अन्दर के रावण को मारें “रावण को हराने के लिए पहले खुद राम बनना पड़ता है ।“ विजयादशमी यानी अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि जो कि विजय का प्रतीक है। वो विजय जो श्रीराम ने पाई थी रावण पर, वो रावण जो प्रतीक है बुराई का, अधर्म का ,अहम् का, अहंका



रावण के महिमांडन का खंडन

रावण के महिमामंडन का खंडन आजकल सोशल मिडिया पर एक चलन बहुत तेजी से चल पड़ा है , रावण के बखान..!! वो एक प्रकांड पंडित था जी....उसने माता सीता को कभी छुआ नहीं जी....अपनी बहन के अपमान के लिये पूरा कुल दाव पर लगा दिया जी.....!!!मेरे कुछ मित्र ब्राह्मण होने के कारण



बुराई तू न गई मेरे मन से

बुराई का प्रतीक रावण, जो अपनी नाभि में अमृत होने के कारण अमर है. श्रीराम भी रावण के शरीर को ही खत्म कर पाए थे, परन्तु उसकी आत्मा को नहीं मिटा सके, क्योंकि आत्मा तो अजर-अमर है. वहीं आत्मा समाज में विचरण कर है, और अपने मन माफिक शरीर को देखते ही उसको आशिया बनाकर घिनौने कृत्





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