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मिलना

कोई तकदीर से मिलते हैं तो कोई दुआ से कोई चाहत से मिलते हैं तो कोई तकरार से कोई कोशिश से मिलते हैं तो कोई मजबूरी से ज़िन्दगी की राहों में मिलना तो तै हैं चाहे वो कैसे भी हो. ...



देह तक सिमटती आधुनिक नारी की सोच

सर्दियों का मौसम लगभग आरंभ हो गया है. सुबह और शाम को हल्की हल्की ठंड महसूस होने लगी है. रात को सोते समय पंखों का बंद होना भी शुरू हो गया है. सुबह के समय खेतों पर जाते हुए लोग गरम चादर ओढ़कर जाते हुए दिखने लगे हैं. मौसम परिवर्तन लोगों की वेषभूषा में बदलाव तो लाता ही है किन्तु जितना अधिक बदलाव पुरुषों



और कितनी दूर

और कितनी दूरपूछू गर एक सवाल माँ से मै कौन हूँ, कहाँ से आया हूँ?यह शायद ही माँ बता पाए तू कौन हैं, कहाँ से आया हैं?बस वह अपनी व्यथा ही कह सकती, तू कैसे आया हैं?हैं इश्क हमे उनसे बस एक रात का, हम बिस्तर हुए| रात याद हैं मुझे जबसे धड़कने बढ़ी,और तू बढने लगा|हा मेरी कोख मे



महिला मताधिकार की जनक : कामिनी रॉय (बांग्ला : য়ামিন রায়)

जी हां, कामिनी रॉय जिन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए अपना पूरा जीवन ही समर्पित कर दिया था । आज 12 अक्टूबर को उनकी 155वीं जयंती है । कामिनी पहली ऐसी महिला हैं जिन्होंने ब्रिटिश इंडिया में ऑनर्स में ग्रेजुएशन की थी । कामिनी एक एक्टिविष्ट, शिक्षाविद् होने के साथ ही एक



आँख में उम्र कैद

आँख में उम्र कैद बल्ब की रोशनी लकड़ी की मेज मे पड़ रही थी, मेज के ऊपर एक किताब जिसके मुख्यप्रष्ठ मे उभरता शब्द शहर की तरफ ले गया शहर नदी के किनारे बसा परछाई को उसके पानी मे पाता हैं| दिन की रोशनी और रात की रोशनी मे अलग-अलग दिखता| इन दोनों की परछाई मे एक बस्ती शामिल थी जिसकी परछाई नदी मे डूबी रहती|



रिश्ते

चाहतों का पहाड़बनाया पर चढ़ न सकाखून से हुआ जुदा,किस्मत भी दे गई दगाडॉ. कवि कुमार निर्मल



प्याज

ख्याल होगा। प्याज के दाम दोबारा बढ़े थे। पांच रुपए में एक प्याज लेने पर आंखों से आंसू झरे थे। तभी निम्न लिखित रचना कल्पना में आयी थी। पढ़ें।एक कवि नेसम्पादक को अकेला पायाइधर-उधर देखाकिसी को ईर्द-गिर्द न पाझट कक्ष मेें घुस आयासम्पादक ने सर उठायाअवांछित तत्व को सामने देखबुरा सा मुंह बनायाकंधे से लटके



अमिताभ की कुंडली ....



77 के युवा अमिताभ ...

https://duniaabhiabhi.com/amitabh-77-birthday/



आरे में आरी

हमें काटते जा रहे ,पारा हुआ पचास।नित्य नई परियोजना, क्यों भोगें हम त्रास।।धरती बंजर हो रही ,बचा न खग का ठौर।बढ़ा प्रदूषण रोग दे ,करिये इस पर गौर ।।भोजन का निर्माण कर ,हम करते उपकार।स्वच्छ प्राण वायु दिये , जो जीवन आधार ।।देव रुप में पूज्य हम ,धरती का सिंगार ।है गुण का भंडार ले औषध की भरमार ।।संतति



