ऋतुराज

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ऋतुराज

फिजाओं ने फिर, ओस की चादर है फैलाई, संसृति के कण-कण पर, नव-वधु सी है तरुणाई, जित देखो तित डाली, नव-कोपल चटक आई, ऋतुराज के स्वागत की, वृहद हुई तैयारी..... नव-वधु सी नव-श्रृंगार, कर रही ये वसुंधरा, जीर्





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