झगड़ा और दुश्मनी

झगड़ा और दुश्मनीयदि आपस में कुछ या गंभीर;मनमुटाव, गलतफहमी, तकलीफ, घाटा आदि हो जाये;और बहुत गुस्सा आ जाये;तो भले ही छोटा झगड़ा कर लेना;पर दुश्मनी करना नहीं।। दुश्मनी कर लेने के बाद, पछताना ही शेष रहता है;फिर रिश्ता बचता ही नहीं; फिर से एक



भाव देने की जरूरत ही क्या है?

किसी भी बात को तभी भाव मिलता है जब उसे भाव देने वाले देते हैं. भाव नकारात्मक हो या सकारात्मक, दोनों ही स्थितियों में भाव खाने वाला अगर भाव नहीं खाएगा तो क्या करें. ऐसी स्थिति में अच्छा यह है कि भाव दिया ही न जाए. मतलब पूर्ण बहिष्कार. भला जिंदगी भी किसी के रुके से रुकी है क्या. जिंदगी को जहां तक बहना



एक राजा है एक रानी है - एक रिश्ता

एक राजा है एक रानी है गीत एक ऋषता (2001): यह अमिताभ बच्चन, राखी, अक्षय कुमार और करिश्मा कपूर अभिनीत एक ऋषता का एक प्यारा गीत है। यह अनुराधा पादुवाल, मोहम्मद अज़ीज़, सारिका कपूर और मिलिंद द्वारा गाया गया है और नादेम और श्रवण द्वारा रचित है।एक रिश्ता (Ek Rishtaa )एक राजा है एक रानी है की लिरिक्स (Ly



तुझे प्यार से देखने वाला एक दिल है - एक रिश्ता

Tujhe Pyar Se Dekhne Wala Ek Dil Hai Lyrics of Ek Rishtaa (2001): This is a lovely song from Ek Rishtaa starring Amitabh Bachchan, Rakhee, Akshay Kumar and Karisma Kapoor. It is sung by Kumar Sanu and Alka Yagnik and composed by Nadeem and Shravan.एक रिश्ता (Ek Rishtaa )तुझे प्यार से देखने वाला एक द



एक रिश्ता (Ek Rishtaa )

'एक ऋषता' 2001 की एक हिंदी फिल्म है जिसमें अमिताभ बच्चन, राखी, अक्षय कुमार, करिश्मा कपूर, जूही चावला, मोहिनी बहल, सिमोन सिंह, आलोक नाथ, आशीष विद्यार्थी, शक्ति कपूर, शरत सक्सेना, अनांग देसाई, कुनिका, अवतार गिल , तेज सप्रू, अनिल नागथ, विश्वजीत प्रधान, सुनील शेट्टी, नागा और मलय चक्रवर्ती प्रमुख भूमिकाओ



मां मेरी

मां पर निछावर तु ने दुनिया को वार दी।. जन्नत उठाकर उसके कदमों में दाल दी।. फिकी लगे सब ये दुनिया की नियामत मां के बगैर।. अपना न कोई जहां मे लगते है सारे गैर मां के बगैर ।. साये मे उसके सुकुने दिल था क्यु तु ने मेरी जन्नत उठा दी।क्या थी खता जो ऐसी सजा दी क्यु तु ने मेरी दुनिया लुटा दी।. मां पर निछावर



हार का उपहार

हार का उपहार बरसों परवानों को, दीपक कीलौ में जलते देखा है,शमा के चारों ओर पड़ेवे ढेर पतंगे देखा है. कालेज में गोरी छोरी कोघेरे छोरों को देखा है,खुद नारी नर की ओर खिंचे,ऐसा कब किसने देखा है. उसने क्या देखा, क्या जाने,किसकी उम्मीद जताती है,कहीं, ढ़ोल के भीतर पोल न हो,यह सोच न क्यों घबराती है. वह करती



चलो कुछ ऐसा कमाया जाये

चलो कुछ ऐसा कमाया जायेरिश्तों का बोझ ढहाया जायेआईने पर जम गई है धूल जोमिलकर कुछ यूं हटाया जाये#विशाल शुक्ल अक्खड़





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