ऐसे करे जॉब की तलाश

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बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व दशहरा ( मन्दोदरी कथा )

बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व दशहरा (मन्दोदरी कथा ) डॉ शोभा भारद्वाज महारानी मन्दोदरी की कथा वहीं से शुरू होती है जब रावण हाथ में फरसा कमर में मृग चर्म लपेटे ऋषि एवं शूरवीर के वेश में राक्षस संस्कृति का प्रचार करते हुए कुछ उत्साही युवको



कवि की शायरी

★★★★★★★★★★★★★★आजूबाजू में हैं- मोबाइल खेलते हैं!चाँद है पास हमिमून तक भूलते हैं!!★★★★★★★★★★★★★★दिल धड़कता है महसूस गर करते।राह पर चलते, गर नहीं- बहकते।।ठहर जाना हीं काबलियत है।खुशबुओं में बह जाना हीं ज़िंदगी है।।दिल धड़कता है महसूस गर करते।राह पर चलते, गर नहीं बहकते।।★★डॉ. कवि कुमार निर्मल★★



नवमं सिद्धिदात्री

नवमंसिद्धिदात्रीनवदुर्गा– नवम नवरात्र – देवी के सिद्धिदात्री तथा अन्नपूर्णा रूपों की उपासनाकल चैत्र शुक्लनवमी तिथि है – चैत्र शुक्ल नवरात्र का नवम तथा अन्तिम नवरात्र – देवी केसिद्धिदात्री रूप की उपासना – दुर्गा विसर्जन | यों तो देवी के समस्त रूप हीसिद्धिदायक हैं – यदि पूर्ण भक्ति भाव और निष्ठा पूर्व



पुरस्कार

पुरस्कारमेरे अच्छे कर्मों के लिए,मुझे पुरस्कार है मिला।मेरी प्यारी प्यारी बहना,उसका वाह क्या है कहना।धरती मिली है भारत जैसीजो है हमारी माँ के जैसी।ये पर्यावरण मिला है ऐसापिता जैसे सब देते वैसा।और मिले संस्कार महानजैसे प्यारा हिंदुस्तान।एक पुरस्कार और मैं चाहूं,किसी को भूखा न मैं पाऊँ।देना है तो दे द



अब हिंदी में भी पसंद किया जा रहा है डिजिटल किताबों को।

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विप्र धेनु सुर संत हित लीन मनुज अवतार

विप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार डॉ शोभा भारद्वाज रावण के भय से सम्पूर्ण ब्रह्मांड थर्राने लगा दस सिर बीस भुजाओं एवं ब्रह्मा जी से अमरत्वका वरदान प्राप्त राक्षस राज रावण निर्भय निशंक विचर रहा था हरेक को युद्ध मेंललकारता |रावण का पुत्र मेघनाथमहत्वकांक्षी ,रावण के समान बलशाली पिताको समर्पित



Phrasal verb (A-Z) हिंदी अर्थ के साथ..

यह पोस्ट ‘Phrasal Verb’ पर आधारित है. इस पोस्ट हम फ्रेजल वर्ब का Definition जानेंगे साथ ही English Language में सामान्य रूप से में प्रयोग होने वाले और Competitive Exam की दृष्टि से उपयोगी सभी फ्रेजल वर्ब ( Phrasal verbs ) को अंग्रेजी और हिंदी अर्थों के साथ एक सूची (में शा



तने दरख्तों के

तने दरख्तों के शाखों से ही झुकने लगेपानी नहीं बचा कुँए सूखने लगे।मौलवी के सताए हुए इंसान यहाँहै ग़ौर कि अल्लाह पे ही थूकने लगे।ये मुमक़िन न था कि आम आएंगे कभीबोए गए थे कांटें सो उगने लगे।वो गा रहा था बदहालियाँ किसानों कीअचानक ही मंत्रियों सर दुखने लगे।बढ़ते हुए काफ़िलें मजहबों



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